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गरीबों को दो ५०० वर्ग फुट का घर! …बीडीडी की तर्ज पर बीआईटी चॉल का करो पुनर्विकास

• शिवसेना की मुख्यमंत्री सहित मनपा आयुक्त से मांग
सामना संवाददाता / मुंबई
म्हाडा के माध्यम से होनेवाले वर्ली, नायगांव और डिलाईल रोड के पास बीडीडी चॉल के पुनर्विकास योजना की तर्ज पर मुंबई के बीआईटी चॉल का भी पुनर्विकास होना चाहिए, ऐसी मांग शिवसेना ने की है। १६० वर्गफुट क्षेत्रफल के घरों में रहने वाले गरीब लोगों को ५०० वर्गफुट का बड़ा घर दो, इस संदर्भ में शिवसेना के पूर्व नगरसेवक मनोज जामसूतकर ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विरोधी पक्ष नेता और मनपा आयुक्त को पत्र लिखकर निवेदन किया है।
मुंबई के मझगांव, ताड़वाड़ी, लवलेन, मुंबई सेंट्रल, अग्रीपाड़ा और परेल जैसे क्षेत्रों में १०० वर्ष से अधिक पुराने बीआईटी चॉल हैं। इन जगहों पर पुलिस व अन्य मनपा के कर्मचारी किराए पर रहते हैं। ये इमारतें सौ साल से भी पुरानी होने के नाते खतरनाक हो गई हैं। यहां रहना खतरे से खाली नहीं, इसलिए इस चॉल के विकास के लिए बीडीडी चॉल की तर्ज पर विकास की योजना बनाई जानी चाहिए। मुख्यमंत्री सहित मनपा आयुक्त द्वारा इस पर विचार किया जाना चाहिए। इन्हें बीडीडी चॉल की तर्ज पर विकसित किया जाना चाहिए, ताकि यहां रहनेवाले गरीब परिवारों को ५०० वर्गफुट का घर मिले या फिर पुलिस की तरह १५ लाख रुपए में इनके लिए मालिकाना हक का घर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
ताड़वाड़ी की जर्जर इमारतों से लोगों को किया शिफ्ट
मझगांव ताड़वाड़ी के बीआईटी चॉल में १४ नंबर, १५ नंबर, १६ नंबर इमारत की जर्जर स्थिति को देखते हुए यहां से लगभग २०० से अधिक लोगों को माहुल गांव के ट्रांजिस्ट वैंâप में स्थानांतरित किया गया है, जहां उन्हें बहुत ही असुविधा का सामना करना पड़ता है। स्कूल-कॉलेज के साथ ही अस्पताल की सुविधा बिल्कुल नहीं है। इसके अलावा लोगों को यहां प्रदूषण की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है।

यहां इतने हैं बीआईटी चॉल?
माझगांव ताड़वाड़ी में १६
लवलेन में ३
चिंचबंदर में ७
मांडवी कोलीवाड़ा में ५
मुंबई सेंट्रल में १९
अग्रीपाड़ा में २४
परेल में ६

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