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दूसरा नांदेड़ बनने की राह पर उल्हासनगर … मध्यवर्ती अस्पताल में भी हो सकता है मौत का तांडव!

डॉक्टरों, दवाइयों और टेक्नीशियनों का है अभाव
अनिल मिश्रा / उल्हासनगर
हाल ही में महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में दवाइयों के अभाव में २४ मरीजों की मौत हो गई थी, जिसमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं। इसके बावजूद घाती सरकार कुछ सबक नहीं सीख रही है। नांदेड़ की तरह ही उल्हासनगर के मध्यवर्ती अस्पताल से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं। यहां डॉक्टरों, दवाइयों और टेक्नीशियनों का अभाव है। आशंका जताई जा रही है कि नांदेड़ वाली घटना यहां भी घट सकती है।
संसाधनों की भारी कमी
उल्हासनगर का मध्यवर्ती अस्पताल २०१ बिस्तरों वाला अस्पताल है। अस्पताल को चलाने के लिए १६ विशेषज्ञों के पद खाली हैं, लेकिन उसकी जगह पर केवल ५ विशेषज्ञ ही हैं। तीन की जगह एक कार्डियोलॉजिस्ट काम कर रहा है। तृतीय श्रेणी, चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों की हालत भी खराब ही है। अतिदक्षता विभाग नाम के लिए है। डायलिसिस विभाग, प्रसूति, सर्जिकल जैसे तमाम विभाग डॉक्टरों की कमी के कारण रामभरोसे चल रहे हैं। अस्पताल में क्षमाता से अधिक मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। ओपीडी में भी हर महीने में हजार के करीब मरीज आते हैं। १९८३ में बना यह इमारत अब जर्जर हो गई है। कई विभागों में लीकेज की समस्या है। जांच की मशीन हैं इसके बावजूद डॉक्टर व परीक्षण करनेवालों की कमी के कारण काफी मरीजों को निजी अस्पताल में जाना पड़ता है। अस्पताल में आवश्यक सुविधा की सूची सांसदों, विधायकों को देते-देते अस्पताल प्रशासन परेशान हो गया है। अस्पताल सूत्रों की मानें तो जब से (१५ अगस्त २०२३) से सरकार ने केस पेपर, अल्प दर पर उपचार की जो राशि ली जाती थी उसे बंद कर दिया है, तब से प्रशासन के सामने यह समस्या पैदा हो गई है कि एंबुलेंस और जनरेटर में लगने वाला डीजल, एमरजेंसी में दवा की व्यवस्था वैâसे होगी? कई महीनोें से मुर्दाघर बंद होने के कारण शवों को रखने के लिए कल्याण, ठाणे के अलावा मुंबई के अस्पतालों में ले जाकर रखना पड़ता है। अस्पताल परिसर के चारों तरफ से खुला होने के कारण खाली जगह में असमाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। अस्पताल परिसर में सफाई कर्मचारियों की कमी होने के कारण गंदगी पैâली रहती है। वार्ड ब्वाय की कमी से मरीजों की देखभाल में दिक्कत आती है। साथ ही आए दिन अस्पताल में मारपीट की स्थिति बनी रहती हैं।
मुहैया संसाधन में बेहतरीन करने की कोशिश
मध्यवर्ती अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर मनोहर बनसोड़े का कहना है कि सरकार ने जितने संसाधन दिए हैंै उसमें बेहतर करने के प्रयास शुरू हैं। अस्पताल में जिन चीजों की कमी है उसकी मांग वरिष्ठों से की गई है। बिजली न जाए, इसके लिए डबल फीडर लाइन ली गई है। शवों को रखने की भी व्यवस्था की जा रही है। मरीजों के बेहतरीन उपचार के लिए उल्हासनगर के म्हारल गांव के समीप के रिजेंसी एंटेलिया में मनपा द्वारा बनाए अस्पताल की मांग की गई थी, जो मनपा ने नहीं दिया। बनसोड़े कहते हैं कि उनका काम मरीजों को उत्तम सेवा देना है और वे कर रहे हैं।

 

 

 

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