मुख्यपृष्ठसमाचारयूपी के अस्पतालों का गजब हाल...जिंदा को बताया मुर्दा!

यूपी के अस्पतालों का गजब हाल…जिंदा को बताया मुर्दा!

कोरोना मुआवजे के लिए भेजा एप्लीकेशन
सामना संवाददाता / कानपुर । जिंदा इंसान को मृत घोषित करने के मामले में यूपी के कानपुर के चार अस्पतालों से सीएमओ ने मामले की पूरी रिपोर्ट मांगी है। दरअसल राज्य सरकार द्वारा कोरोना से हुई मौत के बाद ५० हजार रुपए की सहायता पीड़ित परिवार को दी जा रही है। इसी क्रम में जब कार्यालय में मुआवजे के लिए आई एप्लिकेशन की जांच हुई तो कानपुर के पांच ऐसे लोग पाए गए जो मृत नहीं, बल्कि जीवित हैं। डीएम नेहा शर्मा ने हो रही धांधली की जांच सीएमओ डॉ. नेपाल सिंह को सौंपी है।
जांच में मिली अस्पतालों की मनमानी
सीएमओ डॉ. नेपाल सिंह ने बताया कि पांचों मृत लोगों को अस्पतालों ने कोरोना पोर्टल में मृत घोषित कर दिया था, जबकि मृतक पांचों व्यक्ति जीवित हैं। जांच में तीन अस्पताल दोषी पाए गए हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, नारायणा और एमकेसीएच अस्पताल शामिल हैं। इन तीनों अस्पतालों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। सबसे ज्यादा तीन मरीज मेडिकल कॉलेज के हैं। मेडिकल कॉलेज की तरफ से दिए गए स्पष्टीकरण में कहा गया है कि जिस समय इन लोगों की रिपोर्ट पोर्टल में अपलोड की जा रही थी तब किसी ने जल्दबाजी के चलते डिस्चार्ज के बदले उसमें डेथ लिख दिया था।
सीएमओ के पास कोई जवाब नहीं
अब सवाल उठता है कि अगर गलती से पोर्टल पर मृत अपलोड हुआ तो फिर मुआवजे की एप्लीकेशन वैâसे पहुंची? इस बारे में जब सीएमओ डॉ. नेपाल सिंह से पूछा गया तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। साथ ही उनके द्वारा की गई जांच पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
मेडिकल कॉलेज पर लग चुके हैं आरोप
यह कोई पहली बार नहीं हुआ है जब जिंदा व्यक्ति को मृत और मृत व्यक्ति को मेडिकल कॉलेज ने जिंदा घोषित कर दिया हो। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मेडिकल कॉलेज पर कई बार ऐसे आरोप लग चुके हैं जब कोरोना से मृत व्यक्तियों के आंकड़ों को छुपाया गया था।

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