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नामदारों का चर्चित खेल, जांच में पुलिस फेल! …सियासी चेहरों के खिलाफ साक्ष्य नहीं जुटा पाई यूपी पुलिस

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ । यूपी पुलिस मुकदमा दर्ज करती है, लेकिन साक्ष्य के अभाव में अक्सर उसे क्लोजर रिपोर्ट लगाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। नामचीन और बड़े सियासी चेहरों के मामले में ऐसा आम हो चुका है। यूपी के जिले में अलग-अलग समय केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ सत्ता पक्ष या विपक्ष के नेताओं पर संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए है। लेकिन पुलिस विवेचना में उनके विरुद्ध साक्ष्य न मिल पाने के चलते मुकदमों को बंद कर दिया गया।
गृहमंत्री अमित शाह को मिली थी क्लीन चिट
लोकसभा चुनाव २०१४ के दौरान जिले में पार्टी का प्रचार करने आए मौजूदा गृहमंत्री अमित शाह के विरुद्ध गांव जड़वड़ तथा द्वारिकापुरी के भावना पैलेस में जाति धर्म के नाम पर वोट मांगने के आरोप में ४ अप्रैल २०१४ को थाना ककरौली और नई मंडी में अलग-अलग एफआईआर दर्ज हुई थी। दोनों ही मामलों में अक्टूबर २०१४ में साक्ष्य न मिलने की बात कहते हुए पुलिस ने कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। बाद में वादी मुकदमा एसडीएम जानसठ तथा बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी सहायक निरीक्षक रामकुमार ने भी कोर्ट में पेश होकर एफआईआर पर सहमती जताई थी।
संजय सिंह के विरुद्ध नहीं जुटा पाए साक्ष्य
आम आदमी पार्टी नेता व सांसद संजय सिंह और दो अन्य सहयोगियों के विरुद्ध १३ अगस्त २०२० को नगर के अहाता ओलिया निवासी गौरव अग्रवाल ने शहर कोतवाली में धार्मिक विद्वेष फैलाने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। क्राइम ब्रांच पुलिस ने मामले की विवेचना की थी। लेकिन क्राइम ब्रांच भी संजय सिंह के विरुद्ध सबूत नहीं इकट्ठा कर पाई। वहीं गौरव अग्रवाल तथा गवाह विभोर सिंघल ने १७ मई २०२१ में पुलिस को लिखकर दे दिया था कि उनके पास मुकदमे से संबंधित कोई इलेक्ट्रॉनिक या दस्तावेजी साक्ष्य नहीं हैं। जिस पर क्राइम ब्रांच ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी।
संगीत सोम को मुकदमें में मिली थी राहत
भाजपा नेता व पूर्व विधायक संगीत सोम के विरुद्ध २०१३ में कथित तौर से कवाल कांड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के आरोप में एसआई सुबोध सिंह ने धार्मिक विद्वेष पैâलाने तथा आईटी एक्ट की संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। जिसकी विवेचना एसपी तथा आईपीएस अधिकारी स्वप्निल ममगई को सौंपी गई थी। बाद में विवेचना क्राइम ब्रांच तथा उसके उपरांत बरेली इन्वेस्टिगेशन सेल के इंस्पेक्टर अवध बिहारी ने की थी। लेकिन साक्ष्य न मिलने पर एडीजे-४ कोर्ट में एफआर दाखिल कर दी गई थी।
विधायक नाहिद को पुलिस ने दी क्लीन चिट
सपा के कैराना से मौजूदा विधायक नाहिद हसन के विरुद्ध १८ फरवरी २०१६ को कैराना कोतवाली में पत्रकार मुकेश कुमार ने मारपीट तथा बंधक बनाने का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने घटना की विवेचना पूरी होने की बाद २०१८ में नाहिद हसन के विरुद्ध साक्ष्य न मिलने की बात कहते हुए कोर्ट में एफआर दाखिल कर दी थी। जिस पर वादी पक्षकार ने कोर्ट में पेश होकर किसी प्रकार की आपत्ति से इंकार किया था।

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