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फैलानी थी अशांति, इरादा था खतरनाक, पीएफआई ने बना रखी थी प्राइवेट आर्मी!

• ‘मिलिट्री विंग’ दे रहा था ट्रेनिंग
• जप्त दस्तावेजों से हुआ खुलासा
सामना संवाददाता / मुंबई
प्रतिबंधित संगठन ‘पीएफआई’ देश में बड़े स्तर पर हिंसा व गड़बड़ी पैâलाने की साजिश रच रहा था। इसके लिए उसने एक ‘प्राइवेट आर्मी’ का भी गठन किया था। इस प्राइवेट आर्मी को बाकायदा पीएफआई का ‘मिलिट्री विंग’ ट्रेनिंग भी दे रहा था। इस बात का सनसनीखेज खुलासा केरल में पीएफआई के कार्यालयों से जप्त दस्तावेजों से हुआ है। केरल से जिहादी लिटरेचर जांच एजेंसियों द्वारा जप्त किया गया था, जिससे यह साबित होता है कि पीएफआई की एक मिलिट्री विंग भी थी, जिसमें उनको आर्मी ट्रेनिंग दी जा रही थी। पीएफआई पर प्रतिबंध का मुख्य आधार यह भी है कि लगातार उनके काडरों को हथियारबंद ट्रेनिंग दी जा रही थी, जिससे वे किसी विशेष धर्म या समुदाय के ऊपर टारगेट कर सकें।
गौरतलब है कि भारत सरकार ने ‘पीएफआई’ पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उसके ऊपर ५ साल का प्रतिबंध लगा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘यूएपीए’ के तहत इस पैâसले को लिया है। बता दें कि बीते कुछ दिनों में ‘पीएफआई’ के कई ठिकानों पर एनआईए ने दो बार छापेमारी की थी। इस छापेमारी के दौरान लगभग ३०० से भी ज्यादा पीएफआई कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी भी हुई थी। सूत्रों के मुताबिक
पॉपुलर प्रâंट ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध लगाने के कई प्रमुख आधार हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार पॉपुलर प्रâंट ऑफ इंडिया पिछले कुछ सालों में सबसे ज्यादा हिंसक गतिविधियों और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल था, उनकी मौजूदगी १७ प्रदेशों में थी। पीएफआई के काडरों को लगातार प्रेरित किया जा रहा था कि वे देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हों और देश की शांति को भंग करें इसलिए इन पर प्रतिबंध लगाया गया। पुलिस और एनआईए द्वारा पीएफआई के काडरों पर देश भर में १,३०० से भी ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं, इसमें उनके संगठन भी शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से भी उनके संबंध की भूमिका साबित हुई है, जिसमें आईएसआईएस और जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश प्रमुख हैं। इससे संबंधित समय-समय पर एनआईए और राज्य पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की जा चुकी है।
पिछले ६ सालों में कम-से-कम ५ हत्याओं के ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें पीएफआई के सदस्यों की भूमिका है। इसके अलावा अन्य सदस्यों को प्रेरित करने के लिए इन वारदातों से संबंधित वीडियो भी अपलोड किए गए। पिछले ५ सालों में इन हत्याकांड को केरल और तमिलनाडु में अंजाम दिया गया। अलकायदा और आईएसआईएस की ट्रेनिंग वीडियो से मिलते-जुलते वीडियो भी छापे में जप्त किए गए हैं। जांच एजेंसियों ने अपनी जांच में पाया कि इस साल कर्नाटक में जुलाई के महीने में हुआ हत्याकांड भी पीएफआई के सदस्यों द्वारा अंजाम दिया गया है। इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने का यह भी एक प्रमुख आधार बना था। सारे वित्तीय कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए पीएफआई और उससे संबंधित एजेंसियों को लगातार देश और विदेश से पैसे मिलते रहते थे, जिसका उपयोग वे देश विरोधी गतिविधियां चलाने के लिए करते थे। ५०० से ज्यादा संदिग्ध खाते ऐसे हैं, जिसके जरिए पीएफआई को फंड मिलता रहा है और यह विदेश में रह रहे उन हिंदुस्थानियों के हैं, जो नौकरी की तलाश में गए हैं। इसमें ज्यादातर ऐसे हैं, जो खाड़ी देशों में नौकरी कर रहे हैं।

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