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मंत्रिमंडल की बैठक में बड़ा निर्णय …. नई मुंबई में बनेगा वेंकटेश्वर मंदिर

• राज्य सरकार ने लिया भूमि आवंटन का निर्णय
• क्षेत्र को मिलेगी नई पहचान
• उपलब्ध होंगे रोजगार के अवसर
सामना संवाददाता / मुंबई । नई मुंबई के उल्वे में जल्द ही भगवान वेंकटेश्वर का भव्य मंदिर बनेगा। महाराष्ट्र सरकार ने इसके लिए भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया है। कल मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अलावा स्कूली शिक्षा व खेल विभाग की योजनाओं की पांच प्रतिशत धनराशि आरक्षित रखने और बोरीवली के परमपूज्य स्वामी गगनगिरी महाराज आश्रम चैरिटेबल ट्रस्ट की सरकारी जमीन का पट्टा ३० वर्ष बढ़ाने के साथ कुल सात अहम फैसले लिए गए।
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में नई मुंबई के उल्वे नोड में वेंकटेश्वर मंदिर के निर्माण के लिए तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम को जमीन पट्टे पर देने का निर्णय लिया गया। श्री वेंकटेश्वर मंदिर के निर्माण के लिए एक विशेष परियोजना के तहत सेक्टर-१२, प्लॉट नंबर ३, उल्वे नोड में ४०,४०० वर्ग मीटर भूमि एक रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से आवंटित की जाएगी। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड ने हैदराबाद, चेन्नई, कन्याकुमारी, बंगलुरु, विशाखापट्टनम, भुवनेश्वर, जम्मू, नई दिल्ली, कुरुक्षेत्र और ऋषिकेश में भगवान श्री वेंकटेश्वर के मंदिरों को स्थापित किया है। बोर्ड ने नई मुंबई में मंदिर निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने की मांग की थी। नई मुंबई में वेंकटेश्वर मंदिर भक्तों के लिए एक नया मील का पत्थर साबित होगा। नई मुंबई में श्री वेंकटेश्वर का मंदिर बनने पर भक्तों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र होगा। क्षेत्र को धार्मिक और सामाजिक महत्व प्राप्त होगा, इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
बोरीवली के मनोरी में परमपूज्य स्वामी गगनगिरी महाराज आश्रम चैरिटेबल ट्रस्ट को दी गई सरकारी भूमि के पट्टे को अगले ३० वर्षों के लिए नवीनीकृत करने को मंजूरी दी गई। ट्रस्ट की भूमि का पट्टा ३ अप्रैल, २०२० को समाप्त हो गया था। संशोधित नीति के प्रावधानों के अनुसार ४ अप्रैल, २०२० से पूर्वव्यापी प्रभाव से वार्षिक भूमि किराया लगाने का निर्णय लिया गया। ट्रस्ट को मुंबई उपनगर के जिलाधिकारी को गारंटी पत्र लिखते समय निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करना होगा। इसी तरह स्कूली शिक्षा व खेल विभाग की योजनाओं के पुनर्गठन के लिए जिला वार्षिक योजना में कम-से-कम ५ प्रतिशत धनराशि आरक्षित करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत जिला परिषद के स्कूलों और आदर्श स्कूलों में विभिन्न बुनियादी सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा।
फल-फूल से विदेशी शराब बनाने संबंधी नीति को मंजूरी
राजस्व वृद्धि के लिए मौजूदा एफएल-२ लाइसेंस से अति उच्च गुणवत्ता वाले शराब बिक्री लाइसेंस और उच्च गुणवत्ता वाले शराब बिक्री लाइसेंस जैसी उप-श्रेणियां बनाने की स्वीकृति दी गई है। इसी तरह काजू, महुआ से बननेवाली शराब को विदेशी शराब में वर्गीकृत करने और फल- फूल से विदेशी शराब बनाने संबंधी नीति को मंजूरी प्रदान की गई।

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