मुख्यपृष्ठनए समाचारअबकी बार दलबदलू सरकार ... भाजपा के २५% उम्मीदवार दूसरी पार्टी छोड़कर...

अबकी बार दलबदलू सरकार … भाजपा के २५% उम्मीदवार दूसरी पार्टी छोड़कर आए हैं

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
भाजपा ने ‘अबकी बार ४०० पार का नारा दिया है पर असलियत में उसे अबकी बार दलबदलू सरकार का नारा देना चाहिए था। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा ने इस चुनाव में अपने जितने प्रत्याशियों को टिकट दिए हैं, उनमें एक बड़ी संख्या दलबदलू उम्मीदवारों की है। ये वे उम्मीदवार हैं, जो दूसरे दल से भाजपा में आए हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, सूची में लगभग एक-चौथाई या ४३५ में से १०६ ऐसे नेता हैं, जो पिछले १० वर्षों में किसी समय भाजपा में पहुंचे और इनमें से ९० पिछले पांच साल में भाजपा में शामिल हुए हैं। ऐसे उम्मीदवारों का सबसे ज्यादा अनुपात आंध्र प्रदेश में है, जहां भाजपा ने छह उम्मीदवार उतारे हैं। उनमें से एक को छोड़कर सभी २०१९ से २०२४ के बीच दूसरी पार्टी से आए हैं। इसमें न केवल कांग्रेस और वाईएसआरसीपी के नेता शामिल हैं, बल्कि विडंबना यह है कि इसके मौजूदा सहयोगी टीडीपी के नेता भी इसमें शामिल हैं। पड़ोसी तेलंगाना में भाजपा के १७ उम्मीदवारों में से लगभग दो-तिहाई अन्य दलों से आए हुए हैं। इन चुनावों से पहले ऐसे ११ उम्मीदवारों में से छह भाजपा में शामिल हो गए हैं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ऐसे राज्य हैं जहां भाजपा की अतीत में सीमित उपस्थिति रही है। यहां तक ​​कि हरियाणा में भी १० में से छह उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन्होंने २०१४ के बाद से पाला बदला है। उनमें से दो नवीन जिंदल और अशोक तंवर इस लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी में शामिल हुए थे। पंजाब में पार्टी के आधे से अधिक १३ उम्मीदवार उन लोगों में से हैं जो अन्य दलों में थे। उनमें से कुछ कांग्रेस में थे, लेकिन उन्होंने वैâप्टन अमरिंदर सिंह के साथ कांग्रेस छोड़ दी पर जब उन्होंने अपने नवोदित संगठन का भाजपा में विलय कर दिया, तो वे भाजपा का हिस्सा बन गए। झारखंड में भी पंजाब की ही तरह है, जहां १३ उम्मीदवारों में से सात एक दशक या उससे कुछ कम समय तक अन्य दलों के सदस्य रहे हैं। जिन राज्यों में बड़ी संख्या में उम्मीदवार एक-दूसरे के पाले में गए हैं, उनमें उत्तर प्रदेश प्रमुख है। वहां भाजपा के ७४ उम्मीदवारों में से २३ प्रत्याशी साल २०१४ और अब के बीच भाजपा में शामिल हुए हैं।

अन्य समाचार