मुख्यपृष्ठधर्म विशेषविजयश्री देती हैं मां बगलामुखी

विजयश्री देती हैं मां बगलामुखी

गुप्त नवरात्रि की आठवीं महाशक्ति और महाविद्या का नाम बगलामुखी है। ये देवी दस महाविद्याओं में सर्वाधिक पूजित हैं। इनके लिए कोई भी कार्य दुष्कर नहीं है। ये अपने भक्तों को अभय प्रदान करती हैं, विजयश्री देती हैं, मुकदमों के झंझट से मुक्ति देती हैं, आंधी-तूफान को शांत करती हैं, वाणी पर नियंत्रण रखने की सीख देती हैं और शत्रुओं पर अंकुश लगाती हैं। आज हर कोई व्यक्ति इन समस्याओं से परेशान है, इसीलिए बगलामुखी की पूजा-अर्चना भी प्रमुखता से होती है। ये भगवती पीतांबरा के रूप में परमशक्तिशाली हैं। इनकी पूजा भी उतनी ही शक्तिशाली है। अनुचित कार्य इनको पसंद नहीं। यह जहां भक्तों को विजयश्री देती हैं, वहीं कोई किसी को कष्ट पहुंचाए यह इनको स्वीकार नहीं।
बगलामुखी का शुद्ध नाम वल्गामुखी है, यानी लगाम लगाने वाली। बगला से जुड़ने के कारण इनको बगलामुखी या पीतांबरा कहा जाता है। बगलामुखी के भक्तों को सावधानी से उनकी आराधना करनी चाहिए। इनके सभी मंत्रों में अप्रितम शक्ति है। ऐसी शक्ति किसी अन्य मंत्रों में कम ही है। गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे: के समान ही बगलामुखी मंत्र की शक्ति है। शक्ति आराधकों को बगलामुखी के मंत्रों का जाप किसी विद्वान के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। कहा जाता है कि कोई जरा सी चूक से पूजा सफल नहीं होती है।
पूजा विधि
ब्रह्ममुहूर्त में नित्यक्रिया के पश्चात स्नान करके पीले वस्त्र धारण करके पीले आसन पर बैठें। देवी भगवती की पूजा भी हल्दी, पीले फूल, पीली सरसों से करें। देवी को किशमिश का भोग लगाएं। सरसों के तेल का दीपक जलाकर बगलामुखी चालीसा, बगलामुखी कवच, बगलामुखी मंत्रों से उनकी आराधना करें। पीतांबरा के बीज मंत्र `ऊं ह्लीं ऊं देवी’ की हल्दी की माला से पांच माला या तीन माला करें।
मंत्र-
ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं बगलामुखी सर्वदृष्टानां मुखं, पदम् स्तम्भय जिह्वा कीलय, शत्रु बुद्धिं विनाशाय ह्रलीं ऊँ स्वाहा।

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