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दारोगा को गोली मारकर पिस्टल लूटने वाले दो बदमाश पुलिस मुठभेड़ में मारे गए

उमेश गुप्ता/वाराणसी

शहर में बीते दिनों दारोगा अजय यादव पर हमला करनेवाले बदमाशों की कुछ समय से पुलिस तलाश कर रही थी। इस मामले के आरोपित बदमाशों को पुलिस ने तड़के रिंग रोड पर मुठभेड़ के दौरान ललकारा तो आनन-फानन में दोनों ओर से गोलियां चलने लगीं जिसमें दोनों बदमाशों को गोली लगी तो उनको अस्‍पताल में भर्ती कराया गया जहां दोनों ने दम तोड़ दिया। डीजीपी ने टीम को दो लाख रुपये इनाम की भी घोषणा की है। वाराणसी कमिश्नरेट के थाना बड़ागांव क्षेत्र में सोमवार की सुबह मुठभेड़ हुई तो पूरा इलाका गोलियां चलने से थर्रा उठा। पुलिस के अनुसार शातिर बदमाशों के मूवमेंट को इंटरसेप्ट करने हेतु वाराणसी कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच और बड़ागांव पुलिस की टीम ने तड़के बदमाशों की घेराबंदी की थी। इस दौरान अपने को घिरता देख क्राइम ब्रांच और बड़ागांव पुलिस टीम पर बदमाशों ने कई राउंड फायर किया। इस दौरान क्राइम ब्रांच के आरक्षी शिव बाबू को गोली लगने के बाद पुलिस की जवाबी कार्यवाही में दो बदमाश गंभीर रूप से घायल, तीसरा बदमाश मौके से फरार होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार बदमाशों के पास से एक नाइन एमएम ब्राउउनिंग पिस्टल और एक 32 बोर का पिस्टल बरामद किया गया है। इस दौरान बदमाशों के पास से एक काले रंग की बाइक, मोबाइल फोन और कुछ कागजात बरामद किए गए। गोली लगने के बाद बदमाशों को समुचित इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया जहां उनकी हालत चिंताजनक बनी रही। पुलिस के अनुसार हाल ही में दारोगा की लूटी हुई पिस्टल से बरामद की गई नाइन एमएम ब्राउनिंग पिस्टल के मिलान की कार्यवाही के लिए हेड आर्मोरर को इसे भेज दिया गया है।
इस दौरान घायल पुलिसकर्मी शिवबाबू को इलाज के लिए सिंह मेडिकल में भर्ती कराया गया है जहां पर हालत खतरे से बाहर बताई गई है। बिहार पुलिस की सूचना के अनुसार मारे गए बदमाशों की शिनाख्त रजनीश उर्फ बऊआ सिंह व मनीष सिंह पिता शिव शंकर निवासी गोलवा थाना मोहद्दीनगर जिला समस्तीपुर के तौर पर की गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों ही सगे भाई हैं। जबकि तीसरा फरार आरोपित इनका भाई लल्लन सिंह है। पुलिस के अनुसार यह तीनों अत्यंत शातिर हत्यारे एवं लुटेरे हैं । इनकी डिटेल्ड क्रिमिनल हिस्ट्री बिहार पुलिस से मांगी गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार तीनों हाल ही में पटना में कचहरी की लाकअप से भागे थे और बिहार पुलिस को इनकी सरगर्मी से तलाश थी।दूसरी ओर पुलिस के इस मुठभेड़ ने अनेक सवाल खड़े कर दिए हैं।सबसे बड़ा सवाल है कि इस सनसनीखेज मुठभेड़ जिसमें दोनों तरफ से अनेक गोलियां चली का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है जबकि पुलिस ने सुबह साढ़े छः बजे मुठभेड़ का होना दिखाया है उस समय अच्छा खासा उजाला हो जाता है।मुठभेड़ रिंग रोड के किनारे दिखाई गई है।उस सिक्स लेन सड़क पर हर समय वाहनों की जबरदस्त आवाजाही लगी रहती है।फिर भी पब्लिक के किसी आदमी ने मुठभेड़ होता नहीं देखा।दोनो कथित बदमाशों के शरीर पर मात्र टी शर्ट है वहीं पुलिस वालों के शरीर पर जैकेट है।जबकि सुबह के समय अच्छी खासी ठंड हो जाती है ऐसे में बदमाश मात्र टी शर्ट में थे,अचरज होता है।
मुठभेड़ में नाइन एमएम की सरकारी पिस्टल की बरामदगी दिखाई गई है।इसके तत्काल बाद बदमाशों की शिनाख्त उस दरोगा अजय यादव से क्यों नहीं कराई गई जिसे बदमाशों ने गोली मारी थी।जबकि डिपार्टमेंट में हर कोई दरोगा की पिस्टल लूटकांड से वाकिफ है।सबसे पहले बिहार पुलिस से क्यों शिनाख्त क्यों और कैसे कराई गई।क्या बनारस पुलिस इस घटना के पहले से ही बिहार पुलिस के संपर्क में थी?

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