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यह भाजपा राज है … पुलिस पर दबाव की गारंटी! …चार-चार मौतों के जिम्मेदार ठेकेदार से गृहमंत्री ने स्वीकारा सम्मान

मीरा-भाईंदर की जनता हुई अवाक
आजाद घूम रहे हैं मजदूरों की मौत के जिम्मेदार
पुलिस ने नहीं बनाया है आरोपी
निर्माणकार्य नियम व शर्तों के मुताबिक बिल्डर होता है जिम्मेदार
सामना संवाददाता / भायंदर
चुनाव में पीएम मोदी लोगों को अपनी गारंटी बांटते फिर रहे हैं, पर मीरा- भायंदर में तो कुछ अलग ही गारंटी देखने को मिल रही है। यहां पुलिस पर दबाव बनाने की गारंटी साफ दिख रही है। असल में मीरा-भायंदर में भाजपा के पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता बतौर बिल्डर सक्रिय हैं। शहर में उनके कई प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। पिछले कुछ अरसे में उनके प्रोजेक्ट्स में कई हादसे हुए हैं, जिनमें चार-चार मौतें हुई हैं, पर पुलिस निष्क्रिय बनी हुई है। इसका कारण है कि मेहता की पहुंच सीधे गृहमंत्री तक है। हाल ही में गत २४ मई को मेहता की कंपनी द्वारा निर्माणाधीन फेज-३ में कार्यरत एक मजदूर की सिर पर पत्थर लगने से मौत हो गई।
इस मामले में पुलिस ने फेज ३ के सुपरवाइजर और ठेकेदार पर हल्की धारा ३०४-ए के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद मेहता और ठेकेदार दोनों गूहमंत्री फडणवीस का सम्मान करते नजर आए, ताकि पुलिस दबाव में आकर कोई बड़ी कार्रवाई न करे। चार-चार मौतों के जिम्मेदार और सरकार की इस मिलीभगत से मीरा-भायंदर की जनता अवाक रह गई।

मेहता पर क्यों मेहरबान है पुलिस?
बार-बार होते हादसों के बावजूद हल्की धारा में दर्ज होते हैं केस

सितंबर २०२२ में लोहे का एंगल गिरने से दो बच्चों की मौत
फरवरी २०२४ में एक युवक की बिल्डिंग से गिरकर मौत
मई २०२४ में सिर पर पत्थर लगने से एक मजदूर की मौत

भाजपा के पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता व उनके परिवार के स्वामित्ववाली सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन कंपनी का मीरा-भायंदर में अपना घर के तहत फेज-३ का निर्माण कार्य चल रहा है। गत २४ मई को वहां हुए एक हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई थी। इसके पहले भी मेहता के प्रोजेक्ट्स में कई मौतें हो चुकी हैं। पर पुलिस हमेशा मेहता और निर्माणकार्य करनेवाले ठेकेदार महेंद्र कोठारी पर मेहरबान रही है। इसलिए उनके खिलाफ अब तक मामला दर्ज कर उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है। इसके साथ ही लगातार तीन मजदूर और दो छोटे बच्चों की मौत के मामलों में काशीमीरा और नवघर पुलिस ने केवल लापरवाही का मामला दर्ज किया है। आश्चर्य यह व्यक्त किया जा रहा है कि इन घटनाओं के बाद भी उनके खिलाफ धारा ३०४ के तहत मामला दर्ज करना तो दूर की बात रही उन्हें आरोपी भी नहीं बनाया गया।
बता दें कि दूसरी घटनाओं में बिल्डर और ठेकेदार पर मामला दर्ज किया जाता है, लेकिन पूर्व विधायक मेहता और कोठारी भाजपा के करीबी हैं इसलिए वे आज तक आजाद घूम रहे हैं।
गौरतलब है कि घाटकोपर में हुए होर्डिंग हादसे से लेकर पुणे कार हादसा और डोंबिवली में बॉयलर फटने के मामले में सामाजिक दबाव के कारण कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है। लेकिन ठाणे जिले के मीरा-भायंदर क्षेत्र में तीन मजदूरों और एक बच्चे की मौत के जिम्मेदार भाजपा के पूर्व विधायक व बिल्डर नरेंद्र मेहता व ठेकेदार महेंद्र कोठारी बिंदास घूम रहे हैं। आरोप है कि दबाव तंत्र के कारण मेहता को पुलिस ने आरोपी तक नहीं बनाया है, जबकि निर्माणकार्य के नियम व शर्तों के अनुसार, निर्माण स्थल पर दुर्घटना में मजदूर की मौत का जिम्मेदार बिल्डर होता है। दूसरी ओर यह भी आरोप लग रहे हैं कि रविवार को मेहता ने उत्तन के रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी में जाकर गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी। यहां से पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश हुई है। दूसरी तरफ इस जानमाल के नुकसान पर मनपा की ओर से भी अनदेखी की जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन कंपनी के अपना घर फेज-३ गृहनिर्माण परियोजना का निर्माण कार्य चल रहा है। उक्त कंपनी भाजपा के पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता और उनके परिवार की है। शुक्रवार की दोपहर अपना घर फेज-३ में एक निर्माण परियोजना में काम कर रहे २२ वर्षीय मजदूर डब्लू बृजलाल यादव के सिर पर एक पत्थर गिर गया। इस हादसे में उसे गंभीर चोटें आर्इं। ऐसे में बिना देरी के उसे भायंदर के भीमसेन जोशी सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे पहले ही मृत घोषित कर दिया। इस मामले में मृतक के भाई द्वारा २४ मई की रात शिकायत करने के बाद काशीगांव पुलिस ने अपना घर फेज-३ के सुपरवाइजर और ठेकेदार के खिलाफ ३०४-ए के तहत मामला दर्ज किया था। इसमें जिक्र किया गया है कि सुपरवाइजर और ठेकेदार की तरफ से मजदूर की सुरक्षा के लिए किसी तरह का कोई भी उपाय नहीं किया गया था। सुरक्षा के प्रति बरती गई लापरवाही के कारण ही मजदूर की मौत हुई है। दूसरी तरफ इसमें मुख्य बिल्डर और आर्किटेक्ट को पूरी तरह से निर्दोष छोड़ दिया गया है। हालांकि, इस जगह पर पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि पुलिस ने तुरंत धारा ३०४ नहीं लगाई।

रामभरोसे मजदूरों की सुरक्षा
मीरा-भायंदर में सैकड़ों इमारतों का निर्माण कार्य शुरू है, जहां हजारों की संख्या में मजदूर काम कर रहे हैं। हालांकि, ठाणे कामगार विभाग के अधिकारी ऐसे स्थानों पर जाकर मजदूरों की सुरक्षा के लिए मुहैया कराए गए उपायों का मुआयना करने की बजाय अपनी कुर्सी गरम करने में व्यस्त हैं। यही कारण है कि अकेले सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन निर्माण स्थल पर पांच से छह बेगुनाहों की जान चली गई हैं। कामगार विभाग के नींद में होने के कारण मजदूरों की मौत अब बिल्डरों को सस्ती दिखाई देने लगी है।

धारा ३०४ और ३०४-ए का फर्क
पुलिस ने इस मामले में धारा ३०४-ए के तहत मामला दर्ज किया है। यह एक हल्की धारा है, जिसमें गिरफ्तारी नहीं होती और आरोप साबित होने पर २ साल की मामूली सजा का प्रावधान है। दूसरी तरफ धारा ३०४ में गिरफ्तारी के साथ ही आरोप साबित होने पर १० वर्षों की सजा का प्रावधान है। अब मेहता के मामले में पुलिस ने मेहरबानी करते हुए सिर्फ ३०४-ए के तहत मामला दर्ज किया है।

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