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विषकन्या जैसी है यह सरकार… मदद मिलते ही प्रयोग बंद हो जाता है! केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का ‘घाती’ सरकार पर सनसनीखेज तंज

सामना संवाददाता / भंडारा
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी एक कार्यक्रम के दौरान ‘घाती’ सरकार पर तंज करते हुए कहा कि सरकार ‘विषकन्या’ की तरह है। जिधर सरकार की मदद मिलती है, वहां प्रयोग बंद पड़ जाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारी ऐसे भी मिलते हैं, जिन्हें समझाते-समझाते सिर के बाल तक उड़ जाते हैं। भंडारा जिले में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में नितिन गडकरी बोल रहे थे।
गडकरी ने कार्यक्रम के दौरान वहां पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सही अर्थ में मैं सरकार में हूं। मैं हरदम कहता हूं कि सरकार के काम में कभी हस्तक्षेप करने का नहीं और कभी उनसे मदद लेने का नहीं। मैं मजाक में कहता हूं कि सरकार विषकन्या की तरह है, जिधर सरकार की मदद मिलती है, वहां वो प्रयोग बंद पड़ जाता है। मैं अब सोशल एंटरप्रेनर हूं। मैं कभी सरकार से मदद लेता नहीं हूं, कभी सरकार के अधिकारियों के पास जाता नहीं हूं। उन्होंने कहा कि यहां बैठे हुए अधिकारी अच्छे हैं। बाकी के अधिकारियों का हाल है कि वो काम बंद ही कर देते हैं।
उनको कनविंस करते-करते सिर के बाल उड़ जाते हैं। गडकरी ने आगे कहा कि उन्हें अधिकारियों ने कहा कि अभोरा तक रास्ता सही है, उसके आगे जो अनदेखी करनेवाले वन अधिकारी हैं, वे रास्ता बनने नहीं दे रहे हैं। तो कलेक्टर साहब से मेरी विनती है कि मैं तंग हो चुका है। एसपी साहब से भी विनती है कि अपनी नई कलम लगाकर इन्हें अंदर डालें। पवनी से भंडारा तक का पूरा रास्ता १२ वर्षों में बनने नहीं दिया। मैंने पैसा सैंक्शन किया हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगले महीने १७ तारीख को मैं देवेंद्र फडणवीस के साथ आने वाला हूं। कलेक्टर साहब थोड़ा ध्यान देकर इसे करें। मैं इतनी मीटिंग लेकर परेशान हो गया हूं। अगर कोई नई धारा है तो लगाओ और इस सड़क कार्य में अड़चन पैदा करने वाले भ्रष्ट वन अधिकारी पर अपराध दर्ज करके उन्हें अंदर डालो। इन शब्दों में गडकरी ने अधिकारियों के कामकाज पर रोष जताया। उन्होंने कहा कि गरीब का जाति, पंथ और धर्म नहीं होता, इसलिए मानवता के आधार पर विचार किया जाना चाहिए। गडकरी ने कहा कि महिला, पुरुष, मजदूर और किसान इस तरह चार ही जाति है। व्यक्ति जाति से नहीं, बल्कि गुणों से बड़ा बनता है।

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