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उल्हासनगर की स्वास्थ्य व्यवस्था ‘कोमा’ में! … २८ सालों बाद भी नहीं शुरू हुआ मनपा का अस्पताल

 करोड़ों रुपए का सामान हुआ बर्बाद
 नेताओं ने दर्जनों बार किया दौरा
 लोकसभा चुनाव से पहले हो सकता है उद्घाटन?

अनिल मिश्रा / उल्हासनगर
उल्हासनगर शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था कोमा में चली गई है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि पिछले २८ सालों से उल्हासनगर महानगरपालिका का सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू नहीं हो पाया है। इस अस्पताल को शुरू करने की प्रकिया कई बार की गई, जिसमें करोड़ोें रुपए खर्च किए गए इसके बावजूद यह अस्पताल चालू नहीं हो सका है। यहां के नेताओं ने कई बार इस अस्पताल का दौरा भी किया और इसे शुरू करने का आश्वासन दिया, लेकिन यह केवल कोरे वादे ही साबित हुए। अब एक बार फिर से यह कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले इस अस्पताल का उद्घाटन हो सकता है? उल्हासनगर के आस-पास स्थित ग्रामीण इलाके जैसे म्हारल, कांंबा, वरप सहित अन्य इलाकों में रहनेवाले लोगों को इस अस्पताल के चालू होने का इंतजार आज भी है।
किया जा रहा राजनीतिक हस्तक्षेप
उल्हासनगर के मनपा घोषित होने के एक वर्ष बाद चुनाव कराए गए। पहले बजट में अस्पताल के लिए भी धनराशि का प्रावधान किया गया। कभी गोल मैदान, कभी शांति नगर शमशान भूमि तो कभी उल्हासनगर-३ ओटी सेक्शन में जगह प्रस्तावित किया गया। आखिर में रिजेंसी एंटेलिया परिसर में बिल्डर ने तीन मंजिल इमारत बना कर दी। मनपा की तरफ से करोड़ोें रुपए खर्च कर इमारत में अग्निशमन यंत्रणा से लेकर ऑक्सीजन प्रणाली तक लगाई गई। २०० बेड का अस्पताल बनाया गया। कई बार सरकार के लोगों के अलावा प्रशासनिक लोगों ने भी अस्पताल का दौरा किया। यहां तक कि डॉक्टर, नर्स, सफाईकर्मी सहित अन्य कर्मचारियों की भी भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन बाद में आयुक्त द्वारा रद्द कर दी गई।इस अस्पताल को चलाने में मनपा की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उल्हासनगर मध्यवर्ती अस्पताल की तरफ से इस अस्पताल को चलाने की इच्छा व्यक्त की गई। लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण मनपा आयुक्त अजीज शेख ने अस्पताल को चलाने की अनुमति नहीं दी।
पशु वैद्यकीय अस्पताल वर्षों से पड़ा है बंद
भायंदर। मीरा-भायंदर शहर के राई में एक पुराना पशु चिकित्सा अस्पताल है, जो लगभग चार दशक पहले बना था। शुरू से ही यह अस्पताल ठाणे जिला परिषद के द्वारा संचालित किया जा रहा है। अस्पताल बनने के कुछ वर्षों बाद यहां ताला लग गया। इस बारे में जिला परिषद (ठाणे) के मुख्य पशु वैद्यकीय अधिकारी समीर तोडनकर ने बताया कि हमारे पास स्टाफ की कमी है, जिसके कारण अस्पताल नियमित रूप से नहीं खुल रहा है। मैं वैकल्पिक व्यवस्था करके हप्ते में दो दिन पशु चिकित्सक को भेजने की कोशिश करूंगा। इस अस्पताल को बंद रहने के कारण उत्तन, राई, मोरवा, मूर्धा, डोंगरी सहित पूरे मीरा-भायंदर के मवेशियों के मालिकों को पशु की इलाज के लिए वसई-विरार के पशु अस्पताल में जाना पड़ता है।

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