मुख्यपृष्ठनए समाचारये सुशासन राज है! रोज ८ बार पिटती है पुलिस

ये सुशासन राज है! रोज ८ बार पिटती है पुलिस

  • १५१ दिन में १३ सौ बार हुए हमले

सामना संवाददाता / पटना
भाजपा के समर्थन से सत्ता का सुख भोगनेवाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के २ाज में बिहार में सुशासन के बड़े-बड़े दावे भाजपा और जदयू के लोग करते हैं। लेकिन बिहार से जुड़ी एक शर्मनाक सच्चाई सामने आई है। खबरों की मानें तो बिहार में पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं। राज्य में सुशासन बाबू की पुलिस दिन में कम से कम आठ बार तो लोगों से पिट ही जाती है। पुलिस की सबसे ज्यादा फजीहत शराब के कारोबारी करते हैं। शराब बिक्री रोकने के प्रयास के दौरान बिहार पुलिस के पुलिसकर्मियों पर सर्वाधिक हमले होते हैं। इसी साल अब तक के साढे पांच महीनों में पुलिस पर करीब १,३०० बार हमले हो चुके हैं।
बता दें कि बिहार के भोजपुर में दारोगा की पिटाई का मामला सामने आया है। इस बारे में जांचने पर पता चला कि इस तरह की घटनाएं बिहार में आम हैं।
राजधानी पटना से लेकर राज्य के ३८ जिलों में कहीं भी पुलिस हर जगह शराब माफियाओं के कोप का शिकार बनती रही है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में रोजाना औसतन ८ जगह पुलिस पिट रही है। जनवरी से लेकर मई तक १५१ दिन में बिहार पुलिस पर १,२९७ बार हमले हुए हैं।
सामूहिक एफआईआर से बिगड़ती है बात
पुलिस पर हमला होने के बाद एक सिरे से कई लोगों पर एफआईआर की जाती है। इस कार्रवाई में भी पुलिस का आक्रोश दिखाई देता है और पुलिस ऐसे लोगों का नाम भी रिकॉर्ड में लाती है, जो घटना में शामिल ही नहीं होते हैं। ऐसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पुलिस अगर निष्पक्ष होकर काम करे और कार्रवाई से पहले घटना की जड़ तक पहुंच जाए, तो काफी हद तक हालात सुधर सकते हैं।
जनता से सुधारे संबंध
जानकारों का मानना है कि बिहार पुलिस ने जनता से संबंध नहीं सुधरा तो मामले और बढ़ेंगे। इतना ही नहीं पुलिस थानों पर भी भीड़ के हमलों के मामले बढ़ जाएंगे। जनता से संवाद के लिए अफसर गंभीर नहीं हुए तो मुश्किल बढ़ेगी। दोषी पुलिसवालों पर कार्रवाई न होना भी एक महत्वपूर्ण कारण है क्योंकि जनता का गुस्सा बढ़ता है।

मामला शराब बिक्री पर रोक का सामने आया चौंकानेवाला सच
बिहार पुलिस जनवरी में खूब पिटी है। बिहार पुलिस के आंकड़ों की बात करें तो २०२२ के जनवरी माह में बिहार पुलिस पर अलग-अलग जिलों में ३७४ बार हमला हुआ है। पुलिस के लिए नए साल का जनवरी सबसे ज्यादा पिटनेवाला महीना रहा। फरवरी में भी पुलिस २११ बार पिटी, जबकि मार्च में लोगों ने उस पर २२७ बार हमला किया, वहीं अप्रैल में १९० और मई में २९५ बार आम लोगों ने पुलिस पर हमला किया है। गुप्तचर विभाग के सूत्रों का दावा है कि पुलिस टीम पर हमला करनेवाली बिहार की आम जनता अब अफसरों को निशाना बना सकती है। जनता का मानना है कि पुलिसकर्मियों को पीटने से कोई सुननेवाला नहीं इसलिए अधिकारियों को सबक सिखाया जाना चाहिए।

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