मामा मैं आ गया

मिल ही गई राखी,
मेरे मामा को आज
भेजी है जो मां ने प्रेम से,
विक्रम के साथ।
देखो विक्रम,
उतरना हल्के पांव, मामा के आंगन।
और फिर सौंप देना यह रक्षा-सूत्र मामा के हाथ।
पांव छू कर फिर मामा से जोर से कहना-
मामा मैं आ गया।
मामा फिर लगाकर गले तुझको
सच में यही कहेगा,
पूरी दुनिया से मिला हूं मैं
पर तुझसे मिल कर
मजा आ गया
कितने दिनों से इंतजार था
कि एक दिन तुम जरूर आओगे
और आज वह इंतजार की घड़ी समाप्त हुई।

आर. डी. अग्रवाल “प्रेमी”
मुंबई

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