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रोज-रोज बढ़ रहे हैं बेरोजगार! अगस्त में बेरोजगारी का आंकड़ा पहुंचा ३९.४६ करोड़ पर

  • जुलाई की तुलना में २० लाख की वृद्धि
  • ८.३ प्रतिशत के साथ साल भर के उच्चतम स्तर पर

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
अच्छे दिन, रोजगार की बाढ़, हर खाते में १५ लाख रुपए, सस्ता पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस और महंगाई से मुक्ति का सपना दिखाकर केंद्र की सत्ता में आई पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्ववाली सरकार दावा करता रही है कि जल्द ही हिंदुस्थान विश्व की चौथी आर्थिक महासत्ता बन जाएगा। हिंदुस्थान में विकास की गंगा बहेगी लेकिन बेतहाशा बढ़ती महंगाई तथा बेरोजगारी को लेकर सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) की हालिया रिपोर्ट मोदी सरकार के दावे को पोल खोलने के लिए काफी है।
आलम ये है कि देश में बेरोजगार रोज-रोज बढ़ रहे हैं। जुलाई महीने की तुलना में अगस्त महीने में बेरोजगारी के आंकड़ों में २० लाख की वृद्धि हुई है और अगस्त महीने में बेरोजगारी का आंकड़ा ३९.४६ करोड़ पर पहुंच गया है। ‌
अगस्त महीने में देश में बेरोजगारी की दर ८.३ प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो कि एक साल का उच्चतम स्तर है। सीएमआईई की हालिया रिपोर्ट ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ और हर साल लाखों नौकरियां देने का दावा करनवाली केंद्र की भाजपा सरकार की पोल खोल दी है। सीएमआईई ने देश बढ़ती बेरोजगारी को लेकर चौंकानेवाले खुलासे किए हैं। सीएमआईई की रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा ३७.३ प्रतिशत की बेरोजगारी दर के साथ सबसे खराब स्थिति में हैं। इसके बाद जम्मू-कश्मीर ३२.८ फीसदी और राजस्थान ३१ प्रतिशत का नंबर आता है। झारखंड में १७.३ और त्रिपुरा में १६.३ फीसदी लोग बेरोजगार हैं। वहीं गोवा और बिहार भी रोजगार के मामले में पिछड़े हुए हैं।‌ सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार झारखंड में १७.३ प्रतिशत, त्रिपुरा में १६.३ प्रतिशत,गोवा १३.७, दिल्ली ८.२ फीसदी, हिमाचल प्रदेश ७.३ प्रतिशत, केरल में ६.१ फीसदी और कर्नाटक में ३.५ प्रतिशत बेरोजगारी दर रही। मेघालय में दो प्रतिशत, महाराष्ट्र में २.२ प्रतिशत, गुजरात तथा ओडिशा में २.६ प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर सबसे कम ०.४ प्रतिशत रही।
शहरी-ग्रामीण दोनों पर बेरोजगारी की मार
सीएमआईई के प्रबंध निदेशक महेश व्यास के अनुसार देश में जुलाई महीने में बेरोजगारी दर ६.८ प्रतिशत थी तथा रोजगार ३९.७ करोड़ था। शहरी बेरोजगारी दर आमतौर पर ग्रामीण बेरोजगारी दर से ऊंची यानी आठ प्रतिशत रहती है, जबकि ग्रामीण बेरोजगारी दर लगभग सात फीसदी होती है। अगस्त महीने में शहरी बेरोजगारी दर बढ़कर ९.६ प्रतिशत और ग्रामीण बेरोजगारी दर बढ़कर ७.७ प्रतिशत हो गई। महेश व्यास के अनुसार अनियमित वर्षा ने बुवाई गतिविधियों को प्रभावित किया और यह ग्रामीण भारत में बेरोजगारी बढ़ने का एक कारण है। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर जुलाई में ६.१ प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में ७.७ प्रतिशत हो गई। रोजगार दर ३७.६ प्रतिशत से गिरकर ३७.३ प्रतिशत पर आ गई। हालांकि व्यास का कहना है कि आगे जाकर ग्रामीण बेरोजगारी दर में कमी आ सकती है क्योंकि मानसून में देरी से मानसून के अंत में कृषि गतिविधियों में वृद्धि होगी। यह स्पष्ट नहीं है कि आनेवाले महीनों में शहरी बेरोजगारी दर कैसी होगी?

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