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काशी में उमराव जान की मनाई गई 86वीं पुण्यतिथि, डर्बीशायर क्लब द्वारा दी गई श्रद्धांजलि

उमेश गुप्ता / वाराणसी

अवध की शान कही जाने वाली उमराव जान की 86वीं पुण्यतिथि मंगलवार को वाराणसी के सिगरा स्थित फातमान के पास स्थित उनके मकबरे पर मनाई गई। उमराव जान की इस कब्र को साल 2005 में डर्बीशायर क्लब के अध्यक्ष शकील अहमद ने खोज निकाला था। उत्तर प्रदेश सरकार ने यहां भव्य मकबरा बनवाया है। ऐसे में उनकी 86वीं पुण्यतिथि पर डर्बीशायर क्लब के अध्यक्ष और सदस्यों ने गुलपोशी कर फातिहा पढ़ा और मोमबत्तियां जलाई गईं।
इस संबंध में शकील अहमद ने बताया कि उमराव जान का जन्म फैजाबाद में हुआ था। बाद में वो लखनऊ चली गईं और नवाबों की महफिलों की शान बन गईं। इसी बीच अंग्रेजों के साथ लड़ रहे भारत की इस बेटी ने भी अपने स्तर पर इस लड़ाई में जान डाली। शकील ने कहा कि बहुत कम ही लोग जानते हैं कि उमराव ने आजादी की लड़ाई भी लड़ी और लोगों को आजादी के लिए जागरूक किया।
शकील ने कहा कि उमराव जान के किरदार को लोग काल्पनिक ही मानते यदि मुजफ्फर अली ने फिल्म उमराव जान न बनाई होती और रेखा ने उमराव के रोल में जान न फूंकी होतीं और खय्याम साहब के संगीत ने उसे जिंदा करके लोगों के जेहन में न छोड़ा होता तो। शकील कहते हैं कि रेखा ने उमराव को फिर जिंदा किया, पर उमराव अपने आखरी दिनों में गुमनामी में चली गईं और वाराणसी आकर दालमंडी में रहीं और उनके निधन के बाद उनके करीबियों ने उन्हें यहां दफन कर दिया।

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