" /> हाजमा हो खराब तो संजीवनी वटी एवं पंचामृत पर्पटी खाएं जनाब

हाजमा हो खराब तो संजीवनी वटी एवं पंचामृत पर्पटी खाएं जनाब

मैं २२ वर्षीया कॉलेज की छात्रा हूं। दो महीने पहले ही मुझे चश्मा लगा है। चश्मे का नंबर कम व दृष्टि शक्ति को बढ़ाने के लिए मुझे आयुर्वेदिक औषधि बताएं?
-नयना, खार, मुंबई
आंखों की सुरक्षा अति आवश्यक है। नेत्रों पर जोर देनेवाला काम न करें। चलती बस, ट्रेन और कम रोशनी में पढ़ना बंद करें। अंधेरा होने के कारण नेत्रों पर ज्यादा जोर पड़ता है। आंखों को मजबूत करने के लिए नेत्र व्यायाम के रूप में त्राटक कर्म करें। नेत्रों को सूक्ष्म पोषण की आवश्यकता होती है। अत: भोजन में दूध, घी, हरी सब्जियों एवं फलों का उपयोग बढ़ाएं। पत्तेदार सब्जियां, सहिजन, आंवला नेत्रों को सूक्ष्म पोषण देनेवाले खाद्य पदार्थ हैं। धूप से आंखों की सुरक्षा करें। रात में सोते समय पैर के तलवे पर एरंड तेल की मालिश करें। सप्तामृत लौह की दो-दो गोली, शिगरु घन की एक-एक गोली, रसायन टैबलेट एक-एक गोली दिन में दो बार पानी के साथ लें। नाश्ते के पहले त्रिफला घृत रोज दो चम्मच एक बार लें। फिर एक घंटे के बाद नाश्ता आदि करें। रात को सोते समय त्रिफला चूर्ण एक चम्मच गर्म पानी से लें।
मेरे १५ वर्षीय स्वस्थ लड़के की छाती में निप्पल की जगह गांठ आई हुई है। छाती का आकार भी बढ़ा हुआ लगता है, जिससे उसे शर्मिंदगी महसूस होती है। गांठ को दबाने पर दर्द होता है तथा उसमें से कोई स्राव नहीं निकलता?
-निर्मला, नेरुल, नई मुंबई
शरीर के विकास क्रम में जब हार्मोनल बदलाव होते हैं तो कुछ लोगों में इस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं। छाती का उभार कम होने के साथ ही निप्पल की गांठ भी कम होती जाएगी। मोटापा ज्यादा हो तो छाती उभरकर दिखती है। अत: मोटापा कम करने की जरूरत होती है। इसमें लज्जा की कोई बात नहीं है यह नैसर्गिक बदलाव है। त्रिफला गुग्गुल की २-२ गोलियां दिन में तीन बार, क्रौंच बीज घन टैबलेट एक गोली दो बार गर्म पानी से लें। यह दवा ४ महीने तक नियमित लें आराम हो जाएगा। यदि आपको लगे कि दवाओं से संतोषजनक परिणाम नहीं दिखाई दे रहा है तो हार्मोन संबंधित रक्त परीक्षण की आवश्यकता पड़ सकती है इसलिए इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
भोजन करने के बाद तुरंत लैट्रिन जाने की इच्छा होती है। पाचन बराबर नहीं होता है। बहुत सारी दवाइयां खाने के साथ ही तमाम टेस्ट भी करवाए, परंतु लक्षण बरकरार है। दवा बताएं?
-अमित कुमार, नालासोपारा
संजीवनी वटी एवं पंचामृत पर्पटी दोनों की दो-दो गोलियां दिन में तीन बार लें। शंख वटी एवं चित्रकादि वटी एक-एक गोली गर्म पानी से लें। बेल फल का मुरब्बा अथवा बिल्वादि अवलेह रोज दिन में दो चम्मच एक बार नाश्ते के पहले लें। खाना खाने के बाद कुटजारिष्ट चार-चार चम्मच दो बार समप्रमाण पानी मिलाकर लें। पीने के लिए नियमित रूप से गर्म पानी पीएं। पेट की तकलीफों के लिए व्यक्ति का मन भी काफी जिम्मेदार रहता है। अपने आपको तनावमुक्त रखें। व्यक्तिगत स्वच्छता एवं साफ-सफाई का ध्यान रखें। नाखून काट कर रखें। पानी को उबालकर तथा छानकर पीएं। सड़क पर मिलनेवाले फास्ट फूड आदि का परित्याग करें। मिर्च-मसाला, तली हुई चीजें आदि खाना बंद करें। ककड़ी, टमाटर, गाजर, मूली, बीट आदि को अच्छी तरह धोकर खाएं।

एम.डी., पीएच.डी. (आयुर्वेद) प्राध्यापक व वरिष्ठ चिकित्सक, केजी मित्तल पुर्नवसु आयुर्वेद महाविद्यालय व अस्पताल, चर्नी रोड, मुंबई-०२