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हिंदुस्थान में बढ़ा ‘टोमैटो फ्लू’ का खतरा! … केंद्र ने जारी की गाइडलाइन

• इलाज-लक्षण सब बताया
•  बीमारी की जद में आ रहे बच्चे
•  केरल में सामने आए सबसे ज्यादा मामले

सामना संवाददाता / मुंबई
एक तरफ हिंदुस्थान कोरोना वायरस और मंकीपॉक्स जैसे वायरस से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश में एक नई बीमारी अपने पैर पसारने लगी है, जिसे टोमैटो फ्लू भी कहा जा रहा है। अभी तक हिंदुस्थान में इस बीमारी के ८२ मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इस साल छह मई को केरल के कोल्लम जिले में ‘टोमैटो फ्लू’ का पहला मामला सामने आया था। केंद्र सरकार ने देश में बच्चों के बीच ‘टोमैटो फ्लू’ के ८२ मामले सामने आने के बाद मंगलवार को राज्य सरकारों को एहतियाती उपायों का पालन करने का निर्देश दिया। केंद्र ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस रोग के इलाज के लिए कोई विशिष्ट दवा नहीं है। यह रोग हाथ, पैर और मुंह की बीमारी का एक स्वरूप प्रतीत होता है। यह मुख्य रूप से १० वर्ष से कम आयु के बच्चों में होता है लेकिन वयस्क भी इसके शिकार हो सकते हैं। केंद्र द्वारा जारी दिशा-निर्देश में कहा गया है कि बच्चों को बीमारी के संकेतों और लक्षणों और इसके दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए।

कोविड, चिकनगुनिया और डेंगू से नहीं है कोई संबंध
केंद्र ने कहा कि वैसे तो ‘टोमैटो फ्लू’ में अन्य वायरल संक्रमणों की तरह (बुखार, थकान, बदन दर्द और त्वचा पर चकत्ते जैसे) लक्षण दिखते हैं, लेकिन इस वायरस का सार्स-कोव-२, मंकीपॉक्स, डेंगू या चिकनगुनिया से कोई संबंध नहीं है। इसके अब तक ८२ से अधिक मामले सामने आने की सूचना है। इसके लक्षणों बुखार, रैशेज, जोड़ों में दर्द, थकावट, जोड़ों में सूजन, गले में खराश शामिल है। इसकी शुरुआत हल्के बुखार से होती है।
कम उम्र के बच्चों को ‘टोमैटो फ्लू’ होने का जोखिम अधिक है। यदि इसके प्रकोप को रोका और नियंत्रित नहीं किया जाता तो वयस्कों में भी संक्रमण पैâल सकता है।

कोविड मरीज हो रहे ‘न्यूरोसायकियाट्रिक’ का शिकार
कोरोना महामारी से आज भी पूरा विश्व लड़ाई लड़ रहा है। महामारी की शुरुआत से लेकर अब तक दुनिया में करीब ६०० मिलियन लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं। संभावना जताई गई है कि यह महामारी भविष्य में और भी खतरनाक हो सकती है। इन सबके बीच एक नया अध्ययन सामने आया है, जिसमें एक बार कोविड को मात देते हुए ठीक होने वाले लोगों में ‘न्यूरोसायकियाट्रिक’ विकार का शिकार होने का खतरा अधिक है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में कोविड से ठीक हुए लगभग १.२८ मिलियन लोगों के स्वास्थ्य का विश्लेषण किया।

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