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रोती थी, संवेदना प्रकट करती, और नवजात को मार डालती थी! …यूके की नर्स को आता था शिशुओं को मारने में मजा

भारतीय मूल के डॉक्टर की सुझबुझ से पकड़ी गई नराधम

मनमोहन
८ जून २०१५, यूके के काउंटेस ऑफ चेस्टर अस्पताल के मोर्चरी में एक नर्स के हाथ में एक नवजात शिशु का शव था.. फर्श पर उस शिशु के पिता बिलख-बिलखकर रो रहे थे और नर्स से अनुरोध कर रहे थे, ‘हमारे बच्चे को मत ले जाओ..’ नर्स के चेहरे पर जमाने भर का दुख था। उसने सहयोगियों से कहा, ‘यह दिल तोड़ने वाला था.. मेरी जिंदगी का सबसे कठिन काम.. एक पिता को शिशु से अलग कर रही थी..’ इसके बाद वो लगातार सहयोगी को अस्पताल में हो रही नवजात शिशुओं की मौत पर मार्मिक संदेश भेजती रही, ‘मैं बस बच्चों की मौत के बारे में सोचती रहती हूं.. ऐसा महसूस हो रहा है कि शिशुओं की मौत के सदमे से उबरने के लिए मुझे उस रूम में रहने की जरूरत है, ताकि मैं अपने दिमाग से उनकी छवि को निकाल सकूं..’
अस्पताल भी शिशुओं की लगातार मौत से चिंतित था, लेकिन अचानक मौतों का कारण समझ नहीं आ रहा था? अस्पताल के बाल विशेषज्ञ डॉ.रवि जयराम भी इससे काफी चिंतित थे। उनको सभी मौतों में जो एक कॉमन बात नजर आई तो वो थी, हर बार एक ही नर्स की मौजूदगी! नर्स लूसी लेटबी! लूसी वही नर्स थी, जो मोर्चरी में नवजात के पिता को ढांढस बंधा रही थी! वही, जिसकी मौजूदगी में नवजातों की मौत हो रही थी और वो इन पर सहानुभूति के टेक्स्ट भी भेज रही थी। डॉ. जयराम ने अस्पताल प्रशासन के समक्ष संदेह व्यक्त भी किया, लेकिन प्रशासन ने उल्टे उन्हें ही इस कथित उत्पीड़न के नाते नर्स से माफी मांगने को कहा। हालांकि, कई अन्य डॉक्टर्स डॉ. जयराम से सहमत थे।
दो वर्ष बाद, अप्रैल २०१७ में नेशनल हेल्थ सर्विस ने इन डॉक्टरों को पुलिस से मिलने की अनुमति दे दी। पुलिस अधिकारियों को डॉक्टरों की बातों पर विश्वास न कर पाने का कोई कारण नजर नहीं आया और जांच शुरू हो गई। ३३ वर्षीय लूसी लेटबी ने शुरुआत में तो सभी आरोपों को गलत बताया। लेकिन गहन जांच में वह टूटती चली गई। शिशुओं की जघन्य हत्याओं के बाद उसके टैक्स्ट और लिखे नोट सबूत के तौर पर इस्तेमाल हुए। वो हत्या के बाद सहयोगियों को टेक्स्ट करने के साथ-साथ डायरी में नोट्स भी लिखा करती थी। एक तरफ संवेदना प्रकट करती तो दूसरी तरफ लिखती, ‘मैंने उन्हें मार डाला जानबूझकर क्योंकि मैं उनकी देखभाल करने लायक नहीं हूं.. मैं बुरी हूं, मैंने यह किया है.. आज आपका जन्मदिन है और आप यहां नहीं हैं, मुझे इसका बहुत खेद है।’ लूसी शिशुओं को मारने के लिए उन्हें इंसुलिन का ओवरडोज देती या उन्हें अधिक मात्रा में दूध देती या उनके पेट में नैसोगैस्टरिक ट्यूब के जरिए हवा भर देती थी। सुनवाई के दौरान आरोप लगा कि लूसी अस्पताल के ही किसी विवाहित डॉक्टर के साथ रिलेशनशिप में थी। जब किसी शिशु की तबीयत ज्यादा खराब होती तो उस डॉक्टर को बुलाया जाता था। लूसी डॉक्टर से बार-बार मिलना चाहती थी। इसलिए वो शिशु को नुकसान पहुंचाती थी। वकील का कहना था कि ऐसा करके वो एक आसुरी आनंद भी महसूस करती थी। हालांकि, लूसी ने सीनियर डॉक्टर्स पर अस्पताल की विफलताओं को छुपाने के लिए दोषारोपण कर खुद को बचाने की कोशिश भी की। अंतत: ब्रिटिश अदालत ने शुक्रवार को लूसी को सात शिशुओं की हत्या का दोषी ठहराया है। ‘काउंटेस ऑफ चेस्टर’ के डॉ. रवि जयराम के चेताने के बाद यदि नर्स पर ध्यान दिया गया होता तो कई शिशुओं की जान बचाई जा सकती थी। लूसी के मामले ने ब्रिटेन के दो कुख्यात मेडिकल हत्यारों, डॉक्टर हेरोल्ड शिपमैन और नर्स बेवर्ली एलिट की यादें ताजा कर दी हैं। डॉक्टर शिपमैन, एक मेडिकल प्रैक्टिशनर था। १५ मरीजों की हत्या का दोषी। २००४ में उसने खुद ही जेल में फांसी लगा ली थी। बाद में एक सार्वजनिक जांच में यह निष्कर्ष निकला कि उसने १९७१ और १९९८ के बीच घातक मॉर्फिन इंजेक्शन से लगभग २५० मरीजों को मार डाला था। एलीट एक नर्स थी, जिसे ‘ऐंजल ऑफ डेथ’ कहा जाता है। उसको १९९३ में चार छोटे बच्चों की हत्या, तीन हत्या के प्रयास और अन्य कई अपराधों का दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

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