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वरुण ने केंद्र को जारी की एडवाइजरी… नौकरी दो, झांसा नहीं!

सामना संवाददाता / नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की ‘झांसा’ पॉलिसी भाजपाई सांसद वरुण गांधी को रास नहीं आ रही है। इसलिए वरुण गांधी अक्सर मोदी सरकार और भाजपा पर क्रोधित हो जाते हैं और उन्हें खरी-खरी सुनाने लगते हैं। देश की जनता को पहले हिजाब, फिर हलाल और अब मस्जिदों पर लगे भोंगे बनाम हनुमान चालीसा के बहाने धर्म की अफीम चटा कर गुमराह कर रही भाजपा को वरुण ने इस बार आईना दिखाने का प्रयास किया है। वरुण बेरोजगारी के मुद्दे पर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने दावा किया है कि करोड़ों बेरोजगारों को ये पता ही नहीं है कि उनके साथ भविष्य में क्या होने वाला है? शनिवार को दिल्ली से दो दिवसीय दौरे पर पीलीभीत पहुंचे सांसद वरुण गांधी ने संवाद कार्यक्रम में कहा कि असली लड़ाई रोजगार और भ्रष्टाचार की लड़ाई है, यह समय चिंतन करने का है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का भविष्य भाषण से, चुनाव जीतने-हारने से नहीं बनता है, बल्कि सच्ची देश सेवा से बनता है। गांधी ने कहा कि निजीकरण होगा तो नौकरियां सीमित होंगी तथा बेरोजगारी और बढ़ेगी। सांसद ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम कोई मुद्दा नहीं है, यह मुद्दा केवल इसलिए है कि असली मुद्दों पर ध्यान न दिया जाए। इस तरह से वरुण ने न सिर्फ अपनी ही सरकार की पोल खोली बल्कि केंद्र सरकार के लिए एक एडवाइजरी भी जारी कर दी।
वरुण गांधी ने कहा कि देश में डेढ़ करोड़ से अधिक पद (नौकरियां) खाली पड़े हैं, जो भरे नहीं जा रहे हैं। नौजवान खाली पेट बेरोजगारी की मार झेलता घूम रहा है। उन्होंने कहा कि करोड़ों बेरोजगारों को नहीं पता कि आगे उनके साथ क्या होने वाला है। विधानसभा और विधान परिषद चुनाव के बाद स्थानीय सांसद वरुण गांधी पहली बार अपने संसदीय क्षेत्र पीलीभीत में दो दिवसीय दौरे पर आए और अपने अस्थाई आवास पर कार्यकर्ताओं के साथ सभा की। सभा को संबोधित करते हुए वरुण गांधी ने अपनी ही सरकार को घेरा और किसान आंदोलन की चर्चा की। युवाओं के रोजगार का मुद्दा उठाते हुए गांधी ने कहा कि हमारी लड़ाई रोजगार और आर्थिक समानता की है, हमारा संविधान यह कहता है कि सब को समान आर्थिक अवसर मिलना चाहिए। सांसद ने कहा कि यह तब संभव है, जब हर हाथ में काम मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी के भी बैंक खाते में पैसे नहीं आए, दो करोड़ नौकरियां मिलनी थीं पर नहीं मिलीं, किसान की जो आय दुगनी होनी थी वो भी नहीं हुई। सांसद ने कहा, ‘हम यह नहीं कह रहे हैं कि नई नौकरियां पैदा की जाएं, लेकिन जो पहले से घोषित हैं उन पर तो भर्ती होनी चाहिए। यह सरकार का दायित्व है और जिम्मेदारी भी।’ अत: सरकार रोजगार दे झांसा नहीं।

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