मुख्यपृष्ठनए समाचारमोबाइल दिमाग को कर रहा तंग.... बच्चों की एकाग्रता हो रही भंग!

मोबाइल दिमाग को कर रहा तंग…. बच्चों की एकाग्रता हो रही भंग!

• २३.८० फीसदी बच्चे सोने से पहले करते हैं स्मार्ट फोन का इस्तेमाल
• उम्र के साथ बढ़ रही है लत
• ऑनलाइन गेम खेलना ही करते हैं पसंद
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई । मोबाइल बड़ों के साथ बच्चों के दिमाग को भी प्रभावित करने का काम कर रहा है। इसका असर इतना तगड़ा हो रहा है कि पढ़ाई में बच्चों की एकाग्रता भंग हो रही है। जानकारी के अनुसार करीब २३.८ प्रतिशत बच्चे सोने से पहले बिस्तर पर मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं, जबकि ३७.१५ प्रतिशत बच्चों ने मोबाइल के इस्तेमाल के कारण एकाग्रता के स्तर में कमी का अनुभव किया है। वहीं यह भी बताया गया है कि बच्चों में इंटरनेट की लत के बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं है। लेकिन राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा बच्चों की इंटरनेट पहुंच के साथ मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों का उपयोग करने की वजह से शारीरिक, व्यावहारिक और मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर किए गए एक अध्ययन के आंकड़ों का हवाला दिया गया है।
महामारी में उपयोग बढ़ा
कोरोना महामारी लगभग खत्म होने की कगार पर है लेकिन नई पीढ़ी को कोरोना ने जिस हद तक प्रभावित किया है, वह चिंता का विषय है। अब बच्चे मोबाइल एडिक्ट हो रहे हैं। पुरुष नौकरी जाने के कारण, महिलाएं और लड़कियां घरों में रहने के कारण तनाव में हैं। मुंंबई के अस्पतालों में मानसिक रोग विभाग में रोजाना कई बच्चे ऐसे आते हैं जो मोबाइल एडिक्ट हैं। अब बच्चे फिजिकली खेलने-कूदने के बजाय सिर्फ ऑनलाइन गेम खेलना ही पसंद करते हैं। अध्ययन में बताया गया है कि महामारी के दौरान बच्चों के बीच मोबाइल के उपयोग में वृद्धि हुई है।
बदल रही नई पीढ़ी
अब नई पीढ़ी बदल रही है। महिलाओं और लड़कियों में भी मानसिक बदलाव आया है। लंबे समय तक घर में रहने और बात-बात पर झगड़ा करने से बड़ी संख्या में महिलाएं और लड़कियां मानसिक बीमार हो गई हैं। दूसरी ओर नौकरी छूटने और काम नहीं मिलने के कारण पुरुष भी डिप्रेशन में आए हैं।
पब्जी गेम से बच्चों का ब्रेन हो रहा हाइपर एक्टिवेट
मनोचिकित्सक डॉ. प्राची चिवटे ने कहा कि बच्चों में मोबाइल के पब्जी गेम का तगड़ा प्रचलन है। बड़ी संख्या में बच्चों को इस गेम की लत लग गई है। इसके चलते उनके दिमाग में हाइपर एक्टिविटी अधिक हो गई है। इसके अलावा बच्चे अब सोशल मीडिया फेसबुक, व्हॉट्सऐप, इंस्टाग्राम आदि पर भी पहुंचने लगे हैं। इसमें उनका दिमाग इस चीजों पर डाइवर्ट हो रहा है। इसके चलते बच्चों में पढ़ाई के लिए एनर्जी नहीं बचती है। उनका दिमाग बाकी चीजों के लिए यूटीलाइज हो जाता है। ऐसे में इनसे पीछा छुड़ाने के लिए पैरेंट्स को बच्चों को खेलकूद सहित अन्य गतिविधियों में शामिल करने की जरूरत है।

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