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बिना चीरफाड़ दूर होगा नसों का ब्लॉकेज!

  •  लेजर थेरेपी का प्रभावी इस्तेमाल
  • दुनियाभर में स्वीकार्यता

सामना संवाददाता / मुंबई
धमनियों में ब्लॉकेज आने से रक्त का संचार सुचारु रूप से नहीं हो पाता है और हार्ट अटैक की स्थिति बनती है। इस ब्लॉकेज को दूर करने के लिए अक्सर ऐसे मरीजों में स्टेंट डालने पड़ते हैं। लेकिन अब स्टेंट डाले बिना भी धमनियों की ब्लॉकेज को दूर किया जा सकता है। अर्थात अब चीर-फाड़ किए बगैर भी धमनियों के ब्लॉकेज को दूर किया जा सकता है। इसके लिए देश के कई अस्पतालों में ‘लेजर थेरेपी’ तकनीक अपनाई जा रही है। चिकित्सकों के मुताबिक, लेजर थेरेपी तकनीक स्टेंटिंग की प्रक्रिया से सरल है। कई बार जब एंजियोप्लास्टी करके स्टेंट डाला जाता है तो वह काम नहीं करता है। इस स्थिति को स्टेंट फेल होना कहा जाता है, जबकि कई बार कुछ मरीजों में स्टेंट के काम करने की संभावना कम होती है। ऐसे मरीजों में लेजर तकनीक का इस्तेमाल करके पहले धमनियों को साफ किया जाता है। फिर मेडिकेटेड गुब्बारे की मदद से धमनियों में दवाई छोड़ दी जाती है, जिससे धमनी की ब्लॉकेज पूरी तरह खत्म हो जाती है। इस तकनीक से ब्लॉकेज दूर होने के बाद दोबारा ब्लॉकेज की संभावना नहीं रहती है। साथ ही नस पूरी तरह से प्राकृतिक स्थिति में आ जाती है।
लेजर थेरेपी तकनीक अधिकतर ब्लॉकेज में कारगर है। इससे दोबारा ब्लॉकेज की संभावना न के बराबर रहती है। लेजर थेरेपी से ब्लॉकेज दूर करने पर मरीज को उसी दिन छुट्टी मिल जाती है। इसमें अचानक ब्लॉकेज होने की कोई संभावना नहीं होती है, जबकि स्टेंट डालते समय कई बार अचानक ब्लॉकेज होने का खतरा बना रहता है।
सहज महसूस करता है मरीज
डॉ. नेताजी मुलिक के मुताबिक, इस तकनीक से इलाज कराने में मरीज ज्यादा सहज महसूस करता है। मरीज के मन में बिना चीरफाड़ इलाज होने के कारण कोई नकारात्मक विचार या डर भी महसूस नहीं होता है।
अधिक होता है खर्च
लेजर तकनीक सहज और नॉन इनवेसिव (बिना चीरफाड़) होने के कारण स्टेंट डालने के मुकाबले थोड़ी महंगी होती है। लेजर तकनीक से ब्लॉकेज दूर करने में करीब तीन लाख रुपए तक का खर्च आता है, जबकि स्टेंट डालने का खर्च डेढ़ से दो लाख रुपए तक आता है। इस वजह से हर व्यक्ति इस तकनीक से इलाज कराने में सक्षम नहीं होता है।

इस तरह करती है काम
चिकित्सकों के अनुसार, धमनियों में ब्लॉकेज को दूर करने के लिए लेजर थेरेपी तकनीक में एक कैथेटर जो उच्च ऊर्जा प्रकाश का उत्सर्जन करता है। इसका उपयोग धमनियों को खोलने के लिए किया जाता है। यह वाष्पित हो जाता है और नसों की दीवारों को नुकसान पहुंचाए बिना ब्लॉकेज को साफ कर देता है। कई मामलों में लेजर रक्त के मार्ग को इतनी प्रभावी ढंग से साफ करता है कि रोगियों को बाद में स्टेंट की भी आवश्यकता नहीं होती है। यह तकनीक मरीजों में बाईपास सर्जरी की आवश्यकता को भी समाप्त करती है।

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