मुख्यपृष्ठस्तंभउत्तर की उलटन-पलटन : गधे पर होकर सवार चला है प्रत्याशी यार

उत्तर की उलटन-पलटन : गधे पर होकर सवार चला है प्रत्याशी यार

श्रीकिशोर शाही
किसी भी देश में राष्ट्रीय चुनाव लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व होता है, पर कुछ लोगों के लिए यह खेल-तमाशा से ज्यादा कुछ नहीं होता। आपको याद होगा, एक धरतीपकड़ साहब थे, जिन्हें चुनाव लड़ने का शौक था। न जाने कितने चुनाव लड़े पर हजार-पांच सौ से ज्यादा वोट कभी न पाए, पर उनका नाम खूब हुआ। खैर, १९९८ में उनका निधन हो गया। अब इस लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार के गोपालगंज में एक शख्स अपने अजीब अंदाज में नामांकन भरने पहुंचा और उसने खासी चर्चा बटोर ली। यह निर्दलीय प्रत्याशी गधा पर सवार होकर जिलाधिकारी सह निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में नामांकन करने पहुंचा। ये महाशय कुचायकोट प्रखंड के शामपुर गांव के रहने वाले हैं और इनका नाम सत्येंद्र बैठा है। ये तीसरी बार लोकसभा चुनाव में भाग्य आजमाने उतरे हैं। नामांकन पर्चा भरने के बाद बैठा ने कहा कि लोकसभा चुनाव का प्रचार-प्रसार भी गधा से ही करेंगे। अब इस अजीब शौक के बारे में क्या कहा जाए।
महामहिम की प्रतिष्ठा खतरे में
राज्यपाल बहुत ही प्रतिष्ठित पद होता है। इस संवैधानिक पद की अपनी एक गरिमा होती है, पर अब तो इस पद का भी सम्मान नहीं बचा है। हाल ही में पश्चिम बंगाल में जो घटना हुई है, उसके बाद कम से कम ऐसा तो कहा ही जा सकता है। कोलकाता में राजभवन की एक अस्थायी कर्मचारी ने महामहिम राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस पर `उसका शीलभंग करने’ का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है। यह काफी शर्मनाक बात है। इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही निशाना साधा है। ममता ने पीएम की ओर इशारा करते हुए कहा कि वे चुप क्यों हैं? उन्होंने मोदी का नाम लिए बगैर कहा कि आप गुरुवार की रात वहां मौजूद थे, लेकिन आपने इस पर एक शब्द भी नहीं कहा। आपने संदेशखाली के बारे में काफी कुछ कहा, लेकिन मैंने वहां ऐसा कुछ नहीं होने दिया। उधर महामहिम का कहना है कि उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से शिकायत दर्ज कराई गई है। अब मसला चाहे जो भी हो, पर इससे राजभवन की प्रतिष्ठा पर बट्टा तो लगा ही है। इससे बचने की जरूरत है।
केजरीवाल को दिखी उम्मीद की किरण
उम्मीद पर तो खैर दुनिया कायम है और जेल में बंद किसी शख्स को सुप्रीम कोर्ट से सहानुभूति की छांव नजर आए तो फिर समझिए उसके अच्छे दिन आनेवाले हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री की अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नरमी के संकेत दिए हैं। कोर्ट ने ईडी से पूछा है कि जब आपके पास सारे डिटेल पहले से ही मौजूद थे तो चुनाव के वक्त गिरफ्तारी की क्या जरूरत थी? अब अगली सुनवाई ७ तारीख को है, जिस दिन तीसरे चरण की वोटिंग है। हो सकता है उस दिन केजरीवाल को कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल जाए। अगर ऐसा हुआ तो यह ईडी के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित होगा। बहरहाल, केजरीवाल के जेल जाने के बाद आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं ने `जेल का जवाब वोट से’ कैंपेन की शुरुआत की है, जिसे शुक्रवार को दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में आम आदमी के पार्टी के नेताओं ने चलाया। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में आप नेताओं ने अभियान की कमान संभाली। इसमें संजय सिंह ने कालकाजी और बदरपुर, गोपाल राय ने कृष्णा नगर तो सौरभ भारद्वाज ने मोती नगर का जिम्मा संभाला यानी पार्टी में जोश की कोई कमी नहीं है।

अन्य समाचार