मुख्यपृष्ठस्तंभउत्तर की बात : यूपी में कांग्रेस की तैयारियां हुईं तेज

उत्तर की बात : यूपी में कांग्रेस की तैयारियां हुईं तेज

राजेश माहेश्वरी लखनऊ

लोकसभा चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बीजेपी की नजर यूपी पर सबसे ज्यादा टिकी है, जहां से सबसे ज्यादा ८० लोकसभा सीटें आती हैं। बीजेपी का दावा है कि इस चुनाव में पार्टी सभी ८० सीटों पर फतह हासिल करेगी। वहीं सपा, बसपा और कांग्रेस भी अपनी-अपनी रणनीति तैयार करने में जुटी हैं।
यूपी में कांग्रेस सधे कदमों से आगे बढ़ रही है। कांग्रेस की तैयारियों की झलक राजनीतिक लिहाज से सबसे अहम राज्य उत्तर प्रदेश में जमीन पर दिखाई देती है। यूपी में कांग्रेस इस बार नए उत्साह और तैयारी के साथ चुनाव मैदान में उतरने को तैयार है। बीते दिनों ही पार्टी ने पूर्वांचल के तेज-तर्रार नेता अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर राजनीतिक तापमान बढ़ाने का काम किया है। अजय राय की गिनती तेज-तर्रार और जुझारू नेता के तौर पर होती है। अजय राय २०१४ और २०१९ में वाराणसी से कांग्रेस के उम्मीदवार थे।
२०१४ के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं और पार्टी का वोट प्रतिशत ७.५३ रहा था। २०१९ लोकसभा में कांग्रेस के हाथ एक जीत ही लगी थी। २०२२ के विधानसभा चुनाव में पार्टी के सभी ३९९ प्रत्याशियों को कुल मिलाकर २१,५१,२३४ वोट मिले थे, जो कि कुल पड़े मतों का २.३३ प्रतिशत था। इससे पूर्व वर्ष २०१७ के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ११४ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिन्हें कुल ५४,१६,५४० वोट मिले थे। कांग्रेस के हिस्से ६.२५ प्रतिशत वोट आए थे। तब कांग्रेस गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में थी और फिर २०२२ में अकेले दम पर किस्मत आजमाई थी।
यूपी में कांग्रेस का वोट प्रतिशत और आंकड़े भले ही उत्साहजनक दिखाई न देते हों, लेकिन इस बार तस्वीर काफी हद तक बदली हुई दिखाई देती है। राजनीति के जानकारों के मुताबिक मोदी सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव एलायंस (इंडिया) की घोषणा हो चुकी है। जिसमें कांग्रेस की अहम भूमिका है। २०२२ में हिमाचल प्रदेश में फतह के बाद इस साल मई में कर्नाटक में मिली बड़ी जीत के साथ ही राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और आपराधिक मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से उनके कन्विक्शन पर फिलहाल रोक से कांग्रेस और उसके कार्यकर्ताओं के हौसले बुलंद है। वहीं अजय राय जैसे जुझारू नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि वो इस बार मुकाबला में पूरी तैयारी के साथ उतरेगी। पार्टी दलित-मुस्लिम गठजोड़ बनाने का प्रयास कर रही है। दलित वर्ग को पार्टी से जोड़ने के लिए जय जवाहर-जय भीम जनसंपर्क अभियान चला रही है। अभियान के अंतर्गत साढ़े पांच लाख से अधिक दलित परिवारों तक सीधे पहुंचने का लक्ष्य रखा गया। वहीं मुस्लिम समुदाय के लोगों से भी सीधा संवाद और मुलाकात का अभियान चला। बता दें चलें कि यूपी में दलित और मुस्लिम वोट बैंक मिलकर किसी भी पार्टी और प्रत्याषी की जीत को पक्का कर सकते हैं। ऐसे में पार्टी अपनी पुरानी खोई जमीन को वापस पाने की रणनीति पर काम करती दिखाई देती है। पार्टी सूत्रों के अनुसार यूपी में कांग्रेस सभी लोकसभा सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रही है। जिसके लिए सीटवार खास तैयारी की जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस को अगर अपना भविष्य और अस्तित्व निखारना है और राष्ट्रीय राजनीति में प्रभावशाली कद हासिल करना है तो उसके लिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को उत्तर प्रदेश में पार्टी की जड़ों को फिर से मजबूत करने की सबसे ज्यादा दरकार है। लोकसभा चुनाव से चंद महीने पहले बृजलाल खाबरी को हटाकर पूर्व विधायक अजय राय को उत्तर प्रदेश इकाई का अध्यक्ष बनाना कांग्रेस की उसी रणनीति का हिस्सा है। असल में जिस करिश्मे की उम्मीद उत्तर प्रदेश में है, उसके लिए पार्टी को ठोस रणनीति के साथ बड़े फैसले लेने की जरूरत है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश की कमान पूरी तरह से पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को सौंपा जाए और उन्हें उत्तर प्रदेश के ही किसी ऐसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़वाया जाए, जहां से जीत हासिल करना आसान या मुमकिन हो। जानकारों के मुताबिक, पदाधिकारियों और कार्यकर्ता खेमेबंदी से बाहर निकल जाएं और गठबंधन दलों से सीटों का बंटवारा सही तरीके से हुआ तो कांग्रेस और गठबंधन के दल भाजपा के मंसूबों पर पानी फेर देंगे। कांग्रेस को अगर भविष्य में केंद्रीय राजनीति का बड़ा खिलाड़ी बनना है तो उसके लिए उसे उत्तर प्रदेश में खुद को मजबूत करने के अलावा कोई और चारा नहीं है।
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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