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अटूट बंधन : `रक्षाबंधन’ की अनोखी मिसाल … बहन ने भाई को किया लीवर दान!

धीरेंद्र उपाध्याय
मुंबई

रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती है। बदले में भाई उसे उपहार देता है। इस रक्षाबंधन पर हम आपको एक ऐसी बहन से मिलवा रहे हैं, जिसने अपने छोटे भाई की लंबी उम्र के लिए न केवल कामना की, बल्कि अपने लीवर का कुछ हिस्सा अपने भाई को देकर उसे लंबी उम्र का तोहफा भी दे दिया। दरअसल, नई मुंबई में सुरक्षा गार्ड संतोष पाटील का परिवार रहता है। इस दंपति के दो बच्चे २१ साल की बेटी और १७ साल का बेटा है। बेटी नंदिनी कॉलेज जाती है, जबकि बेटा राहुल १०वीं में पढ़ता है। दुभार्ग्य से चीजें तब खराब हो गर्इं, जब राहुल को कमजोरी महसूस होने लगी। इसी बीच अचानक उसे खून की उल्टियां होने लगीं। उसकी गंभीर हालत को देखकर पाटील परिवार चिंतित हो गया। उन्होंने राहुल को स्थानीय डॉक्टरों को दिखाया लेकिन उसकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। बेटे की बिगड़ती हालत को देखकर पाटील दंपति ने उसे नई मुंबई के मेडिकवर अस्पताल में भर्ती करा दिया। चिकित्सकीय जांच में राहुल को ऑटोइम्यून लीवर सिरोसिस होने का पता चला। ऐसी स्थिति में लीवर प्रत्यारोपण करना बेहद जरूरी था। भाई राहुल की बुरी हालत देखकर बहन नंदिनी परेशान हो गई। इस बीच बहन नंदनी ने अपने इकलौते भाई राहुल पाटील को रक्षाबंधन के अवसर पर दुनिया का सबसे बड़ा उपहार देकर भाई-बहन के अटूट प्रेम की मिसाल पेश की।
हाल ही में राहुल का लीवर ट्रांसप्लांट हुआ। आज दोनों भाई-बहन स्वस्थ हैं। मेडिकवर अस्पताल के लीवर ट्रांसप्लांटेशन और एचपीबी सर्जरी के निदेशक डॉ. विक्रम राउत ने कहा कि ऑटोइम्यून लीवर डिजीज ज्यादातर बच्चों को प्रभावित करती है। यह बीमारी अक्सर दो साल की उम्र में ही देखी जाती है। ऑटोइम्यून लीवर रोग में रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली उसके लीवर कोशिकाओं के खिलाफ कार्य करना शुरू कर देती है। बीमारी का यदि जल्दी पता चल जाए तो इसका इलाज दवाओं से किया जा सकता है। लेकिन राहुल के मामले में इसका पता देरी से चला। साथ ही उसमें पीलिया जैसी जटिलताएं थीं। इसलिए उसे लीवर ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी गई। उसकी २१ वर्षीय बहन नंदिनी पाटील ने आगे बढ़कर अपना लीवर दान करने की इच्छा व्यक्त की। डॉ. राउत ने कहा कि रोगी की बहन ने अपने बीमार भाई की जान बचाने के लिए निडर होकर अपना लीवर दान कर दिया। हमने लीवर के आकार और लीवर की गुणवत्ता की जांच की जो राहुल से बिल्कुल मेल खाती थी। उसका समय पर इलाज न करने पर जान भी जा सकती थी। यह प्रत्यारोपण करना काफी चुनौतीपूर्ण था। लेकिन मेडिकवर अस्पताल के डॉक्टरों ने यह सफल सर्जरी की। भाई-बहन की ये प्रेरणादायी कहानी नि:संदेह रक्षाबंधन के दौरान खुशी और उत्साह लाएगी। मरीज की बहन नंदिनी पाटील ने कहा कि मेरा भाई मेरे लिए बहुत मायने रखता है। मुझे बहुत खुशी है कि मैंने उसे रक्षाबंधन के मौके पर एक बहुमूल्य उपहार दिया। भाई की सेहत को लेकर हम काफी चिंता में थे। मेरे भाई की जान बचाने के लिए मैं डॉक्टरों की आभारी हूं। मरीज राहुल पाटील ने कहा कि मेरी बहन ने मुझे एक नई जिंदगी देकर राखी का सबसे अनोखा उपहार दिया है। बहन की रक्षा करना भाई की जिम्मेदारी होती है। लेकिन मेरी बहन ने मेरी जान बचाई है। मैं वादा करता हूं कि मैं हमेशा हर सुख-दुख में उसका साथ देता रहूंगा।’

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