मुख्यपृष्ठनए समाचारयूपी के मंत्रियों की जुबान फिसली हेट स्पीच में अव्वल रही यूपी!

यूपी के मंत्रियों की जुबान फिसली हेट स्पीच में अव्वल रही यूपी!

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

योगीराज में कुल २,२३१ मामले आए सामने, बीते दो वर्षों में हेट स्पीच के मामलों में ४५ प्रतिशत वृद्धि : एनसीआरबी

हिंदुस्थान में हेट स्पीच के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सांसद, विधायक जैसे जिम्मेदार लोग और उनके समर्थक भी ये काम स्वाभाविक तौर पर कर रहे हैं। दरअसल, हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की ओर से वार्षिक रिपोर्ट जारी की गई है। वार्षिक रिपोर्ट में देशभर में दर्ज अपराधिक मामलों का रिकॉर्ड पेश किया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, साल २०२२ में भारत में हेट स्‍पीच और गौरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के मामलों में काफी वृद्धि हुई है। रिपोर्ट से इसके आंकड़े भी सामने आए हैं। लेकिन चौंकानेवाली बात तो यह है कि नफरती भाषण के बढ़ते मामले में उत्तर प्रदेश नंबर वन पर है। एनसीआरबी के आंकड़ों की मानें तो २०२२ में देशभर में `राज्य के खिलाफ अपराध’ के ५,६१० मामले दर्ज किए गए, जबकि साल २०२१ में इनकी संख्या ५,१६४ रिकॉर्ड की गई थी। इस तरह के मामलों में उत्तर प्रदेश शीर्ष स्‍थान पर रहा, जहां कुल २,२३१ मामलों सामने आए। वहीं तमिलनाडु ६३४ और जम्मू-कश्मीर ४१७ केस के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्‍थान पर रहे। राज्य के खिलाफ अपराधों में राजद्रोह, पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम आदि के मामले शामिल हैं।

‘यूएपीए के तहत दर्ज मामलों में २३ फीसदी की वृद्धि र‍िकॉर्ड’

बात अगर सिर्फ यूएपीए की करें तो २०२१ के मुकाबले साल २०२२ के आंकड़ों में २३ फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस एक्‍ट के अंतर्गत पिछले साल सबसे ज्यादा मामले जम्मू कश्मीर में दर्ज किए गए। यहां यूएपीए अध‍िन‍ियम के तहत दर्ज केसों की संख्‍या जहां २०२१ में २८९ थी। वहीं, २०२२ में बढ़कर ३७१ हो गई। इसके बाद अगला नंबर नॉर्थ ईस्‍ट राज्य मणिपुर का है। यहां २०२२ में १६७ मामले दर्ज हुए जबकि यह आंकड़ा २०२१ में १५७ रहा था। यूएपीए के तहत २०२१ में कुल ८१४ मामले दर्ज किए गए थे, जबकि पिछले साल इनकी संख्‍या बढ़कर १००५ र‍िकॉर्ड की गई।

हेट स्‍पीच के मामलों में ४५ फीसदी की बढ़ोतरी

एनसीआरबी के आंकडों के मुताबिक, देश में हेट स्‍पीच के मामलों में भी बड़ा उछाल रिकॉर्ड किया गया। साल २०२१ के मुकाबले २०२२ में इस तरह के मामलों में ४५ फीसदी की बढ़ोतरी रिकॉर्ड की गई, जो कि बेहद ही चिंताजन‍क है।

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