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गर्मी-ठंडी और बारिश में होगी वृद्धि!

सामना संवाददाता / मुंबई  

२०५० तक बनी रहेगी यह स्थिति, अध्ययन में सामने आई जानकारी

शोध संस्थान सेंटर फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी ने राज्य के सभी जिलों का अध्ययन किया है, जिसमें चौंकानेवाले निष्कर्ष सामने आए हैं। इसके अनुसार, पिछले ३० वर्षों की तुलना में २०२१-२०५० के दौरान गर्मी और सर्दियों के तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होगी। बारिश के भी बढ़ने का अनुमान है। बदलते जलवायु के गंभीर परिणाम बाढ़, कृषि, वन, वन्य जीवन, स्वास्थ्य और विकास कार्यों पर पड़ेगा।
बंगलुरु और नोएडा स्थित विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नीति केंद्र द्वारा महाराष्ट्र के सभी जिलों के लिए जनवरी २०२२ में रिपोर्ट जारी की गई थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग और आईपीसीसी के आंकड़ों के आधार पर १९९० से २०१९ तक पिछले ३० वर्षों की तुलना में भविष्य के वर्षों २०२१-२०५० तक वायु प्रदूषण में मध्यम और उच्च वृद्धि के प्रभाव के आधार पर महाराष्ट्र में जलवायु परिवर्तन का अनुमान लगाया गया है।

तापमान बढ़ने का खतरा

अध्ययन में विदर्भ के सभी जिलों में बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण २०२१-२०५० के दौरान गर्मियों और सर्दियों के तापमान में १ से २ डिग्री सेल्सियस की वृद्धि की भविष्यवाणी की गई है। हालांकि, कुछ जिलों में गर्मी कम हो जाएगी, लेकिन इसकी तीव्रता बढ़ जाएगी, खासकर चंद्रपुर जिले में।

बढ़ेगी अतिवृष्टि की घटनाएं  

विदर्भ में १९९० से २०१९ के बीच भारी बारिश हुई है। उस पृष्ठभूमि पर बढ़ते प्रदूषण के कारण विदर्भ जिले में हर साल २ से ८ बार भारी बारिश या बादल फटने की घटनाएं होंगी। बढ़ते वायु प्रदूषण के मौजूदा पूर्वानुमान के अनुसार यवतमाल को छोड़कर सभी जिलों में बारिश के दिन बढ़नेवाले हैं।

तपेगा महाराष्ट्र

२०२१-२०५० तक महाराष्ट्र में तापमान एक डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा और अगर प्रदूषण जारी रहा तो तापमान दो डिग्री सेल्सियस पहुंच सकता है। इस कारण गर्मियों में महाराष्ट्र में ०.२५ से ०.४२ डिग्री तक तापमान बढ़ेगा। सर्दियों में इसके ०.३ से ०.५५ डिग्री तक बढ़ने की संभावना है। इस पूर्वानुमान के मुताबिक उत्तरी महाराष्ट्र और विदर्भ में तापमान में बढ़ोतरी अधिक होगी। हालांकि, उत्तर और दक्षिण महाराष्ट्र में सर्दियों के तापमान में कमी आएगी।

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