मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाअद्वितिया अलंकार

अद्वितिया अलंकार

तुम पद्य का मेरे भाषा मधुर,
तुमसे गद्य की व्याख्या संपूर्ण ।।
तुम अनुवाद हो मेरे जीवन का,
तुम हो विलोम मेरे दुःख का।।

मेरे नाम के पर्यायवाची शब्दों में,
एक नाम तुम्हारा भी सम्मलित।।
तुम मेरी कविता का शीर्षक आकर्षक,
तुम बिन मेरी जीवनी अलिखित।।

मेरी एकांकी के तुम प्रमुख पात्र,
मेरे उपन्यास का संपूर्ण सार।।
तुम बिन है अपूर्ण प्रियवर,
मेरे लिखित निबंध का उपसंहार।।

तुम मेरे व्यंग्य का कटु कटाक्ष,
तुम मेरे पटकथा के प्रिय पात्र।।
तुम हो अलंकार मेरे जीवन का।
तुम मेरी किताब का प्रिय पाठ।।

काजल मिश्रा ” कृति “
गोंडा (उत्तर प्रदेश)

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