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‘कमल’ की राह में कांटे! …जयललिता की पार्टी के बाद अब जनसेना पार्टी ने छोड़ा भाजपा का साथ! … पार्टीप्रमुख ने किया एनडीए छोड़ने का एलान

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
२०१४ लोकसभा चुनाव से पहले तक सबका साथ सबका विकास का नारा देनेवाली भारतीय जनता पार्टी अब बदल चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके विशेष सहयोगी अमति शाह की नई भाजपा अब जरूरत के अनुसार लोगों का साथ लेती है और मतलब निकलते ही साथ छोड़ देती है। २०१४ में केंद्र की सत्ता तक पहुंचने के बाद पीएम मोदी और भाजपा ने सिर्फ विपक्षी दलों और नेताओं को ही खत्म करने की कोशिश करती है ऐसा नहीं है, बल्कि अपने सहयोगी दलों एवं भाजपा में प्रतिद्वंद्वियों को भी खत्म करने का हरसंभव प्रयास मोदी-शाह की अगुआई वाली केंद्र सरकार अब तक कर चुकी है और इस भाजपाई फितरत से अब ‘एनडीए’ में शामिल भाजपा के सहयोगी दल भी भलीभांति समझने लगे हैं। इस वजह से एनडीए में भाजपा और एनडीए में पलायन शुरू हो गया है। तमिलनाडु में जयललिता की पार्टी एआईएडीएमके के द्वारा एनडीए छोड़ने के बाद अब जनसेना ने एनडीए छोड़ने का एलान कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गलत नीतियों के कारण पहले से ही कमजोर हो चुकी भाजपा अपने नेताओं और सहयोगी दलों की भगदड़ से और कमजोर हो गई है। ये पलायन २०२४ में कमल की राह के कांटे बन सकते हैं, ऐसा सियासी पंडित दावा कर रहे हैं।
अभिनेता और नेता पवन कल्याण ने गुरुवार को भाजपा के नेतृत्ववाली एनडीए से बाहर निकलने और टीडीपी का समर्थन करने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश को विकास के लिए जनसेना और टीडीपी की जरूरत है। जनसेना के प्रमुख ने कहा, ‘टीडीपी एक मजबूत पार्टी है और आंध्र प्रदेश को सुशासन और विकास के लिए तेलुगु देशम पार्टी की जरूरत है। आज टीडीपी संघर्ष कर रही है, और हम उनके साथ हैं। इस स्थिति में टीडीपी को जनसैनिकों की जरूरत है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘अगर टीडीपी और जनसेना हाथ मिला लें तो राज्य में वाईएसआरसीपी की सरकार डूब जाएगी।’
टीडीपी का समर्थन करेंगे पवन कल्याण
चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी के बाद से पवन कल्यान आंध्र प्रदेश की वाईएसआर जगनमोहन रेड्डी की सरकार से खफा हैं। जनसेना पार्टी के नेता पवन कल्याण १४ सितंबर को चंद्रबाबू नायडू से मिलने राजामुंदरी सेंट्रल जेल गए थे। इसके बाद उन्होंने १८ सितंबर को दिल्ली में आयोजित एनडीए की बैठक में भी हिस्सा लिया था। इस बैठक में पवन कल्याण ने कहा था कि वह भाजपा का समर्थन करेंगे। उन्होंने बताया, ‘पूरी बैठक बहुत अच्छी रही। इस दौरान आत्मनिर्भर भारत पर चर्चा की गई। अपनी पार्टी की तरफ से मैंने पीएम को वादा किया है कि हम उनके साथ खड़े हैं।’ पवन कल्याण ने आंध्र प्रदेश में वाईएसआरसीपी सरकार से लड़ने के लिए अपनी पार्टी, एनडीए और टीडीपी को एक साथ खड़े होने का प्रस्ताव भी रखा था। लेकिन अब उन्होंने एनडीए का साथ छोड़ने का पैâसला कर लिया है। साल २०१९ में हुए चुनाव में पवन कल्याण की जनसेना पार्टी ५.६ फीसदी वोट शेयर के साथ केवल एक सीट जीती थी, जबकि टीडीपी ने ३९.७ वोट शेयर के साथ २३ सीटें जीतने में कामयाब हो पाई थी। वहीं वाईएसआरसीपी ने ५०.६ वोट शेयर के साथ १५१ सीटें हासिल की थी।

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