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डबल इंजिन के राज में बेरोजगारी बनी बकासुर! …हर दिन बेरोजगारी के बोझ तले दबे लोग कर रहे हैं आत्महत्या

• ताजा मामले में जौनपुर में दो मासूमों के माता-पिता ने दी जान

सामना संवाददाता / लखनऊ
केंद्र की और राज्य की भाजपा डबल इंजिन सरकार देश सहित उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी खत्म करने की बात करती रहती है। केंद्र सरकार ने २०१६ में नोटबंदी का निर्णय लिया, जिसका विशेष असर मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ा। इसके बाद २०१९ में कोरोना महामारी की वजह से यूपी के लाखों लोग बेरोजगार हो गए। जो नागरिक रोजगार की तलाश में अन्य प्रदेशों में गए थे, वे वापस अपने राज्य में आ गए। हालांकि, बेरोजगारी राज्य के नागरिकों के लिए `बकासुर’ बन गई और हजारों को लील गई यानी अनेक लोगों ने आत्महत्या कर ली। ताजा मामला जौनपुर में सामने आया है। यहां के एक दंपति ने आर्थिक तंगी की वजह से आत्महत्या कर ली है।
मिली जानकारी के अनुसार, जनपद के थाना जलालपुर क्षेत्र स्थित जमालपुर गांव में सोमवार की देर रात एक दंपति ने फांसी लगाकर जान देने दे दी। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंचकर शवों को पोस्टमार्टम हेतु भेजने के बाद मामले की जांच में जुट गई है। मिली जानकारी के मुताबिक, युवक रमेश मकान की शटरिंग का काम करता था। सोमवार की रात दंपति ने बच्चियों के सो जाने पर फांसी लगा ली। इस के पीछे आर्थिक तंगी को भी जिम्मेदार माना जा रहा है।
रोटी के पड़े लाले
पिछले साल लखनऊ के एक युवक के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हुआ तो उसने आत्महत्या कर ली। जान देने से पहले उसने पत्नी को फोन किया और बोला कि मै मरने जा रहा हूं, तुम बच्चों का खयाल रखना। पति की बात सुन भागकर घर पहुंची तो फंदे पर लटकी उसकी लाश मिली। पुलिस के मुताबिक, युवक आर्थिक संकट की वजह से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

देश में बेरोजगारी के कारण आत्महत्या के आंकड़े
देश में बेरोजगारी, कर्ज, दिवालियापन के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोग आत्महत्या कर रहे हैं। वर्ष २०१८, २०१९, २०२० के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। एनसीआरबी यानी राष्ट्रीय अपराध क्राइम ब्यूरो के आंकड़ों के आधार पर केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी थी। जानकारी के अनुसार २५,००० से ज्यादा लोगों ने आत्महत्या की। आत्महत्या के पीछे दिवालियापन, बेरोजगारी और कर्ज जैसे बड़े कारण सामने आए। मंत्रालय ने एनसीआरबी के आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि भारत में साल २०१८ में २,७४१, २०१९ में २,८५१ और २०२० में ३,५४८ लोगों ने बेरोजगारी की वजह से आत्महत्या की।

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