मुख्यपृष्ठस्तंभमध्यांतर :  नशामुक्ति या द्वेषमुक्ति?... उमा दीदी और शिवराज `मामा’ के बदले...

मध्यांतर :  नशामुक्ति या द्वेषमुक्ति?… उमा दीदी और शिवराज `मामा’ के बदले सुर

प्रमोद भार्गव।  मध्य प्रदेश सरकार के लिए तेज-तर्रार नेत्री उमा भारती पिछले करीब एक साल से शराब बंदी को लेकर संकट बनी हुई थीं। परंतु लगता है, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के वाक्चातुर्य और रणनीति के आगे अंतत: वे पस्त हो गर्इं। इसलिए २ अक्टूबर गांधी जयंती के अवसर पर शिवराज सिंह ने लाल परेड मैदान भोपाल में नशामुक्ति के एक बड़े आंदोलन की राज्यव्यापी शुरुआत की तो इस मंच पर दीदी उमा भारती शिवराज की प्रेरणास्रोत बनकर प्रकट हुर्इं। यह उलटबांसी वैâसे संभव हुई, इसके स्रोत ढूंढ़ना फिलहाल मुश्किल हो रहा है। लेकिन हम सब जानते हैं कि राजनीति में पर्दे के पीछे खेले जानेवाले खेल, कुछ इस अंदाज में खेले जाते हैं कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे। कुछ ऐसा ही नजारा और संबोधन इस मंच पर देखने में आया। शिवराज और उमा भारती ने एक-दूसरे के पक्ष में ऐसे बखान किए कि जैसे इनके बीच कभी टकराव रहा ही न हो।
शराब बंदी को लेकर चले टकराव की बात करने से पहले इन भाई-बहन के उद््बोधन को जान लेते हैं। शिवराज ने कहा, `सरकार का काम सड़क, पुल-पुलिया बनाना ही नहीं होता, बल्कि इंसान की जिंदगी बचाना भी होता है। इस मायने में दीदी (उमा भारती) आप हमारी प्रेरणा हैं। आपने समाज की भलाई के लिए शराब बंदी का संकल्प लेकर जो अभियान शुरू किया था, एक भाई के रूप में मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि हम सरकार की ओर से समाज को नशामुक्त बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। नशे की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए ऐसी आबकारी नीति बनाई जाएगी, जिससे शराब बिक्री को प्रोत्साहन ही न मिले और न ही पीनेवालों को कोई परेशानी हो।’ इस अंतिम वाक्य से स्पष्ट है कि भविष्य की शराब नीति विक्रेता और क्रेता दोनों के लिए ही सुविधाजनक रहनेवाली है।
दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा, `मुझे पूरा भरोसा है कि मध्य प्रदेश नशामुक्ति में भी एक आदर्श राज्य बनेगा। शिवराज सिंह ने नशामुक्ति को यदि जन आंदोलन में बदल दिया तो निश्चित रूप से हम लोगों को नशे से मुक्ति मिल जाएगी। इसके लिए समाज और सरकार को एक साथ मिलकर तैयारी करनी होगी। सरकार की तरफ से तो शराब की नियंत्रित वितरण प्रणाली बने ही माता-पिता भी बच्चों को नशाबंदी के लिए समझाएं। विद्यालयों में शिक्षक भी अच्छी और बुरी जिंदगी का फर्क बताएं। मेरी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। मुझे अब अनुभव हो रहा है कि शराब की दुकान पर पत्थर मारकर मैंने अपराध किया था। बावजूद शिवराज जी ने मेरी बातों को सम्मान दिया। वे मुख्यमंत्री के साथ ही समाज सुधारक, संत और तपस्वी हैं। देश में मध्य प्रदेश ऐसा पहला राज्य है, जिसने बेटियों से दुराचार करनेवालों के घर गिरवा दिए। मसलन राजनीति में यदि दो विरोधियों में वैचारिक एकरूपता आ जाए तो अनुकूल स्वभाव बनते देर नहीं लगती। अन्यथा इस कार्यक्रम से पहले यही उमा भारती शराब बंदी को लेकर ऐसा धमाल मचाए हुए थीं, जो अपराध की श्रेणी में आता है। इसे उन्होंने मंच से स्वीकार भी लिया। यह उनका बड़प्पन है।
हालांकि शिवराज सिंह चौहान पंचायत चुनाव के समय से ही नशामुक्ति को लेकर वातावरण बनाने में लगे हैं। इस नाते उन्होंने चुनिंदा पंचायत प्रतिनिधियों को अपने आवास पर भोपाल बुलाकर उन्हें समरस पंचायत के गठन की जिम्मेदारी सौंपी थी। इन पंचायतों को नशामुक्त बनाने का संकल्प दिलाने के साथ पौधा रोपण, बिजली बचाने और स्वच्छता को लेकर ग्रामीणों को जागरूक बनाने का उपदेश दिया था। लेकिन वैध-अवैध शराब ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में इस सीमा तक बेची जा रही है। अब ग्रामों में झगड़े शराब सेवन के चलते निरंतर बढ़ रहे हैं। सामाजिक माहौल दूषित और कुत्सित हो रहा है। अतएव आदर्श ग्राम पंचायतों का निर्माण उसी तरह मुश्किल है, जैसे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में सांसदों से अपने संसदीय क्षेत्र में तीन आदर्श ग्राम बनाने की कल्पना की थी। पूरे देश में कहीं से भी ऐसे उदाहरण देखने-सुनने में नहीं आए कि किसी सांसद ने तीन तो क्या एक गांव भी आदर्श बनाने की चुनौती स्वीकारी हो। इसके उलट केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के संसदीय क्षेत्र की ग्राम पंचायत सिरसौद (शिवपुरी) में शराब की वैध दुकान और खुल गई। मसलन शराब पियो और मस्त रहो।
दरअसल, ऐसा कोई गांव नहीं है, जहां शराब नहीं बेची जा रही हो। इस साल से देसी एवं विदेशी शराब की दुकानों पर दोनों ही तरह की शराब बेचे जाने की छूट देने से दोनों तरह की दुकानों की संख्या बेतहाशा बढ़ी है। इसी अनुपात में शराब की बिक्री भी बढ़ी है। इस वित्तीय साल के पहले तक भगवान राम की नगरी ओरछा में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध था, लेकिन अब भगवान राम मंदिर के मुख्य मार्ग पर शराब की दुकान खुल गई है। कुछ माह पहले यही फायर ब्रांड नेता उमा भारती रामराजा सरकार के दर्शन करने पहुंची थीं, तो उन्हें मुख्य मार्ग पर शराब की दुकान खुली दिखाई दी, जबकि उमा भारती इस दुकान को बंद करने की सूचना एक माह पहले दे चुकी थीं। उन्होंने जब दुकान खुली देखी तो प्रतीकात्मक विरोध करते हुए गाय का गोबर दुकान में फेंका। बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उमा भारती ने बेहद विशाद और तल्खी से भरे लहजे में कहा, `मेरे ध्यान में यह जानकारी लाई गई थी कि ठीक रामराजा सरकार के मंदिर मार्ग पर शराब की दुकान खोल दी गई है। यानी रामराजा सरकार के दर्शन करने जाएं तो पहले शराब का आचमन करें और फिर लौटने के वक्त शराब का पान करें। यही नहीं आश्चर्य मुझे इस बात पर भी है कि यह दुकान ग्राम नवदा के नाम पर स्वीकृत है, लेकिन शासन-प्रशासन की मनमानी के चलते ओरछा में मुख्य मंदिर के मार्ग पर खोल दी गई है।’ उमा भारती की बातचीत और चेहरे की उदासीन मुद्रा से साफ लग रहा था कि वे शराब बंदी के विरोध में चलाई गई लड़ाई में हार की ओर बढ़ रही हैं। उनके प्रतिरोध का असर दिखाई नहीं दे रहा है। अब नशा मुक्ति आंदोलन में भागीदारी कर उन्होंने जता दिया है कि सरकार के सहयोग के बिना शराब बंदी संभव नहीं है।
उमा भारती ने अपने प्रतिरोध की शुरुआत भोपाल की एक शराब दुकान पर पत्थर मारकर की थी। तब यह विश्वास जगा था कि उमा ने तो अपनी कथनी को करनी में बदल दिया है। लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कमलनाथ ने भी उमा की शराब बंदी मुहिम का समर्थन करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया था, जिससे उमा शराब की बोतलों पर पत्थर मारती रहें और प्रदेश के कानूनी राज की भाजपा के प्रमुख नेता ही बखिया उधेड़ते दिखते रहें। इस समर्थन के पीछे की मंशा यह भी रही होगी कि प्रदेश में अराजकता का माहौल पनपे और २०२३ में कांग्रेस को बैठे-बिठाए सत्तारूढ़ होने का अवसर मिल जाए। लेकिन शिवराज की कौशल दक्षता ने उमा भारती को अपने फेवर में लेकर विपक्षी कांग्रेस को चारों खाने चित्त कर दिया।
यदि मध्य प्रदेश में शराब से राजस्व जुटाने की बात करें तो पिछले साल १० हजार ३०० करोड़ रुपए की आमदनी शराब कारोबार से हुई थी। चालू वित्त वर्ष में १२ हजार ८३४ करोड़ रुपए की आय का लक्ष्य रखा गया है। ६०५ दुकानों से वैध शराब बेची जा रही है। बावजूद अमानक शराब बेचने का कारोबार भी पूरे प्रदेश में धड़ल्ले से चल रहा है। हालांकि सरकार ने राज्यव्यापी अवैध शराब की बिक्री पर कठोर कार्रवाई करने का अभियान छेड़ा हुआ है। अब तक २ लाख १० हजार से अधिक मामले पंजीबद्ध कर २ लाख ६० हजार लोगों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और २५ लाख लीटर से भी ज्यादा अवैध शराब व ४ हजार वाहन जब्त किए जा चुके हैं। इससे पता चलता है कि अवैध शराब पूरे प्रदेश में पी जा रही है। फिर भी यदि सरकार नशा मुक्ति के लिए प्रदेश व्यापी कोई अभियान चलाने को तत्पर हुई है तो इसका श्रेय उमा भारती के दबाव और उनसे हुए अंदरूनी समझौते को जाता है।
(लेखक, वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार हैं।)
(उपरोक्त आलेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। अखबार इससे सहमत हो यह जरूरी नहीं है।)

अन्य समाचार