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उड़न छू : बाबाजी के ध्यानार्थ

अजय भट्टाचार्य
पिछले लगभग दस साल से बाबाजी और उनके भक्त लगातार बकवास कर इस गरीब देश का अपमान कर रहे हैं कि इस देश में बीते ७० साल में कुछ नहीं हुआ! बाबाजी एंड कंपनी यह बकवास इसलिए भी कर रही है, क्योंकि बाबाजी के जन्म से आठ महीने देश की आजादी के बाद इस देश में एक शक्तिशाली और अनोखा संविधान बनाया गया और यह अनोखा संविधान २६ जनवरी १९५० को लागू हुआ, बेशक तब उनका जन्म नहीं हुआ था। जब बाबाजी घुटनों के बल भी चलना नहीं सीखे थे, तब इस देश ने पहले एशियाई खेलों का बहुत ही शानदार आयोजन १९५१ में किया था। जब बाबाजी चार साल के हुए थे, तब १९५४ में इस देश में भाभा अणुशक्ति केंद्र नाम से एक केंद्र की स्थापना की गई। आईआईएम खोले गए, विश्वविद्यालय खोले गए और इन संस्थानों में कुछ उच्च श्रेणी के छात्रों ने दाखिला लिया। बकौल बाबाजी जिस १०-११ साल की उम्र में वे चाय बेचते थे, तब १९६१ में इस देश ने पुर्तगालियों को गोवा और दमन से खदेड़कर महाद्वीपीय हिस्सों को देश में मिला लिया था।
बाबाजी जब १३ साल के थे, तब इस देश में भाखड़ा नांगल नाम का भव्य बांध बनाया गया था, जिसकी योजना आजादी से पहले १९४४ में बनी थी और १९५५ में जिसमें सीमेंट कंक्रीट भरने का काम उन्होंने ही शुरू किया था, जिन्हें गरियाते हुए बाबाजी और उनके चेले-चपाटे अपनी देशभक्ति का महिमा मंडन करते हैं।
बाबाजी की चौदह साल की उम्र में इस देश में हवाई जहाज असेंबल करना और हेलीकॉप्टर बनाना शुरू कर दिया था। जब वे पंद्रह वर्ष के थे, तब इस देश की सेना ने लाहौर तक मार्च किया था और उनके अनशन सम्राट अन्ना हजारे तब भारतीय सेना में भ्रमण पर थे। जब बाबाजी १९ साल के होंगे, तब इस देश में १९६९ में तारापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र शुरू हुआ। इस देश में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अस्तित्व में आया। जब बाबाजी २१ साल के हुए तो घर से भाग गए और हिमालय में भीख मांगी और इस देश के वैध मतदाता बन गए, तब इस देश में इंदिरा गांधी नाम की एक बुलंद प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान नामक देश को दो हिस्सों में बांट दिया और एक नया देश बांग्लादेश के नाम से विश्व के मानचित्र पर उभरा। जब बाबाजी भिक्षाटन के तीन वर्ष पूरे कर रहे थे, तब इस इस देश ने १९७४ में अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था और जब बाबाजी के कथनानुसार वे ३५ वर्ष तक भिक्षावृत्ति कर जीवनयापन करते रहे, तभी उनकी उम्र के ३७वें साल यानी १९८७ के आसपास इस देश में राजीव गांधी नाम के प्रधानमंत्री ने सुपर कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी नाम की अभूतपूर्व क्रांति ला दी और इस देश ने प्रगति के क्षितिज पर ऊंचे कदम बढ़ा दिए, वही कंप्यूटर जिसके विरोध में बाबाजी के कुल पितामह बैलगाड़ी में लदकर संसद भवन पहुंचे थे। राजीव गांधी की हत्या के बाद जब देश भारी आर्थिक संकट में था, नरसिम्हा राव नाम के एक गंभीर और विद्वान सज्जन प्रधानमंत्री ने एक विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह, को वित्त मंत्री बनाकर इस देश में आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत की और देश को उस संकट से बाहर निकाला। यही मनमोहन सिंह दस साल तक इस देश के प्रधानमंत्री रहे। इसके बाद प्रधानमंत्री बने स्वघोषित फकीर ने देश में पिछले ७० साल में विकसित वैज्ञानिकी और अभियांत्रिकी के बूते चंद्रयान, मंगलयान, जीएसएलवी, मेट्रो, मोनो रेल, अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, जहाज, पनडुब्बियां, पृथ्वी, अग्नि, पिनाक, तेजस, चेतक नामक मिसाइलें लॉन्च कीं। धनुष, हेलीकॉप्टर, सुखोई, मिग लड़ाकू विमानों का उत्पादन आदि उन्हीं संस्थानों के माध्यम से संभव हुआ, जो बीते ७० साल में इस देश की मेधा और नेतृत्व ने स्थापित किए थे। दुर्भाग्य यह है कि बौद्धिक चक्षु से हीन डंकापति देश में इस छोटी, अल्प प्रगति को नहीं जानते? और अगर जानते होते तो बार-बार इस देश का अपमान नहीं करते! सरकारी उपक्रमों, बैंकों, हवाई अड्डों, एयर इंडिया, रेल, भेल (भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड) की जो सेल लगा रखी है, वह इस देश ने इन्हीं ७० सालों में अपने पुरुषार्थ से अर्जित किया था, जुमलों से नहीं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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