मुख्यपृष्ठनए समाचारनंगी आंखों के सामने आया यूरेनस! ... अंतरिक्ष में दिखेगा अद्भुत नजारा

नंगी आंखों के सामने आया यूरेनस! … अंतरिक्ष में दिखेगा अद्भुत नजारा

इन दिनों हिंदुस्थान का इसरो कमाल कर रहा है। चंद्रयान ३ के सफल मिशन के बाद अब सूर्ययान भी अपने मिशन पर है। ऐसे में देश के लोगों में खगोल विज्ञाान के प्रति रुचि बढ़ रही है। अब जिन्हें अंतरिक्ष में रुचि है उनके लिए एक अच्छी खुशखबरी है। आपने आसमान में पांच ग्रहों की टिमटिमाती रोशनी देखी होगी, लेकिन एक छठा ग्रह भी है, जिसे बिना किसी दूरबीन की मदद से देखा जा सकता है। इस ग्रह का नाम यूरेनस है। इस सप्ताह यह उस स्थिति में है जिसके कारण यह हमारे आकाश में स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।
चूंकि आसमान में चांद नहीं है इसलिए इसे देखना और भी आसान होगा। अंधेरी और साफ रातों में भी यह नंगी आंखों से मुश्किल से दिखाई देता है, लेकिन इस समय यह +५.७ की तीव्रता से चमक रहा है। इस पैमाने में बढ़ती संख्या बढ़ती चमक को दर्शाती है। यूरेनस वर्तमान में नग्न आंखों से दिखाई देने वाली सीमा के करीब है। यह देर शाम के समय मेष राशि में दिखाई देता है। आधी रात तक यह पूर्वी क्षितिज से सीधे ऊपर बिंदु तक लगभग एक तिहाई रास्ते पर स्थित होगा। इस दौरान यह दो मुख्य सितारों के बीच होगा। बृहस्पति ग्रह इसके पश्चिम में होगा, वहीं पूर्व में प्लीएड्स तारा समूह होगा। एक छोटी दूरबीन की मदद से आपको हल्की हरी रोशनी दिखाई देगी। यदि आपके पास दूरबीन है तो आप इसे और भी स्पष्ट रूप से देख सकेंगे।
बता दें कि यूरेनस सूर्य से ३.२ अरब किमी दूर है। इसका व्यास ५१,२०० किमी है। नासा के वोयाजर २ ने उड़ान के दौरान चुंबकीय डेटा का अध्ययन किया, जिससे पता चला कि यह हर १७.४ घंटे में अपनी धुरी पर घूमता है। यूरेनस के अब तक २७ ज्ञात चंद्रमा हैं। ये सभी ग्रह की भूमध्य रेखा के चारों ओर कक्षा में हैं। इसमें छल्ले भी हैं, जो लगभग अपारदर्शी हैं। इन छल्लों की खोज १९७८ में हुई थी।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका कोर चट्टानी है, जो पानी, मीथेन और अमोनिया के तरल आवरण से घिरा हुआ है। इसका वायुमंडल हाइड्रोजन, हीलियम, मीथेन और थोड़ी मात्रा में एसिटिलीन और हाइड्रोकार्बन से बना है। यह ग्रह ९८ डिग्री पर झुका हुआ है, जिसके कारण यहां मौसम बहुत कठोर होते हैं। यहां उत्तरी ध्रुव में, जब सूर्य उगता है, तो ४२ वर्षों तक रहता है। इसके बाद अगले ४२ वर्ष अंधकार में ही रहते हैं। इसे सूर्य की परिक्रमा करने में ८४ वर्ष लगते हैं।

अन्य समाचार