मुख्यपृष्ठटॉप समाचारचाचा-भतीजे की अलग हुई राहें ... `सुप्रीमो' ही `सेनापति'!

चाचा-भतीजे की अलग हुई राहें … `सुप्रीमो’ ही `सेनापति’!

•  विधायकों ने अखिलेश को चुना नेता प्रतिपक्ष
• बैठक में न बुलाने से नाराज हुए शिवपाल

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ ।  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद समाजवादी पार्टी में एक बार फिर कलह शुरू हो गई। अखिलेश यादव की अध्यक्षता में कल सपा विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें अखिलेश यादव को नेता प्रतिपक्ष चुना गया। इस बैठक में ये रहा कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव को बैठक में नहीं बुलाया गया, जबकि उन्होंने सपा के टिकट पर ही जसवंतनगर सीट से चुनाव लड़ा था। ऐसे में लगने लगा है कि चाचा और भतीजे की राहें अब अलग हो गई हैं।
भाजपा के विरुद्ध बना था मजबूत संगठन
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने बताया कि समाजवादी पार्टी के विधायकों ने पार्टी अध्यक्ष और करहल से विधायक अखिलेश यादव को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना है। वरिष्ठ सपा विधायक अवधेश प्रसाद ने विधायक दल नेता चुने जाने का प्रस्ताव रखा और वरिष्ठ विधायक आलम बदी ने उसका समर्थन किया। अब सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव सदन में नेता प्रतिपक्ष होंगे। सपा विधानमंडल दल की बैठक में शिवपाल सिंह यादव को नहीं बुलाने पर उन्होंने कहा कि कल समाजवादी पार्टी की विधायक मंडल की बैठक हुई। सभी विधायकों के पास इसकी सूचना थी लेकिन मेरे पास कोई सूचना नहीं थी इसलिए मैं भी बैठक में नहीं गया। मैं दो दिनों से इस बैठक के लिए रुका था, अपने कई कार्यक्रम निरस्त किए। उसके बाद भी मुझे कोई सूचना नहीं दी गई। मैं सपा का विधायक हूं। अब मैं इटावा जाऊंगा। मैं आगे क्या करने वाला हूं इसकी सूचना जल्द ही दे दी जाएगी। बता दें कि अखिलेश यादव से विवाद बढ़ने पर शिवपाल यादव ने सपा छोड़कर नई पार्टी बना ली थी। विधानसभा चुनाव में भाजपा के विरुद्ध मजबूत मोर्चा गठन करने की गरज से अखिलेश-शिवपाल एक हुए थे,
जबकि अखिलेश यादव ने शिवपाल को पूरे चुनाव प्रचार के दौरान कोई खास तवज्जो नहीं दी थी। न ही उनकी पार्टी के सिंबल पर उन्हें चुनाव लड़ने दिया गया था। सपा के सिंबल पर चुनाव लड़ने के कारण शिवपाल सपा के विधायक हैं, लेकिन सपा वाले उन्हें सहयोगी दल बता रहे हैं। अखिलेश यादव आजमगढ़ लोकसभा सीट से सांसद थे। उन्होंने वहां से त्यागपत्र दे दिया है। माना जाता है कि इटावा-मैनपुरी की जनता और कार्यकर्ता और स्थानीय नेता करहल से शिवपाल यादव के लड़के आदित्य यादव को उस सीट से लड़ाना चाहते थे और शिवपाल को नेता प्रतिपक्ष बनाने की वकालत कर रहे थे।
मुलायम सिंह से करेंगे शिकायत
शिवपाल के बयान पर प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने कहा कि कल सपा के विधायकों को बुलाया गया था। सहयोगी दलों के किसी विधायक को नहीं बुलाया गया था, उन्हें २८ को बुलाया जाएगा। चाहे वो शिवपाल यादव हों या पल्लवी पटेल या राजभर हों, सबको २८ मार्च को बुलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पूरे दमखम से चुनाव लड़ी। किसानों के मुद्दों पर आज भी पार्टी खड़ी है और आगे भी खड़ी दिखाई देगी। किसानों के समर्थन मूल्य को समाजवादी पार्टी ने हमेशा अपनी मांग में उठाया है, जबकि भाजपा ने इसे कभी नहीं माना। उन्होंने  कहा कि भाजपा अपने घोषणा पत्र में किए वायदों को पूरा करे, तभी जनता के बीच दोबारा जाने की स्थिति में होगी।

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