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आत्मदाह को मजबूर आदिवासी! …पीएम के झारखंड दौरे से पहले ४ एक्टिविस्ट अरेस्ट

• धार्मिक गणना में शामिल नहीं होने से हैं नाराज
सामना संवाददाता / रांची
देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक आ गए हैं। चुनाव में जीत हासिल करने के लिए सभी पार्टियां एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। इसी कड़ी में पीएम मोदी राज्यों का दौरा कर रहे हैं। इन दौरों के दौरान उनको जनता के विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। बता दें कि पीएम मोदी कल झारखंड भगवान बिरसा मुंडे की जयंती पर उनके गांव दौरे पर जाने वाले थे। उससे पहले आत्मदाह करने का एलान करने वाले चार आदिवासी एक्टिविस्ट को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बता दें कि भारत की जनगणना में आदिवासियों की स्वतंत्र रूप से धार्मिक गणना की मांग को लेकर आदिवासी आंदोलन कर रहे हैं। बार-बार पत्राचार करने के बावजूद उनकी मांग पूरी नहीं होने की वजह से आदिवासी आत्महत्या करने पर मजबूर हो गए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, आदिवासी सेंगेल अभियान के प्रमुख सालखन मुर्मू की अगुआई में इन कार्यकर्ताओं ने आत्मदाह की धमकी दी थी। इस संगठन ने बीते ८ नवंबर को रांची में इस मुद्दे को लेकर बड़ी रैली की थी, जिसमें भारत के सात राज्यों के आदिवासियों के शामिल होने का दावा किया गया था। आदिवासी सेंगेल अभियान के कार्यकर्ताओं ने कहा था कि इस दिन पीएम अगर भारत की जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग धर्मकोड का प्रावधान करने का एलान नहीं करते हैं तो वे उसी दिन वहां आत्मदाह कर लेंगे। आदिवासी सेंगेल अभियान की एक महिला कार्यकर्ता प्रेमशीला मुर्मू ने कल आत्मदाह की धमकी दी, पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए छापे मार रही है। गौरतलब है कि भारत में जनगणना के लिए जिस फॉर्म का इस्तेमाल होता है, उसमें धर्म के कॉलम में जनजातीय समुदाय के लिए अलग से विशेष पहचान बताने का ऑप्शन नहीं है। जनगणना में हिंदू, इस्लाम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन को छोड़कर बाकी धर्मों के अनुयायियों के आंकड़े अन्य के रूप में जारी किए जाते हैं। आदिवासियों का कहना है कि वे सरना धर्म को मानते हैं। उनके धर्म को पूरे देश में विशिष्ट और अलग पहचान मिले, इसके लिए जनगणना के फॉर्म में सरना धर्म कोड का कॉलम जरूरी है।

केंद्र सरकार को भेजा गया था प्रस्ताव
इस मांग से जुड़ा प्रस्ताव झारखंड विधानसभा ने वर्ष २०२० में सर्वसम्मति से पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था। करीब डेढ़ महीने पहले झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने भी इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। सोरेन ने पत्र में लिखा था कि यह देशभर के आदिवासियों की पहचान और उनके विकास से जुड़ा विषय है। उन्होंने आदिवासियों की चिर प्रतीक्षित मांग पर केंद्र सरकार की ओर से सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की थी।

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