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तीन साल पहले काटने पड़ गए थे हाथ-पैर … अब फिर अपने पैरों पर खड़ा होगा! … युवक के दोनों हाथों का हुआ प्रत्यारोपण

सामना संवाददाता / मुंबई
मध्य प्रदेश के उज्जैन में रहनेवाले ३२ वर्षीय व्यक्ति को तीन साल पहले बिजली का झटका लगा था। उस हादसे में झुलसे उसके दोनों हाथ और एक पैर को काटना पड़ा। हालांकि, करीब तीन साल बाद मुंबई के एक निजी अस्पताल में उसके दोनों हाथों को प्रत्यारोपित किया गया है। ऐसे में वह सामान्य जिंदगी जी सकेगा।
उज्जैन निवासी जीवेश कुशवाह दिसंबर २०२० में स्टील पैâब्रिकेशन पैâक्ट्री में काम कर रहा था। उसी समय गलती से उसे हाई वोल्टेज बिजली का झटका लगा था। इस हादसे में उसके दोनों हाथ और एक पैर बुरी तरह से झुलस गया था। इसके बाद उसे बिना देरी के नजदीकी अस्पताल में ले जाया गया। उसकी स्थिति को देखते हुए इंदौर के अस्पताल में उसे रेफर किया गया। उसकी स्थिति को देखते हुए और जान बचाने के लिए चिकित्सकों ने उसका दाहिना पैर और कोहनी के नीचे से दोनों हाथ काट दिए। इस बीच उसके परिवार ने कृत्रिम अंग खरीदे, लेकिन कृत्रिम हाथ पूरी तरह से काम नहीं कर रहे थे। इस कारण वह अपने दैनिक कार्यों को भी ठीक से नहीं कर पा रहा था। इसी बीच उसे मुंबई के ग्लोबल अस्पताल के बारे में जानकारी मिली। उसके आधार पर परिवार वाले उसे जून २०२२ को मुंबई में लेकर पहुंचे। ग्लोबल अस्पताल के प्लास्टिक, हैंड और रिक्स्ट्रशन मायक्रो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. निलेश सतभाई ने कहा कि मरीज के स्वास्थ्य की जांच करके हाथ प्रत्यारोपण सर्जरी की सलाह दी गई। इसके बाद मरीज और उसका भाई जनवरी २०२४ में फिर मुझसे मिले और हाथ प्रत्यारोपण सर्जरी करने की इच्छा व्यक्त की। इसके लिए उन्होंने प्रत्यारोपण लिस्ट में पंजीयन कराया और एक महीने के भीतर ही उन्हें एक ब्रेन-डेड डोनर का हाथ मिला।
चुनौतीपूर्ण थी सर्जरी
डॉ. सतभाई ने कहा कि इस मामले में काफी चुनौतियां थीं, क्योंकि जीवेश को लगी चोट के कारण दोनों विच्छेदन स्टंप पर बहुत गंभीर घाव हो गए थे। दोनों विच्छेदन स्टंप पर त्वचा के ग्राफ्ट थे और अंतर्निहित संरचनाएं जख्मी और सिकुड़ी हुई थीं। इसके अलावा दाता के हाथों को अलग तरीके से विच्छेदित और तैयार किया जाना था, ताकि प्राप्तकर्ता की आवश्यकताओं से मेल खाया जा सके। सर्जरी १२ घंटे से ज्यादा समय तक चली। मरीज की सेहत में सुधार देखकर डिस्चार्ज दे दिया गया। अगले ६-९ महीनों में उसके हाथ की कार्यक्षमता ठीक-ठाक हो जाने की संभावना है। मरीज आजीवन इम्यूनोसप्रेशन पर रहेगा।

दैनिक गतिविधियों में होती थी परेशानी
मरीज जीवेश कुशवाह ने कहा कि हाथों को खोने से मैं काफी चिंतित रहता था, क्योंकि दैनिक गतिविधियों में परेशानी होती थी। लेकिन सर्जरी के बाद अब मुझे नए हाथ मिले हैं। अब मैं फिर से अपनी जिंदगी पहले की तरह जी सकता हूं। मरीज के भाई मनोज कुशवाह ने कहा कि तीन साल के बाद मेरे भाई का हाथ प्रत्यारोपण हुआ है। उसे नए हाथ मिलने से मैं काफी खुश हूं।

तीन सालों में हुआ १०वें हाथ का प्रत्यारोपण
ग्लोबल अस्पताल के सीओओ आयएचएच हेल्थकेयर इंडिया के डॉ. विवेक तलौलिकर ने कहा कि अस्पताल में बीते तीन सालों में १०वें हाथ का प्रत्यारोपण हुआ है। उन्होंने कहा कि मरीजों को नई जिंदगी देने के लिए हम प्रयत्नशील हैं। हमें इस बात पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है कि प्रत्येक व्यक्ति अंग दान करने का विकल्प चुनकर किसी की जिंदगी बचा सकता है, इसलिए अंगदान के बारे में जागरूकता निर्माण करना जरूरी हैं।

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