मुख्यपृष्ठस्तंभउत्तरनामा : योगी मंत्रिमंडल... जंग २४ की तैयारी का अक्स!

उत्तरनामा : योगी मंत्रिमंडल… जंग २४ की तैयारी का अक्स!

हेमंत तिवारी।  उत्तर प्रदेश में नई सरकार की ताजपोशी के साथ मोदी-शाह ने योगी को केशव और ब्रजेश के रूप में दो रत्न देकर लोगों को आदतन चौंकाया है। जाहिर हो गया है कि यूपी का रण जीतने के बाद २०२४ में लोकसभा की लड़ाई में योगी के साथ भाजपा के इन दो सेनानियों की अहम भूमिका होने जा रही है।
योगी मंत्रिमंडल पार्ट दो में क्षेत्रीय, जातीय संतुलन और समीकरण का नमूना है तो भाजपा में नया नेतृत्व उभारने की कशिश भी साफ नजर आती है, जिस वैâबिनेट में २१ सवर्ण, २० ओबीसी और ९ दलित हों, वो बताता है कि भाजपा २०२४ के आम चुनाव की तैयारी में जुट गई है। उपमुख्यमंत्री के रूप में फिर से केशव प्रसाद मौर्य और नए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की नियुक्ति बताती है कि योगी ने किस तरह ओबीसी और ब्राह्मण के बीच संतुलन रखा है। हालांकि इससे पहले भी यही संतुलन था, लेकिन इस बार दिनेश शर्मा की जगह ब्रजेश पाठक ने ले ली है। समझा जाता है कि दिनेश शर्मा को संगठन में कोई जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस बार वाराणसी को काफी महत्व मिला है। जिले से तीन विधायक मंत्री पद तक पहुंचे हैं। इसी तरह पूर्वांचल के तमाम जिलों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। कुल ५२ मंत्रियों में ऐसा कोई इलाका नहीं बचा, जिसे मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं मिला हो।
केशव प्रसाद मौर्य हालांकि सिराथू सीट से सपा की पल्लवी पटेल से हार गए लेकिन पार्टी ने तमाम जातीय समीकरण के मद्देनजर उन्हें फिर से डिप्टी सीएम बनाया है। समझा जाता है कि यह नियुक्ति पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की सलाह पर की गई है। इसी तरह ब्रजेश पाठक की नियुक्ति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। लखनऊ कैंट के विधायक ब्रजेश पाठक योगी वैâबिनेट के पिछले कार्यकाल में भी मंत्री थे, लेकिन उनकी लोकप्रियता व साफ-सुथरी छवि को देखते हुए डिप्टी सीएम बनाया गया है।
मंत्रियों में बेबी रानी मौर्य और लक्ष्मी नारायण चौधरी की ताजपोशी बहुत खास है। बेबी रानी मौर्य उत्तराखंड की राज्यपाल थीं। उनसे इस्तीफा दिलवाकर भाजपा उनको यूपी की राजनीति में ले आई। भाजपा उन्हें पार्टी का दलित चेहरा बनाना चाहती है। लक्ष्मी नारायण चौधरी पश्चिमी यूपी के जाट नेता हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में जिस तरह भाजपा का गणित जाट बेल्ट में गड़बड़ाने की नौबत आई थी, उसे देखते हुए चौधरी को वैâबिनेट मंत्री बनाया गया है। बेबी रानी मौर्य के अलावा असीम अरुण भी पार्टी का दलित चेहरा हैं। पूर्व आईपीएस असीम अरुण यूपी एटीएस चीफ रह चुके हैं। उनके पिता अरुण राम यूपी के डीजीपी रहे हैं। असीम अरुण कानपुर के पुलिस कमिश्नर थे। उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और भाजपा में शामिल होने के बाद कन्नौज से चुनाव लड़ा।
वैâबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेनेवाले अरविंद कुमार शर्मा भी महत्वपूर्ण नाम है। उन्हें पीएम मोदी के नजदीकी के रूप में प्रचारित किया गया था। मोदी ही उन्हें पीएमओ में ले आए थे। वो रिटायर्ड आईएएस हैं। पिछले कार्यकाल में कोरोना की दूसरी लहर के बाद जब योगी को हटाने की कयासबाजी चल रही थी तो अरविंद के बारे में भावी सीएम के रूप में भी चर्चा चल पड़ी थी, लेकिन वो सिर्फ चर्चा भर रही। अब उन्हें कैबिनेट में लाया गया है। देखना है यूपी की इस नई सरकार में इनकी उपयोगिता क्या रहती है और २०२४ के लोकसभा चुनावों के लिए रणनीति बनाने से लेकर उसे अमलीजामा पहनाने में क्या भूमिका निभाते हैं?
मंत्रिमंडल के गठन में पार्टी ने इसी तरह वैश्य समुदाय, कुर्मी समुदाय, प्रजापति समुदाय, राजभर समुदाय, कायस्थ समुदाय का भी ध्यान रखा है। भाजपा ने अपने दो सहयोगियों अपना दल और निषाद समाज पार्टी का खास ध्यान रखा है। अपना दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल और निषाद समाज पार्टी के डॉ. संजय निषाद को वैâबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है। आशीष पटेल केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के पति भी हैं। इसी तरह राज्य मंत्रियों के रूप में भी कुछ को जगह दी गई है।
भाजपा की राजनीति में दाल-भात संग चटनी की भूमिका में रखे जानेवाले मुस्लिम समुदाय के साथ भी इस बार पार्टी ने बड़ा प्रयोग किया है। आमतौर पर मुस्लिमों में कुछ शिया मत पा जानेवाली भाजपा ने अबकी बार इस समुदाय में भी पिछड़े चेहरे पर दांव लगाया है। पिछली योगी सरकार में मंत्री रहे मोहसिन रजा की जगह इस बार पार्टी ने बलिया निवासी दानिश आजाद अंसारी को मंत्री बनाया है। दानिश आजाद, ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ से आते हैं और लंबे समय से संगठन में काम कर रहे थे।
हालांकि यूपी की सरकार में तो मुख्यमंत्री योगी ही सबसे बड़ा सवर्ण चेहरा हैं लेकिन जो २१ सवर्ण मंत्री बने हैं। उनमें भी संतुलन कायम है। मंत्रिमंडल में ठाकुर मंत्रियों जेपीएस राठौर, दयाशंकर सिंह, दिनेश प्रताप सिंह, बृजेश सिंह, मयंकेश्वर सिंह, सोमेंद्र तोमर हैं। तो दूसरी तरफ ब्राह्मणों में ब्रजेश पाठक के अलावा जितिन प्रसाद, योगेंद्र उपाध्याय, प्रतिभा शुक्ला, रजनी तिवारी, सतीश शर्मा प्रमुख हैं। इसके अलावा वैश्य समुदाय से नंद गोपाल नंदी, नितिन अग्रवाल, कपिलदेव अग्रवाल के अलावा दो भूमिहार सूर्य प्रताप शाही अरविंद कुमार शर्मा भी सवर्ण चेहरा ही हैं।
कुल मिलाकर योगी की सरकार का गठन २०२४ की बड़ी लड़ाई में मुकाबले को आसान करने और हरबा-हथियार को पहले से पैने कर लेने की मंशा के तहत किया गया है। मोदी-शाह और योगी की तिकड़ी इस काम को बखूबी अंजाम देते फिलहाल तो नजर आ रही है।
(लेखक उत्तर प्रदेश अधिस्वीकृत पत्रकार संघ के अध्यक्ष हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति के जानकार और स्तंभकार हैं।)
(उपरोक्त आलेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। अखबार इससे सहमत हो यह जरूरी नहीं है।)

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