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संपादकीय: वे सूर्य के मालिक नहीं हैं!

मणिपुर में जल्द ही शांति का सूर्य उगेगा, यह आश्वासन प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में दिया। ‘इंडिया’ गठबंधन द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के कारण प्रधानमंत्री को लोकसभा में आकर बोलना पड़ा। दो घंटे के भाषण में वे मणिपुर पर सिर्फ तीन मिनट बोले। बाकी का सभी वही रटा-रटाया पुराण था, वही उन्होंने कांग्रेस पर लादा, ये उनकी मानसिक हताशा है। पंडित नेहरू का वैश्विक बड़प्पन , स्वतंत्रता की लड़ाई में कांग्रेस का कार्य ये मोदी के लिए यातना है। दस वर्ष सत्ता भोगने के बाद भी मोदी इस यातना से उबर नहीं पाए हैं। मणिपुर समस्या का ठीकरा उन्होंने पंडित नेहरू पर फोड़ा, तो फिर पिछले दस वर्षों में सत्ता में रहकर आपने क्या किया? मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी, वी.पी. सिंह ये सभी गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे हैं और अब खुद मोदी के दस वर्ष प्रधानमंत्री रहने के बावजूद मणिपुर का ठीकरा नेहरू पर फोड़ना यह राजनीतिक दिवालियापन ही है। मणिपुर में महिलाओं का निर्वस्त्र जुलूस निकाले जाने की घटना के दौरान मोदी ही प्रधानमंत्री हैं, इसी वजह से लोग मोदी से सवाल पूछ रहे हैं। इसमें नेहरू का क्या दोष? अब मोदी कहते हैं कि मणिपुर में शांति का सूर्य उगेगा। जब आप कहें तभी उगने के लिए क्या सूर्य पर भाजपा का मालिकाना हक है? अविश्वास प्रस्ताव के दौरान कइयों के मुखौटे उतर गए और सत्ता पक्ष का चिड़चिड़ापन सभी के सामने आ गया। संसद से बाहर फेंके गए राहुल गांधी का भाषण ही इस चिड़चिड़ेपन की मुख्य वजह रही। आज राहुल गांधी दस साल पहले वाले नहीं रहे। सत्य वचन और निडर गांधी के सामने मोदी-शाह के नेतृत्व को चुनौती मिल रही है। कहते हैं कि अमित शाह के लंबे भाषण ने लाल बहादुर शास्त्री का रिकॉर्ड तोड़ दिया। शाह के भाषण में धमकी, चेतावनी, कांग्रेस को दोष देने के अलावा क्या था? शाह कोई स्वतंत्रता संग्राम और जनांदोलन से तप-निखरकर बाहर निकले नेता नहीं हैं। मोदी की व्यक्तिगत जरूरत की वजह से शाह गृहमंत्री पद पर बैठे हैं। तानाशाह को अपने गैरकानूनी आदेशों को लागू करवाने के लिए एक करीबी हवलदार की जरूरत पड़ती है। देश में विरोधियों पर जो दबाव, आतंकवाद शुरू है वह अमित शाह के हाथों में गृहमंत्रालय व जांच एजेंसियों की वजह से ही है, लेकिन यह सब २०२४ के बाद उनके हाथों में नहीं रहनेवाला है। इसी बात की चिढ़ शाह और मोदी के लंबे भाषणों में दिखाई दी। २०१४ व २०१९ के दो मौकों पर कांग्रेस को हराने के बावजूद इन दोनों को वर्ष २०२४ में कांग्रेस का डर सता रहा है और वे कांग्रेस पर ही लगातार हमले कर रहे हैं। यह इनकी मानसिक दुर्बलता है। मणिपुर मुद्दे पर राजनीति नहीं करने का आह्वान मोदी ने किया है। मोदी ने २ घंटे १३ मिनट का भाषण किया, जिसमें से २ घंटे १० मिनट राजनीति और बचे हुए ३ मिनट मणिपुर पर थे। अविश्वास प्रस्ताव के दौरान मोदी-शाह पूर्ण रूप से कांग्रेसमय हुए नजर आए। मोदी के सभी भाषण घिसे-पिटे होते हैं। पूर्वोत्तर भारत से मेरा खुद का भावनात्मक नाता है। मोदी जिन राज्यों या देशों में जाते हैं, वहां से अपना भावनात्मक नाता जुड़ा होने की बात कहते हैं। यदि इतने भावनात्मक नाते-रिश्ते होते ही तो फिर मणिपुर में जब निर्वस्त्र कर महिलाओं के बार-बार जुलूस निकाले जा रहे थे, तब प्रधानमंत्री मोदी की भावनाएं क्यों जम गई थीं? यदि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया गया होता तो मोदी मणिपुर का मौन कभी नहीं तोड़ते। अविश्वास प्रस्ताव ढह गया। वो ढहनेवाला ही था। इसमें सरकारी पक्ष को ‘श्रेष्ठता’ का ढोंग रचने की क्या जरूरत है? मोदी को आखिरकार मणिपुर पर मुंह खोलना पड़ा और अविश्वास प्रस्ताव का उद्देश्य सफल हो गया। मोदी ने राहुल गांधी पर तंज कसे। कांग्रेस के पास एक ही प्रोडक्ट है। यही प्रोडक्ट वह हमेशा लॉन्च करते हैं और हर बार फेल हो जाते हैं। यदि मोदी की बात को कुछ पल के लिए सही भी मान लें, तो फिर वह कांग्रेस और गांधी से इतना क्यों घबराते हैं? भाजपा के पास मोदी नाम और दंगे के सिवा कोई दूसरा प्रोडक्ट हो तो उसे वो बाजार में उतारे। इस प्रोडक्ट की ‘एक्सपायरी डेट’ २०२४ तक है और इसके बाद भारत का राजनैतिक बाजार पूरी तरह से बदल चुका होगा। प्रधानमंत्री कहते हैं कि साधारण परिवार का बालक प्रधानमंत्री के रूप में बैठा है, इसीलिए आपकी नींद उड़ी हुई है। मोदी का बर्ताव पिछले दस सालों में कभी साधारण बालक जैसा नहीं दिखा। साधारण घर के बालक ने सरकारी पैसे से खुद के लिए बीस हजार करोड़ का विमान खरीदा है और वे दस लाख का सूट पहनते हैं। नेहरू जैसे लोग रईसी में पैदा हुए पर सत्ता पाने के बाद सादगी से रहे। नेहरू ने तो अपनी संपत्ति देश को दान कर दी। कृष्ण के मित्र गरीब सुदामा थे। मोदी के मित्र कौन हैं और उन मित्रों के लिए मोदी क्या-क्या करते हैं यही राहुल गांधी ने बताया है। अविश्वास प्रस्ताव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में जो लंबा भाषण दिया उसमें अहंकार, गैर जिम्मेदारी, चिड़चिड़ापन ज्यादा नजर आया। मणिपुर पर वे केवल तीन मिनट बोले। मणिपुर पर अपना अभिभाषण यदि उन्होंने संसद के दोनों सदनों में किया होता तो ‘इंडिया’ पक्ष को अविश्वास प्रस्ताव लाना नहीं पड़ता और मोदी को इस उम्र में २ घंटे १३ मिनट तक चिड़चिड़ नहीं करनी पड़ती। मोदी ने अपने भाषण से कांग्रेस को बड़ा बना दिया। २०२४ में उनका सूर्य नहीं उगेगा, यह उनके भाषण ने पक्का कर दिया। वे सूर्य के मालिक नहीं हैं!

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