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उद्धव ठाकरे का सरकार पर हमला… पंचनामे का ढकोसला रोको, किसानों का कर्ज माफ करो!

सामना संवाददाता / नागपुर

किसानों के फसल बीमा के लिए आठ हजार करोड़ रुपए का प्रावधान करने के बावजूद उनके हाथ कुछ नहीं लगा है। फिर जनता का यह पैसा किसकी जेब में गया? घातियों के मित्रों की जेबों में तो नहीं गया न, इसका जवाब दो। इसके अलावा पंचनामे का ढकोसला रोको और किसानों का कर्ज माफ करो। इन शब्दों में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कल घाती सरकार पर जोरदार हमला बोला।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत!
इस दौरान उद्धव ठाकरे ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद ३७० हटाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इसे शिवसेना का भी समर्थन था। उद्धव ठाकरे ने अपेक्षा व्यक्त करते हुए कहा कि जिस तरह सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि साल २०२४ के सितंबर महीने तक जम्मू-कश्मीर में आम चुनाव कराएं, उसी तरह खुले महौल में चुनाव भी होगा। इसके साथ ही जिस तरह देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गारंटी दे रहे हैं, वैसे ही यह भी गारंटी दें कि कश्मीरी पंडित फिर से कश्मीर में लौटेंगे और विधानसभा चुनाव में मतदान करेंगे। कश्मीर का चुनाव कराना ही है, कराना ही पड़ेगा। फिर पाक अधिकृत कश्मीर भी लो यानी पूरे कश्मीर का चुनाव एक साथ ही कराना पड़ेगा, ऐसी अपेक्षा भी उन्होंने व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि किसानों पर बीते एक-डेढ़ साल में एक के बाद एक संकट आ रहे हैं। हाल ही में ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश हुई। खेती को बहुत नुकसान हुआ। इस पर उद्धव ठाकरे ने पूछा कि उन्हें इस सरकार ने क्या सहायता दी? एक रुपए में फसल बीमा लेने वाले किसानों की संख्या पौने दो करोड़ के आस-पास है। सरकार ने वादा किया था कि दिवाली तक बीमा की अग्रिम राशि किसानों को देंगे, लेकिन किसानों तक कितना पहुंचा, इसका कोई भी अनुमान नहीं है।
किसानों को जवाब न देनेवाली फसल बीमा कंपनियों की भी उद्धव ठाकरे ने खबर ली। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बीमा कंपनियों ने किसानों के लिए दरवाजे-खिड़कियां बंद कर दी हैंै और मुख्यमंत्री किसानों के मुद्दों पर उदासीन हैं। इस बीच उन्होंने हिंगोली के किसानों से ‘मातोश्री’ पर हुई मुलाकात का भी अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि किसानों की अवस्था कंगालों जैसी हो गई है। उनके सिर पर कर्ज का पहाड़ खड़ा हो गया है और कर्ज वसूली के लिए बैंक पीछे लगे हुए हैं। उनका कोई संरक्षक नहीं है। सरकार और बीमा कंपनियां किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं कर रही हैं। इस कारण कर्ज वापस लेने के लिए किसान अंग बेचने आए थे। मुझे याद नहीं आ रहा है कि ऐसी भयानक परिस्थिति इससे पहले कभी आई थी।
समुद्र में ट्रैक्टर चलानेवाला मुख्यमंत्री पहली बार देखा
मुख्यमंत्री ने तंज कसा था कि उद्धव ठाकरे तीसरे दिन अधिवेशन में पहुंचे। इसे लेकर जब मीडिया ने पूछा, तब इस पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि किसानों की समस्याओं पर उदासीन रुख अपनाने वाले मुख्यमंत्री मुझ पर आरोप लगाने से पहले यह बताएं कि वे किसानों के लिए क्या कर रहे हैं? उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि लोगों की गृहस्थी पर हल और समुद्र में ट्रैक्टर चलानेवाले मुख्यमंत्री पहली बार देख रहा हूं।
हिम्मत हो तो पहले सहयोगियों को स्वच्छ करो
घाती सरकार के स्वच्छ मिशन का मुद्दा मीडिया के समक्ष उठाते ही उद्धव ठाकरे ने चुनौती देते हुए कहा कि सरकार में हिम्मत है तो पहले अपने दागी सहयोगियों को स्वच्छ करो। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन पर कई गंभीर आरोप हैं, ऐसे दागी सरकार में हैं। पहले उनको स्वच्छ करो, समुद्री किनारा साफ करने में मुंबई मनपा सक्षम है। उन्होंने फटकार लगाते हुए कहा कि शिवसेना पिछले २५ सालों से सक्षमता के साथ मुंबई मनपा संभाल रही है, आगे भी देखेगी।
सरकारी गुंडों पर कार्रवाई होगी अथवा नहीं?
सत्ताधारी विधायकों और पदाधिकारियों की गुंडई पर भी उद्धव ठाकरे ने घाती सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि सरकार के विधायक, पदाधिकारी व समर्थकों की ओर से गुंडई शुरू है। कोल्हापुर में कल-परसों घर में घुसकर गुंडों ने मारपीट की। उन्होंने सवाल किया कि उन पर कार्रवाई होगी अथवा नहीं?
…फिर प्रफुल्ल पटेल का क्या?
इस दौरान नवाब मलिक को लेकर उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा उप मुख्यमंत्री अजीत पवार को भेजे गए पत्र पर भी उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस समय पत्रों का जमाना है, राजमान्य राजश्री पत्र लिखने का कारण क्या… अंबादास दानवे के लिखे उस पत्र का जवाब कब मिलेगा? उसका इंतजार कर रहा हूं। अजीत पवार को भेजे पत्र में देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि नवाब मलिक को दूर रखो, फिर वही नियम प्रफुल्ल पटेल पर लागू होगा क्या? मलिक को लेकर जिस तरह का रुख स्पष्ट किया था, वैसा ही रुख प्रफुल्ल पटेल के बारे में अपनाओ। इस तरह का पत्र दानवे ने फडणवीस को लिखा था। एक के लिए अलग और दूसरे के लिए अलग नियम, ये लोगों को पसंद आएगा क्या? उद्धव ठाकरे ने कहा कि कुछ लोग मिर्ची का व्यापार करते हैं, तो कुछ मिर्ची से व्यापार करते हैं, इस डायलॉग का हवाला देते हुए उन्होंने चुभने वाला सवाल करते हुए कहा कि भाजपा की भावना देश प्रेम के प्रति इतनी गहरी हो गई है तो दानवे के पत्र का जवाब कब मिलेगा? उद्धव ठाकरे ने इस दौरान चुनाव आयोग को लिखे पत्र का भी उल्लेख किया। भगवान व धर्म के नाम पर वोट मांगने की अनुमति होगी तो हम भी वह शुरू करते हैं। इस तरह का पत्र हमने चुनाव आयोग को भेजा है, लेकिन अभी तक उसका जवाब नहीं मिला है।
आरक्षण पर दृढ़ रुख
मराठा आरक्षण पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि जिन्हें वास्तव में आरक्षण चाहिए, उन सभी समाज के लोगों को आरक्षण मिलना चाहिए। लेकिन जिन्हें पहले से ही आरक्षण का लाभ मिला है, उनके आरक्षण में कोई व्यवधान डाले बिना नए वर्ग को आरक्षण दिया जाए, इस तरह का दृढ़ रुख शिवसेना का पहले से रहा है।
…तो तुम्हारे परिवार की भी एसआईटी जांच लगानी पड़ेगी
इस दौरान मीडिया ने दिशा सालियन मामले की एसआईटी से जांच कराए जाने को लेकर भी सवाल किया। उस पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि जिनसे भय लगता है, उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं। सत्ताधारियों के कई अनुचित मामले हैं। उद्धव ठाकरे ने चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ताधारी इस झंझट में पड़े बिना अपना काम करें अन्यथा मुद्दा उठाते ही हैं तो उनके परिवार की भी एसआईटी जांच करनी पड़ेगी।

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