मुख्यपृष्ठनए समाचारवसुंधरा की मांग... एक साल के लिए `मुझे मुख्यमंत्री बनाओ'

वसुंधरा की मांग… एक साल के लिए `मुझे मुख्यमंत्री बनाओ’

-नड्डा की राजे को नसीहत, विधायकों से मुलाकात न करें

-राजस्थान में भाजपा विधायक दल की बैठक आज

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

इन दिनों भारतीय जनता पार्टी में सियासी घमासान जारी है। तीन राज्यों के विधानसभा के चुनावों में जीत हासिल करने के बाद भी बीजेपी को इन राज्यों के मुख्यमंत्री के नाम घोषित करने में आठ दिन लग गए। छत्तीसगढ़ के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का पेंच भले ही सुलझ गया हो लेकिन राजस्थान का रणसंग्राम अभी भी जारी है। इस कड़ी में वसुंधरा राजे के तेवर कम होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। इस बीच राजे ने एक बेहद अजीबोगरीब मांग करके बीजेपी की टेंशन को और भी बढ़ा दिया है। सूत्रों की मानें तो वसुंधरा ने `राजे’नीति खेलते हुए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से एक साल का सीएम बनाने की मांग की है। सूत्रों से यह जानकारी भी सामने आ रही है कि एक साल के सीएम बनने के बाद वे खुद ही पद छोड़ देंगी। हालांकि, सूत्रों ने ये भी बताया है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें स्पीकर बनाने की पेशकश की थी। लेकिन वसुंधरा को स्पीकर नहीं बल्कि राजस्थान का सीएम बनना है। हालांकि, जे पी नड्डा ने राजे को विधायकों से मुलाकात न करने की नसीहत भी दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आज की बैठक में वसुंधरा राजे को सीएम की कुर्सी मिलेगी या उन्हें भी शिवराज सिंह चौहान की तरह बीजेपी की ओर से शॉकिंग सरपराइज मिलेगा?
आज खत्म होगा सस्पेंस या बढ़ जाएगा टेंशन!
मिली जानकारी के मुताबिक, वसुंधरा ने गृहमंत्री से मुख्यमंत्री बनने की अपनी दबी इच्छा और राजनीतिक जीवन के अंतिम दौर में सम्मानजनक विदाई की बात कही है। गृहमंत्री ने वसुंधरा को आश्वस्त किया कि सरकार में उनकी वरिष्ठता और सुझावों का पूरा सम्मान किया जाएगा। वैसे, आज यानी मंगलवार को दोपहर २ बजे राजस्थान बीजेपी विधायक दल की बैठक २ बजे होगी, जिसमें तय होगा कि राजस्थान का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
दीया कुमारी की दावेदारी को कम करना चाहती हैं वसुंधरा
ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर वसुंधरा एक साल के लिए ही सीएम पद क्यों मांग रही है। दरअसल, राजनीतिज्ञों का मानना है कि वे एक साल का समय मांगकर दीया कुमारी और अन्य दावेदारों को रेस से बाहर करना चाहती हैं। एक साल में अपने पक्ष में माहौल बनाकर वह पार्टी पर आगे भी पद जारी रखने का दबाव बना सकती हैं और अपना वर्चस्व बनाए रखना चाहती हैं।
`मामा’ को टाटा, मोहन का वेलकम!
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम का पेंच आखिरकार सुलझ गया है लेकिन इसी के साथ ही मामा के रूप में पुकारे जाने वाले शिवराज सिंह चौहान को लेकर पांचवीं बार इस पद के लिए मौका न मिलना भी सबको हैरान कर रहा है। मोहन यादव को सीएम बनाकर पार्टी ने शिवराज सिंह चौहान के साथ-साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी साइडलाइन कर दिया है। बीजेपी को विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद शिवराज के साथ-साथ सिंधिया को भी मुख्यमंत्री पद का दमदार उम्मीदवार माना जा रहा था। बीजेपी द्वारा `मामा’ को इस तरह दरकिनार कर देना और मोहन यादव का मुख्यमंत्री पद पर ग्रैंड वेलकम करना आनेवाले दिनों में पार्टी के लिए भारी पड़ सकता है।

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