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यूपी सरकार बना रही है ट्रॉमा सेंटर; वेंटिलेटर पर हेल्थ सिस्टम! आईसीयू में लगते हैं मरीजों को टीके!

  • अस्पतालों में एमआरआई मशीन नहीं

सामना संवाददाता / मेरठ
यूपी सरकार की तरफ से दावे भले ही जो हों पर मेरठ जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं वेंटिलेटर पर हैं। पीएल शर्मा जिला अस्पताल में अलग बिल्डिंग बनने के तीन साल बाद भी सात करोड़ रुपए की एमआरआई मशीन नहीं आ पाई है। यहां बनी १२ बेड की इंटेसिव केयर यूनिट में भी मरीजों को भर्ती करने की जगह टीके लगाए जा रहे हैं। सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। पहले से मौजूद सुविधाओं का मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा। अब सवाल खड़े होने लगे हैं कि करीब सवा करोड़ रुपए की लागत से बन रहे ट्रॉमा सेंटर का भी हश्र ऐसा ही न हो जाए।
ओपीडी में आते हैं ५ लाख मरीज
बता दें कि जिला अस्पताल में हर साल ओपीडी में करीब ५ लाख मरीज आते हैं। यहां पहले से ही चिकित्सकों के २५ पद खाली पड़े हैं। आईसीयू और एमआरआई यूनिट में अलग से चिकित्सकों समेत १५ लोगों के स्टाफ की तैनाती होनी चाहिए। ऐसे में मरीजों को यहां पूरा इलाज नहीं मिल पाता।
७० बेड बढ़ाने की तैयारी
जिला अस्पताल के सभी २५० बेड फुल चल रहे हैं। ऐसे में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके नंदा ने ७० बेड और बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। बेड बढ़ाने की तैयारी चल रही है। हालांकि स्टाफ की कमी यहां भी आड़े आएगी। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर के भवन निर्माण के लिए लगभग सवा करोड़ की राशि जिला अस्पताल को मिल गई है। दिसंबर तक कार्य पूरा हो जाएगा। इसके लिए डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ भी अलग से आएगा।
सड़क दुर्घटनाओं में मेरठ संवेदनशील
सड़क दुर्घटनाओं के लिहाज से मेरठ बेहद संवेदनशील है। आए दिन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और शहर के अन्य हिस्सों में हादसे होते हैं। इसी को देखते हुए २०२१ में पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय में ट्रॉमा सेंटर मंजूर हुआ। जनवरी २०२२ से इसका कार्य भी चल रहा है। दावा है कि यहां वेंटिलेटर, ऑक्सीजन, बाईपेप समेत अन्य आधुनिक मशीन और मॉड्यूलर ओटी आदि इलाज व ऑपरेशन की सुविधाएं होंगी, वहीं जिला अस्पताल में एमआरआई यूनिट चालू न हो पाने की वजह से मरीजों को मेगनेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) के लिए या तो मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है या फिर निजी लैब में महंगी जांच करानी पड़ती है। इस यूनिट में न स्टाफ है और न ही मशीन। गंभीर मरीजों के लिए पांच वर्ष पूर्व बनी १२ बेड की इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में टीकाकरण हो रहा है।

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