मुख्यपृष्ठनए समाचारबाजार में हो गया ‘खेल’ ...निकला टाटा, अंबानी-अडानी का ‘तेल’!

बाजार में हो गया ‘खेल’ …निकला टाटा, अंबानी-अडानी का ‘तेल’!

पीएम मोदी निजीकरण पर विशेष ध्यान देते हैं। देश की सरकारी कंपनियों को बेच रहे हैं। मोदी की कृपा से तीन ग्रुप रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा ग्रुप और अडानी ग्रुप का बिजनेस खूब फल-फूल रहा है। पीएम इन तीनों ग्रुपों पर एक तरफ मेहरबान हैं तो दूसरी तरफ एक सरकारी योजना इनका खेल बिगाड़ रही है। वर्तमान में देखा जाए तो देश के रिटेल मार्वेâट पर इन तीनों का कब्जा हो चुका है। ऐसा कोई घरेलू यूज का सामान नहीं जो ये न बना रहे हों। नमक से लेकर आटा, दाल, मसाला तक तीनों ग्रुप रिटेल मार्वेâट में बेच रहे हैं और मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। हालांकि, एक सरकारी दाल ने तीनों ही का चार महीनों में तेल निकाल दिया है। जी हां, १२० दिन में इस सरकारी दाल ने देश के २५ फीसदी मार्वेâट पर कब्जा कर सभी को चौंका दिया है।
जानकारों की मानें तो भारत ब्रांड के तहत खुदरा बाजार में बेची जा रही चना दाल घरेलू उपभोक्ताओं के बीच सबसे ज्यादा बिकने वाला ब्रांड बनकर उभरी है। इसने बाजार में उतारे जाने के चार महीनों में ही एक-चौथाई बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली है और तीनों ग्रुप के बिजनेस पर असर पड़ रहा है। उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने बुधवार को कहा कि किफायती होने के कारण इस दाल को उपभोक्ता काफी पसंद कर रहे हैं। अक्टूबर में जारी की गई भारत-ब्रांड चना दाल की कीमत ६० रुपए प्रति किलोग्राम है, जबकि अन्य ब्रांड की दाल लगभग ८० रुपए प्रति किलोग्राम है।
मीडिया रिपोर्ट में सिंह ने कहा है कि ग्राहकों की प्रतिक्रिया इतनी अच्छी रही है कि देश में परिवारों के बीच सभी ब्रांड वाली चना दाल की १.८ लाख टन मासिक खपत में से एक-चौथाई भारत ब्रांड वाली चना दाल है। उन्होंने कहा कि बाजार में उतारे जाने के बाद से लगभग २.२८ लाख टन भारत ब्रांड चना दाल बेची जा चुकी है। शुरुआत में इसकी बिक्री १०० खुदरा केंद्रों के जरिए की गई और अब २१ राज्यों के १३९ शहरों में मौजूद १३,००० केंद्रों से इसकी बिक्री की जा रही है।
महंगाई को कंट्रोल करने का दावा
उपभोक्ता मामलों के सचिव ने दालों की महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलने का दावा करते हुए कहा कि दालों की कीमतें एक ग्रुप के रूप में व्यवहार करती हैं। चने की कीमतों को नीचे लाने के लिए बफर स्टॉक का उपयोग करने से अन्य दालों की कीमतों पर भी प्रभाव पड़ता है। सरकार घरेलू उपलब्धता को बढ़ावा देने और कीमतों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से पिछले कुछ वर्षों से चने सहित विभिन्न प्रकार की दालों का बफर स्टॉक बनाकर रख रही है।

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