मुख्यपृष्ठग्लैमर‘ये दूरियां जरूर मिटेंगी!’-आमना शरीफ

‘ये दूरियां जरूर मिटेंगी!’-आमना शरीफ

टीवी शो ‘कहीं तो होगा’ में कशिश गरेवाल और ‘कसौटी जिंदगी की’ में कोमोलिका चौबे का किरदार निभानेवाली आमना शरीफ को दर्शक आज भी भूले नहीं हैं। टीवी के साथ ही बॉलीवुड की चंद फिल्मों में काम करनेवाली आमना इन दिनों ओटीटी प्लेटफॉर्म पर नए शो ‘आधा इश्क’ को लेकर सुर्खियों में हैं। इस शो में आमना शरीफ रोमा का किरदार निभा रही हैं, जिसका दिल प्यार में टूट चुका है। पेश है, आमना शरीफ से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

 एक लंबे गैप के बाद इस शो को स्वीकारने की क्या वजह रही?
वैसे तो कोई अहम नहीं वजह है और है भी। मैंने ओटीटी प्लेटफॉर्म के शो ‘डैमेज्ड’ के दो सीजन किए और अब तीसरा सीजन करने जा रही हूं। यह एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर क्राइम ड्रामा है। मैं यह कह सकती हूं कि फिलहाल टीवी से मेरा ब्रेक हुआ है क्योंकि कोई दिलचस्प शो या किरदार मेरे पास आया ही नहीं।

 क्या यह टीवी गैप हमेशा रहेगा?
ये दूरियां जरूर मिटेंगी। बशर्ते मुझे टीवी पर अर्थपूर्ण किरदार ऑफर हो।

 शो ‘आधा इश्क’ को स्वीकारने की क्या वजह रही?
‘आधा इश्क’ एक ऐसी प्रेम कहानी है, जो मंजिल तक नहीं पहुंच पाई। दोनों प्रेमियों के बिछड़ने के १० वर्षों बाद जब वे दोबारा मिलते हैं, तो कुछ ऐसा घटता है कि दोनों किनारे एक नहीं हो पाते। कहानी की प्रोटोगनिस्ट है रोमा जिसका किरदार मैंने निभाया। और प्रेमी हैं गौरव, जिनका ऑन स्क्रीन नाम है साहिल। इस किरदार के कई लेयर हैं, जो दिल को छुए बिना नहीं रहते।

रोमा का किरदार निभाने के लिए क्या आपको होमवर्क करना पड़ा?
रोमा के किरदार की कई परतें हैं। हो सकता है प्यार में बिछड़कर अपने प्रेमी से फिर बिछड़ना किसी अन्य के जीवन में ऐसा हुआ भी हो। इंसानी रिश्ते और जीवन के उतार-चढ़ाव कितने मुश्किल होते हैं, जीवन की कश्मकश से जूझना आसान नहीं। हर सीन पर डिस्कशन के साथ ही वर्क शॉप भी हुआ। निर्देशक द्वारा कंफर्टेबल करवाए जाने के बाद किरदार को निभाना आसान हो गया।

कैसी यादें जुड़ी हैं ‘आधा इश्क’ की?
‘आधा इश्क’ की शूटिंग के दौरान हम कश्मीर में थे। दिसंबर-जनवरी में मुंबई का मौसम सुहाना होता है लेकिन कश्मीर में माइनस ६ तापमान था। एक सीन के दौरान मुझे एक पतला ड्रेस पहनना था। ठंड से बुरा हाल था लेकिन जैसे ही

कैमेरा रोल हुआ मैं ये भूल गई कि मुझे ठंड भी लग रहा है।

 

एक महिला निर्देशक के साथ अभिनय करने में कितनी सहूलियत होती है?
अगर मैं अपनी बात करूं तो मेरा सभी निर्देशकों के साथ सामंजस्य बेहद अच्छा रहा। मेरे लिए महिला निर्देशक हों या पुरुष निर्देशक सभी एक जैसे हैं। नंदिता की खासियत यह रही कि उन्होंने मुझे बहुत आजादी दी और कहा कि मैं जैसा चाहूं वैसा सीन को परफॉर्म कर सकती हूं। उन्होंने मुझ पर विश्वास दिखाया।

 छोटे पर्दे पर आप क्या बदलाव देखती हैं?
छोटे पर्दे पर रियलिटी शोज काफी मात्रा में नजर आते हैं, फिर चाहे वो सिंगिंग शोज हों या कॉमेडी या फिर डांस शोज। फिक्शन शोज में महिला प्रधान किरदार काफी हैं लेकिन अभी इन दिनों मुझे कोई किरदार पसंद नहीं आया। ओटीटी प्लेटफॉर्म में जरूर कायापलट हुआ है। महिला किरदार बहुत स्ट्रॉन्ग बनते जा रहे हैं और यह बदलाव बहुत सुखद है। मैं तो कहती हूं यह क्रांतिकारी बदलाव है।

 

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