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ये है मुंबई मेरी जान! यहां के बुजुर्ग हैं सबसे सुरक्षित, ७० % के पास है वित्तीय सुरक्षा

सुजीत गुप्ता / मुंबई
पिछले कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि वृद्धावस्था में आने के बाद कुछ परिवारों में बुजुर्गों के साथ अधिक दुव्र्यवहार होता है। उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक परेशान किया जाता है। उनकी ठीक तरह से देखभाल नहीं की जाती, साथ ही सबसे बड़ी बात उन्हें प्यार से दो वक्त की रोटी भी ढंग की नसीब नहीं होती। लेकिन अब समय के साथ-साथ परिस्थितियां भी अनुकूल  हो रही हैं और युवा पीढ़ी में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और उनकी देखभाल की प्रवृत्ति बढ़ रही है। ‘हेल्प एज इंडिया’ की एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार मुंबई के बुजुर्ग आर्थिक, शारीरिक और परिवार द्वारा दिए जा रहे खान-पान के मामले में अन्य शहरों के मुकाबले मस्त हैं। मुंबई के ७० फीसदी से अधिक बुजुर्ग कहते हैं कि उनके पास वित्तीय सुरक्षा है।
बता दें कि ‘हेल्प एज इंडिया’ ने देश के २२ शहरों में एक सर्वे किया है। इस सर्वे में ४,३९९ बुजुर्ग और उनकी देखभाल करनेवाले २,२०० नवयुवकों को शामिल किया गया। सर्वे की दिलचस्प बात ये है कि राष्ट्रीय स्तर पर ४७ फीसदी बुजुर्ग आय के स्त्रोत के लिए परिवार पर निर्भर हैं। मुंबई में बड़ी संख्या में बुजुर्गों को परिवार का समर्थन प्राप्त है। ४० फीसदी बुजुर्गों ने खुद को आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस नहीं किया, वहीं मुंबई के ५८ फीसदी बुजुर्गों का कहना है कि उनकी आय पर्याप्त है, जबकि ४२ फीसदी कहते हैं कि यह अपर्याप्त है। मुंबई के ७० फीसदी से अधिक बुजुर्ग कहते हैं कि उनके पास वित्तीय सुरक्षा है। खास बात ये है कि सर्वे में बुजुर्गों की देखभाल में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण पाई गई। ७८ फीसदी बुजुर्गों ने कहा कि उनका परिवार उन्हें अच्छी तरह से खिलाता है और अच्छा भोजन प्रदान करता है।
सर्वे रिपोर्ट पर ‘हेल्प एज इंडिया’ के महाराष्ट्र और पुणे रीजन के हेड प्रकाश एन. बोरगांवकर का कहना है कि कोरोना के बाद बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा की आवश्यकता प्रबल रूप से उभरकर सामने आई है, जिसमें ४९ फीसदी बुजुर्गों ने बेहतर स्वास्थ्य बीमा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य के लिए अपनी आकांक्षा व्यक्त की है और ४२ फीसदी ने कहा है कि घर से और अधिक सहायता मिलनी चाहिए। बुजुर्गों के स्वास्थ्य की देखभाल में स्वाभाविक रूप से व्यवस्थित निवेश की आवश्यकता है, जिसमें बुजुर्गों को ध्यान में रखते हुए और अधिक सुविधाएं तथा उनके लिए उपयुक्त स्वास्थ्य देखभाल योजनाएं हों।

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