मुख्यपृष्ठग्लैमर‘मेरा यह कदम दिल बहलाने के लिए था!’ -करिश्मा तन्ना

‘मेरा यह कदम दिल बहलाने के लिए था!’ -करिश्मा तन्ना

२००१ में धारावाहिक ‘सास भी कभी बहू थी’ से अपने करियर की शुरुआत करनेवाली करिश्मा तन्ना ने शो ‘कुसुम’, ‘शरारत’, ‘पालखी’ और रियलटी शो ‘बिग बॉस’, ‘खतरों के खिलाड़ी’ में काम कर खुद को साबित किया है। इस वक्त करिश्मा ‘बुसान फिल्म फेस्टिवल’ में बतौर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री फिल्म ‘स्कूप’ के लिए नॉमिनेट हुई हैं, जो काबिले तारीफ है। पेश हैंै, करिश्मा तन्ना से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

 आपको फिल्म ‘स्कूप’ का ऑफर कैसे मिला?
मैं जिंदगी भर हंसल मेहता की शुक्रगुजार रहूंगी, जिन्होंने जागृति पाठक का किरदार मुझे दिया। एक तेज-तर्रार क्राइम जर्नलिस्ट का किरदार था। फिल्म ‘स्कूप’ को पसंद किए जाने के बाद मेरे पूरे करियर में पहली बार मुझे इतनी प्रशंसा मिली। इस किरदार को निभाकर मैं वाकई धन्य हो गई।

क्राइम जर्नलिस्ट के लिए आपको किस तरह की तैयारी करनी पड़ी?
मुझे अपने किरदार से रूबरू हंसल मेहता ने कराया। उनकी ब्रीफिंग और उनके आइडियाज मेरे लिए बेहद कारगर साबित हुए।

 जीवन के किस भावुक क्षण पर आपकी आंखें नम हुई थीं?
मैं खुद को एक आम इंसान मानती हूं। ये अलग बात है कि मैं अभिनय के प्रोफेशन में हूं। लेकिन इंसान आम हो या खास सबकी भावनाएं एक सी होती हैं। कई बार मैं भी आहत हुई हूं कभी व्यक्तिगत तो कभी प्रोफेशनल कारणों से। जिस घटना का मैं जिक्र कर रही हूं, उसके बारे में मुझे मेरी मां से काफी बाद में पता चला। मेरे जन्म के वक्त सभी यह मानकर चल रहे थे की बेटा होगा। लेकिन मेरे पैदा होने के बाद मेरे माता-पिता इतने निराश हुए कि काफी देर तक उन्होंने मेरी शक्ल तक नहीं देखी। जाहिर-सी बात है कि दुनिया की कोई भी लड़की यह घटना सुनकर आहत होगी।

 प्राय: पढ़े-लिखे परिवारों में लड़का-लड़की में भेदभाव नहीं किया जाता?
मैं एक मिडिल क्लास जॉइंट गुजराती परिवार में जन्मी हूं। टिपिकल गुजराती परिवार में भी बेटा होने का प्रेशर होता है क्योंकि बेटा ही परिवार का चिराग होता है। मेरी मां को पहले ही एक बेटी थी इसलिए दादा और दादी की इच्छा थी कि मां बेटे को ही जन्म दे। दादी का यह रवैया मुझे दुखी कर गया।

 बड़े होने पर आपकी क्या प्रतिक्रिया थी?
भला एक बेटी क्या प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकती है? मैंने खुद यह निर्णय लिया कि अपने माता-पिता को दुनिया की किसी भी चीज की कोई कमी नहीं होने दूंगी। एक लड़का अपने माता-पिता के सारे कर्त्यव्य निभाता है, वैसे मैं उनके लिए सारे कर्तव्य निभाऊंगी और उन्हें हमेशा खुश रखूंगी, कभी उन्हें यह कमी महसूस न हो कि उन्होंने बेटे को जन्म नहीं दिया।

 आपने टीवी, फिल्म और ओटीटी पर काम किया है। आपका प्रिय माध्यम कौन सा है?
हर माध्यम का अपना फायदा है, नुकसान कुछ भी नहीं। टीवी के लिए काम करना इसलिए फायदेमंद है क्योंकि एक ही समय में आप करोड़ों लोगों के घर में पहुंच सकते हैं। फिल्मों की मोहमाया का क्या कहना? खुद को बड़े पर्दे पर देखना एक अलग ही अनुभूति है। अगर किरदार मेमोरेबल हो और फिल्म सफल रही तो क्या कहने? ओटीटी को दुनिया भर में देखा जा रहा है। मेरे लिए यह तीनों माध्यम अहमियत रखते हैं।

 फिल्म ‘संजू’ में काम करने के बावजूद इस फिल्म की सफलता का आपको खास फायदा न मिलने की क्या वजह रही?
राजकुमार हिरानी जैसे निर्देशक ने जब मुझे फिल्म ‘संजू’ के लिए अप्रोच किया तो मुझे बेहद खुशी हुई। रणबीर कपूर जैसा स्टार और हिरानी जैसा निर्देशक मेरे लिए काफी था। लेकिन फिल्म रिलीज होने के एक साल बाद भी मुझे कोई काम नहीं मिला। इसकी क्या वजह रही इसका मुझे अनुमान नहीं। शायद किस्मत में यही लिखा था। मेरे लिए ये अजीब बात थी कि इस फिल्म की सफलता के बाद भी मुझे कोई काम नहीं मिला, जिसकी मैंने उम्मीद की थी। इस वजह से मैं निराशा में घिर गई। मैंने दोस्तों को मैसेज कर उनसे फिल्म में अपनी परफॉर्मेंस के बारे में पूछा। खैर, मेरा कदम दिल बहलाने के लिए था।

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