मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाविक्रांत व्यू : रिश्वत महाराज की जय हो

विक्रांत व्यू : रिश्वत महाराज की जय हो

राजेश विक्रांत। बदलाव हर जगह हो रहा है। शिक्षा के साथ तकनीक, लाइफस्टाइल के साथ खानपान, सोच विचार के साथ परंपराओं में भी। लेकिन सबसे ज्यादा बदलाव हुआ है रिश्वतखोरी के तरीकों में। भले ही रिश्वत लेना और देना दोनों जुर्म हो लेकिन रिश्वत की गाड़ी पर कभी ब्रेक नहीं लगा। इसलिए पुलिस दोनों पक्षों से रिश्वत लेती है। बस तरीके व माध्यम बदल गए हैं। रिश्वत हाईटेक हो गई है। गूगल पे, फोन पे से रिश्वत ली जाने लगी है। इशारों में बात होने लगी है। रिश्वत की रकम बोलकर नहीं, पर्ची पर लिखकर बताई जाती है। इसमें कोडवर्ड चलने लगा है जैसे १ किलो का मतलब एक लाख। इस प्रक्रिया में मोची, चाय पान, मिठाई के दुकानदारों की प्रमुख भूमिका होती है। बिहार में एक पूर्व सैनिक ने पटना ट्रैफिक पुलिस के रिश्वत लेने के अनोखे तरीके का खुलासा किया है। इस युवक का पॉल्युशन सर्टिफिकेट अपडेट नहीं था। एक चौराहे पर पकड़े जाने पर इस युवक से एएसआई ने बगल की एक डेयरी शॉप पर जाकर एक किलो पेड़ा लाने को कहा। जब ये युवक दुकान पर पहुंचा तो दुकानदार ने उससे ३६० रुपए तो लिए लेकिन पेड़ा नहीं दिया। दुकानदार ने बताया कि हर दिन करीब २० लोगों को इसी तरह एएसआई १ किलो पेड़ा की कीमत मेरे पास जमा करने भेजते हैं। इसके अलावा एएसआई कई बार लोगों से गूगल पे के जरिए उसके एकाउंट में भी पैसा जमा करवा देते हैं और शाम को पूरा पैसा हमसे लेकर चले जाते हैं।
भगवान शिव हाजिर हों!
कहते हैं कि प्रशासन पत्थरदिल होता है। उसमें भावना नहीं होती। इसके अलावा प्रशासन सच्चे समाजवाद का पालन करता है। वह इंसान और भगवान को बराबर मानता है। समानता के नियम का पालन छत्तीसगढ़ में तबीयत से किया जाता है। रायगढ़ के तहसीलदार ने तो भगवान शंकर को ही नोटिस जारी कर दिया है। एक लिखित चेतावनी में तहसीलदार जी ने उनसे कहा है कि आपका यह कृत्य छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। आप पर दस हजार रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है और साथ ही कब्जे वाली जमीन से बेदखल भी किया जा सकता है। ईश्वर को नोटिस जारी करने के मामले में छत्तीसगढ़ ने काफी प्रगति की है। इससे पहले पिछले साल जांजगीर-चांपा जिले के सिंचाई विभाग ने नोटिस जारी कर भगवान शंकर से संपत्ति खाली करने को कहा था।
शाही पुलाव बनाम ख्याली पुलाव!
मुझे लगता है कि पूरी पृथ्वी पर हिंदुस्थान इकलौता देश है जहां पर शाही पुलाव के साथ ख्याली पुलाव भी परंपरा में शामिल है। हम हिंदुस्थानी इन दोनों को बेहद पसंद करते हैं। चावल व मसालों की भीनी-भीनी खुशबू वाला पुलाव स्वाद में लाजबाब होता है। हिंदुस्थानी उप महाद्वीप के अलावा यह स्पेन, लैटिन अमेरिका, पूर्वी यूरोप व मिडिल ईस्ट में अलग-अलग नामों से प्रचलित है। कहते हैं कि सिकन्दर महान पुलाव या बिरयानी का खूब शौकीन था, वह इसे मकदूनिया ले गया था। जैसे पुलाव के अलग -अलग रूप रंग होते हैं- कश्मीरी, दलिया, तवा, जर्दा, पनीर, मटर, शाही, चीज, प्याजी आदि ठीक वैसे ही ख्याली पुलाव भी है। हम हिंदुस्थानी भी इस पुलाव को खूब पकाते हैं। इसमें काफी आंनद आता है। भले ही हाथ पल्ले कुछ न पड़े। आम आदमी सुख सुविधाओं व ऐशोआराम के ख्याली पुलाव पकाता तो राजनेता सत्ता हासिल करने के। हालांकि ख्याली पुलाव पकाना एक मुहावरा है, जिसका अर्थ असंभव बातें करना, कल्पनाओं में रहना, बेसिर -पैर की बातें करना, नामुमकिन बातें सोचना, मनमानी कल्पनाएं करना होता है। लेकिन ख्याली पुलाव पकाने में कुछ नहीं जाता है। बस शेखचिल्ली महोदय का दर्जा पीछे हो जाता है।
मेहंदी का अलग रूप
हाथों में मेहंदी लगाने का शौक हर लड़की, महिला को होता है। लड़के, लड़की की शादी हो या घर में कोई फंक्शन, पर्व, त्योहार हो, हाथों में मेहंदी के बिना सारी तैयारी अधूरी लगती है। मेहंदी का लाल सुर्ख रंग हाथों को आकर्षक लुक देता है। इससे सुंदरता में चार चांद लग जाते हैं। यह हिंदुस्थानी परंपरा व रीति रिवाज में काफी पहले से है। मेहंदी का सबसे ज्यादा क्रेज सुहागन औरतें में होता है, वो अक्सर अपने हाथों में खूबसूरत और तरह-तरह के डिजाइन की मेहंदी लगवाना पसंद करती हैं। यह ट्रेंड देश हो या विदेश हर जगह है। बिना मेहंदी के महिलाओं का शृंगार अधूरा होता है। जब तक हाथों में मेहंदी न लगी हो तब तक हाथ फीके लगते हैं। मेहंदी ही है जो हाथों को बहुत ही खूबसूरत बनाती है। लेकिन प्रतापगढ़ की एक लड़की ने मेहंदी का एक अलग उपयोग करने का करिश्मा कर दिखाया है। उसने परीक्षा से पहले मेहंदी से हाथ पर एमएससी वनस्पति विज्ञान के उत्तरों को लिख डाला। केंद्राध्यक्ष ने उसे रस्टीकेशन का प्रसाद दिया है। इसलिए हम कह सकते हैं कि मेहंदी के अनेक उपयोग हो सकते हैं। शृंगार के साथ मेहंदी नकल सामग्री लिखने का भी जरिया बन सकती है।

(लेखक तीन दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और ११ पुस्तकों का लेखन-संपादन कर चुके वरिष्ठ व्यंग्यकार हैं।)

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