मुख्यपृष्ठस्तंभमेहनतकश : ...ताकि हो समाज का विकास

मेहनतकश : …ताकि हो समाज का विकास

अनिल मिश्र

उल्हासनगर जैसे शहर में अधिकांश लोग कानून को ताक पर रखकर गैरकानूनी तौर पर काम करने के समर्थक हैं। ऐसे लोगों को उनके अधिकार के प्रति जागरूक करने के अलावा शहर में तरह ढंग से भ्रष्टाचार पैâलाने वाले लोगों की पोल बड़ी मेहनत और सबूत के साथ खोलने का काम समाजसेवक नरेश कुमार टहिलरामानी कर रहे हैं, जिससे उल्हासनगर बर्बादी की बजाय आबादी के मार्ग पर जा सके। उल्हासनगर जिसे नकली माल बनाने, गैर कानूनी धंधे का लगा धब्बा मीट सके। उल्हासनगर में जिस तरह से विस्थापित राष्ट्रप्रेमियों का शहर था,वैसे ही बनाने का सपना है। उल्हासनगर सुंदर दिखाई दे सके ऐसा कुछ काम करने का इरादा है। नरेश जी कार्यों से शहर के समाज कंटक की भूमिका के लोगों की नींद हराम सी हो गई है। इलाहाबाद बैंक में काम करते हुए। बीच में ही स्वेच्छा सेवानिवृत्ति ले लिए। बीमा में भी काम किए। मिलने वाली पेंशन से इमानदारी के साथ सादा जीवन उच्च विचार के समर्थक हैं।
नरेश कुमार टहिलरामानी का मानना है कि जो व्यक्ति हराम की आय से अपने परिवार का पालन- पोषण करता है। उसकी पीढ़ी कुल का नाश करती हैं। २००५ में बनी `जन सूचना का अधिकार’ का प्रयोग कर उल्हासनगर मनपा में किए गए पेड़ घोटाला को उजागर किए, जिसमें मनपा ने २०० पेड़ लगाने के लिए ३० लाख खर्च बताए। गहराई से जांच के बाद घोटाला सामने आया। इसके अलावा दर्जनों अवैध कार्यों को उजागर किए। उल्हासनगर वैंâप नंबर चार के बीटीसी गार्डन, इंडोर गेम परिसर में बच्चों को खेलने का अधिकार दिलाया गया। उल्हासनगर शिक्षण मंडल में सदस्य रहने के बाद विद्यालय के कामकाज में पारदर्शिता लाई गई। प्रभाग चार का कार्यालय पांच साल में खतरनाक हो गया। किस ठेकेदार ने बनाया उस पर कार्रवाई की मांग की। सोशल मीडिया, फेसबुक पर उल्हासनगर के लोगों के जनहित का मुद्दा उठाते रहते हैं। उल्हासनगर में पानी, लाइट, सडक के अलावा अवैध निर्माण, खतरनाक इमारत, उसमें रहने वाले लोगों की समस्या, पार्किंग, बढ़ते अपराध, वाहन जैसे तमाम मुद्दों को प्रशासन के सामने रखते आ रहे हैं। उल्हासनगर में प्रदूषण बढ़ रहा हैं। खुली हवा नहीं मिल पा रही है। उल्हासनगर में जनसुविधा देने में लोक प्रतिनिधियों की असफलता के कारण लोगों का दूसरे शहरों की तरफ पलायन शुरू है। उल्हासनगर सिटीजन फोरम जैसी संस्था बना कर उसके मार्फत उल्हासनगर के शासक, प्रशासन तथा उल्हासनगर के लोगों को जगाने का काम कर रहे हैं। उल्हासनगर में आरक्षित दर्जनों भूखंड भूमाफियाओं ने हड़प लिया। सैकड़ो शौचालय भवन निर्माताओं ने हड़प लिया। शासन प्रशासन ने कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया। ईमानदार, शहर से प्रेम करने वाले लोगो को ही चुनने की जरूरत हैं। नए लोग ही शहर का विकास कर सकते हैं।

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