मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनामेहनतकश: रिक्शा चालकों के लिए २० वर्षों से संघर्ष

मेहनतकश: रिक्शा चालकों के लिए २० वर्षों से संघर्ष

अशोक तिवारी

मुंबई शहर के कोने-कोने में ऐसी शख्सियतें मिल जाती हैं जो स्वार्थ से परे होकर राष्ट्रहित में एवं मजदूर वर्ग तथा गरीबों के लिए रात दिन संघर्ष करती रहती हैं। उनका एक ही सपना होता है कि गरीब व्यक्तियों के साथ कहीं भी अन्याय और अत्याचार न होने पाए। गरीब लोगों के अधिकारों के लिए कभी-कभार ऐसे गुमनाम समाज सेवकों को अक्सर धमकियां भी आती रहती हैं, लेकिन धमकियों से बिना डरे समाज के ये सिपाही समाज के लिए लड़ते रहते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी साकीनाका के अखिलेश तिवारी की है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के बदलापुर से वर्ष १९९१ में मुंबई शहर आए अखिलेश तिवारी अपना पुश्तैनी प्रिंटिंग प्रेस का कारोबार संभालते हुए अपने परिवार का भरण पोषण करने में जुट गए। इस दौरान वर्ष १९९२ में बाबरी मस्जिद टूटने के बाद मुंबई शहर में भयानक दंगे हुए। मुंबई के साकीनाका क्षेत्र में दंगों की आग कुछ ज्यादा ही थी। इस आग को बुझाने के लिए अखिलेश तिवारी ने क्षेत्र के कुछ समाजसेवकों एवं युवकों को इकट्ठा किया और दंगा पीड़ित व्यक्तियों की तन-मन-धन से मदद करने लगे। दूसरोें की मदद करने के दौरान उनके दिल में समाजसेवा करने की लालसा बलवती हो गई, जिसके बाद अखिलेश तिवारी ने ‘नव शक्ति रिक्शा चालक मालक यूनियन’ की स्थापना की, क्योंकि दंगों के दौरान बहुत से ऑटो चालक ऐसे थे जिनके ऑटो रिक्शा को जला दिए गए थे। यूनियन के माध्यम से आज अखिलेश तिवारी हजारों रिक्शाचालकों की मदद कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने ‘ब्राह्मण एकता सेवा संस्था’ का भी गठन किया, जिसके माध्यम से वह रामनवमी, जन्माष्टमी, भागवत गीता का पाठ, देवी जागरण तथा दीन-दुखियों को फल, मिठाई, कंबल इत्यादि का वितरण जैसी सेवाएं समाज में करते रहते हैं। मुंबई शहर में नशे का जाल तेजी से बढ़ रहा है। इस नशे के जाल में युवा वर्ग भी तेजी से फंस रहा है। अखिलेश तिवारी ने इस संदर्भ में नशामुक्ति अभियान भी चलाया। पिछले दिनों घाटकोपर में अखिलेश तिवारी के नेतृत्व में हजारों नागरिकों ने नशामुक्ति के लिए पुलिस स्टेशन का घेराव किया था, जिसके बाद घाटकोपर पुलिस सक्रिय हुई और क्षेत्र के नशे के बड़े पैडलरों पर लगाम लगाई गई। ऑटोचालकों को पुलिस द्वारा निरर्थक प्रताड़ित करने के कई मामलों में भी अखिलेश तिवारी ने प्रशासन के समक्ष उठाया और चालकों को न्याय भी दिलवाया। इस समाजसेवा के दौरान अखिलेश तिवारी को कई बार जान से मार देने की धमकियां भी मिलीं। एक बार तो उन पर हमला भी हुआ, लेकिन अखिलेश तिवारी बिना डरे अपने कार्य को अंजाम देते रहे। सामना संवाददाता द्वारा पूछने के बाद अखिलेश तिवारी ने कहा कि मैं समाज का सिपाही नहीं, बल्कि समाज का एक अदना-सा नौकर हूं। परमात्मा ने जितनी बुद्धि और बल दिया है, उसी के अनुसार समाज की सेवा करने का प्रयास करता हूं और करता रहूंगा।

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