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ये अंदर की बात है, दाऊद ‘इनके’ साथ है… दाऊद के करीबी की शादी में मंत्री महाजन वैâसे?… विरोधियों ने की एसआईटी जांच की मांग

सामना संवाददाता / नागपुर

‘घाती’ सरकार में मंत्री गिरीश महाजन के साथ देशद्रोहियों के रिश्ते होने के मुद्दे पर विपक्ष ने कल विधान परिषद में जोरदार हंगामा किया। वर्ष १९९३ में हुए मुंबई बम विस्फोट के मुख्य आरोपी दाऊद इब्राहिम के करीबी की शादी में महाजन मौजूद थे। उस शादी समारोह की तस्वीरों को ही विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन में दिखाया और इस मामले में एसआईटी जांच कराने पर अड़ गए। इसके साथ ही उन्होंने ‘देश के गद्दारों को, जूते मारों सालों को’, ‘ये अंदर की बात है, दाऊद ‘इनके’ साथ है’ जैसे जोरदार नारे लगाए।
इस दौरान शिवसेनापक्षप्रमुख व विधायक उद्धव ठाकरे भी सदन में मौजूद थे। महाजन की एसआईटी जांच किए जाने को लेकर भारी हंगामा होने की वजह से सभापति डॉ. नीलम गोNहे ने सदन को स्थगित कर दिया।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक एकनाथ खडसे ने नियम २८९ के तहत ये मुद्दा सदन में उपस्थित किया। खडसे ने गिरीश महाजन का नाम लिए बिना ये गंभीर आरोप लगाया। नासिक के ठक्कर डोम में दाऊद के भाई इकबाल कासकर के करीबी का शादी समारोह था। उस शादी में नासिक के तत्कालीन पालक मंत्री व मौजूदा ग्रामविकास मंत्री गिरीश महाजन के साथ एसीपी राजू भुजबल, मधुकर फड, सोमनाथ तांबे समेत २०-२५ पुलिस अधिकारी और भाजपा के नगरसेवक मौजूद थे। ये बातें एकनाथ खडसे ने सदन में कहीं। खडसे ने आरोप लगाया कि इतना ही नहीं बल्कि गिरीश महाजन का दाऊद के गुर्गे सलीम कुत्ता के साथ भी संबंध था। इसके साथ ही उन्होंने एसआईटी जांच की मांग की। खडसे के आरोप से बौखलाए सत्ता दल की बेंच पर बैठे विधायकों ने आपत्ति दर्ज करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि २८९ के तहत यह मुद्दा उपस्थित किया जा रहा है, इसलिए मंत्री के नाम का उल्लेख नहीं किया जा सकता है। इस पर खड़से ने कहा कि शिवसेना के सुधाकर बडगुजर का नाम लेना तुम्हें चलता है, उनकी जांच कराई जाती है, फिर महाजन की भी जांच की जानी चाहिए।
शिवसेना विधायक अनिल परब ने भी इस मामले पर राज्य सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा कि वह शादी समारोह किसी आम व्यक्ति का नहीं था। क्योंकि उस शादी में कौन आता है, इस पर गुप्तचर विभाग ने नजर रखी हुई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि उस शादी में गए पुलिस वालों की जांच सरकार ने की तो फिर मंत्री की क्यों नहीं? सभापति डॉ. नीलम गोNहे ने विरोधी दलों के सदस्यों की मांग पर किसी तरह का विचार किए बिना, उल्टे उन्हें ही बैठने के लिए कहा।

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