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हजारों मुंबईकरों का ‘आरे को कारे’! मेट्रो कारशेड के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई का फेफड़ा माने जानेवाले आरे कॉलोनी पर फिर से कुल्हाड़ी चलाने के शिंदे सरकार के फैसले  के खिलाफ रविवार को हजारों मुंबईकर सड़क पर उतरे। दुर्लभ वन संसाधनों के साथ सैकड़ों वन्यजीवों का घर आरे कॉलोनी में मेट्रो-३ कारशेड परियोजना की जिद क्यों? ऐसे ‘आरे को कारे’ को लेकर सवाल नई शिंदे सरकार से पूछा गया। आरे के जंगल में कारशेड बनाने के शिंदे सरकार के फैसले के खिलाफ मुंबई समेत पूरे राज्य के पर्यावरणविदों ने आरे कॉलोनी में तीव्र विरोध प्रदर्शन कर निषेध व्यक्त किया।
तीन साल पहले तत्कालीन फडणवीस सरकार ने पर्यावरणविदों के विरोध के बावजूद मेट्रो कारशेड के लिए आरे कॉलोनी में रातों-रात बेशुमार पेड़ों को काट दिए थे। इस पर बड़ा असंतोष पैदा हुआ था। बाद में सत्ता में आई महाविकास आघाड़ी सरकार ने पर्यावरण के हित में फैसला लेते हुए मेट्रो कारशेड परियोजना को कांजुरमार्ग में स्थानांतरित कर आरे कॉलोनी को बचा लिया। हालांकि देवेंद्र फडणवीस को सत्ता में स्थान मिलते ही उन्होंने विवादास्पद मेट्रो कारशेड परियोजना को आरे में ही बनाने की हठवादिता भूमिका अपनाई है। इस पर पर्यावरणविदों में आक्रोश है।
रविवार की सुबह हजारों मुंबईकरों ने आरे कॉलोनी में मोर्चा निकाला। आरे के जंगल को बचाने के लिए नए सिरे से आंदोलन शुरू किया गया है। कई पर्यावरण संगठनों के कार्यकर्ता आरे कॉलोनी में स्थित एक पिकनिक पॉइंट पर एकत्रित हो गए। उन्होंने कानूनी दायरे में रहते हुए जोरदार विरोध किया और ‘आरे को कारे’ की आवाज बुलंद की। इसमें शामिल लोगों ने कहा कि हम कारशेड परियोजना के कतई विरोध में नहीं हैं, लेकिन पर्यावरण को नष्ट कर और पेड़ों को काटकर किसी भी विकास परियोजना की अनुमति नहीं देंगे। आरे जंगल न केवल मुंबईकरों को ऑक्सीजन प्रदान करता है, बल्कि यह तेंदुओं की दुर्लभ प्रजातियों और ३०० से अधिक अन्य वन्यजीवों का घर भी है। यहां करीब पांच लाख पेड़, नदियां और तालाब भी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि नई सरकार करोड़ों की परियोजनाओं को लागू करते समय इन वन्यजीवों और वृक्ष संसाधनों पर विचार क्यों नहीं करती है? ठाकरे सरकार के कार्यकाल में संरक्षित वन क्षेत्र घोषित आरे में कारशेड परियोजना को फिर से लागू करने पर जोर क्यों दिया जा रहा है?
नष्ट होगा आरे का संपूर्ण जंगल
वनशक्ति संस्था के पदाधिकारी डी. स्टालिन ने शिंदे सरकार के फैसले का कड़ा विरोध किया है। आरे के जंगल में केवल मेट्रो कारशेड ही नहीं बनाया जाएगा, बल्कि इसकी आड़ में रियल इस्टेट क्षेत्र में बड़े डेवलपर्स के लिए नया रास्ता खोलने की साजिश है। इस जंगल में मेट्रो स्टेशन और स्टेशन के पास ९० एकड़ के एसआरए प्रोजेक्ट की योजना है। एसआरए परियोजना १.५ लाख लोगों को समायोजित करेगी। साथ ही प्राणी संग्रहालय, मेट्रो भवन, आरटीओ टेस्टिंग सेंटर सहित लेबर कैंप आदि के लिए कई प्लॉट अधिग्रहित किए गए हैं।

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